जनरल मोटर्स और फिएट के बाद फोर्ड भी भारत में अपना कारोबार बंद कर सकती है। खबरों के मुताबिक तकरीबन फोर्ड ने महिन्द्रा एंड महिन्द्रा से एक समझौता साइन किया है। इससे पहले जनरल मोटर्स ने 2017 में और फिएट ने 2019 में भारत में कारोबार बंद करने का फैसला किया था। गौरतलब है कि फोर्ड देश में आने वाली पहली विदेशी कार निर्माता कंपनी थी।
फोर्ड और महिन्द्रा में समझौता
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रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक फोर्ड और महिन्द्रा ने एक नया समझौता किया है। इस समझौते के तहत महिन्द्रा के पास 51 प्रतिशत की हिस्सेदारी है और जबकि फोर्ड के पास 49 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। वहीं कंपनी पूरी तरह से भारत से कारोबार बंद नहीं करेगी, जैसा कि जनरल मोटर्स के ब्रांड शेवरले ने 2017 में किया था।
1995 में फोर्ड भारत में आने वाला पहला विदेशी ब्रांड था
संयुक्त समझौते के तहत फोर्ड भारत में स्वतंत्र निर्माता की तरह काम करने की बजाय, महिन्द्रा के साथ मिल कर कारें बनाएंगी। फोर्ड ऐसा बढ़ती लागत को कम करने के लिए कर रही है। फोर्ड दुनिया की सबसे पुरानी कार बनाने वाली कंपनियों में शामिल है। वहीं तकरीबन 25 साल पहले साल 1995 में फोर्ड भारत में आने वाला पहला विदेशी ब्रांड था।
आइकन मॉडल से की थी शुरुआत
खास बात यह है कि फोर्ड ने 1995 एक संयुक्त समझौते के तहत ही भारत में एंट्री की थी और तब भी महिन्द्रा के साथ उसका समझौता था, और बाद में फोर्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के तहत खुद कारें बनाने लगी। तब फोर्ड ने द एस्कॉर्ट और आइकन मॉडल को लांच किया था। हालांकि उस समय फोर्ड भारतीय बाजार में ज्यादा करिश्मा नहीं दिखा पाई थी। लेकिन बाद में जब उसने फोर्ड इकोस्पोर्ट और एंडेवर लान्च की, तो ग्राहकों ने उसे हाथों-हाथ लिया।
वैश्विक लागत में कटौती के लिए उठाया कदम
रायटर्स की रिपोर्ट कहती है कि वैश्विक लागत में कटौती करने के लिए फोर्ड ने यह कदम उठाया है। पिछले साल अगस्त में भी फोर्ड इंडिया की तरफ से लागत में कटौती की खबरें आई थीं। कंपनी ने अपनी शानदार साइबरहब के ऑफिस से छोटे ऑफिस में भी शिफ्ट किया था। वहीं अक्टूबर में कर्मचारियों को कोई इंक्रीमेंट भी नहीं दिया गया। कंपनी में वरिष्ठ पदों को भरा नहीं जा रहा है और कर्मियों को चेन्नई प्लांट में शिफ्ट किया जा रहा है।