वास्तु शास्त्र एक ऐसा विज्ञान है जिसमें दिशाओं की ऊर्जा का महत्व है। पूर्व, उत्तर, दक्षिण, पश्चिम के अलावा चार कोणीय दिशाओं की भी गणना इस विज्ञान के तहत की जाती है। उत्तर पूर्व को ईशान कोण, दक्षिण पूर्व को आग्नेय कोण, दक्षिण पश्चिम को नैऋत्य कोण और उत्तर पश्चिम को वायव्य कोण कहा जाता है और इसी के आधार पर पूरी वास्तु की गणना की जाती है। यहां हर दिशा का महत्व है क्योंकि हर दिशा पर ग्रह, उसके स्वामी और ब्रह्माण्ड की ऊर्जा का प्रभाव रहता है। इसी कारण से हमारे ऋषि मुनि हजारों साल पहले इन बातों को समझते थे और उन्होंने अपने ग्रंथों के माध्यम से इस बात को समझाया कि हमें दिशाओं को ठीक रखना चाहिए।
Vastu Tips: वास्तु की 8 दिशाओं का महत्व क्या है ? ऊर्जा स्तर और स्वामी ग्रह की सम्पूर्ण जानकारी
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 02 May 2023 03:57 PM IST
सार
उत्तर पूर्व को ईशान कोण, दक्षिण पूर्व को आग्नेय कोण, दक्षिण पश्चिम को नैऋत्य कोण और उत्तर पश्चिम को वायव्य कोण कहा जाता है और इसी के आधार पर पूरी वास्तु की गणना की जाती है।
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