सनातन धर्म में सरस्वती पूजा का विशेष महत्व है। देवी सरस्वती को विद्या की देवी माना जाता है। ज्ञान, वाणी, बुद्धि, विवेक, विद्या और सभी कलाओं से परिपूर्ण मां सरस्वती की इस दिन पूजा अर्चना की जाती है। वसंत पंचमी का दिन शिक्षा प्रारंभ करने, नई विधा, कला, संगीत आदि सीखने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। छोटे बच्चों को इस दिन अक्षर ज्ञान कराया जाता है। गांवों में तो आज भी इस दिन बच्चों का पट्टी और कलम पूजन कराया जाता है। मान्यता है कि इस दिन छोटे बच्चों की शिक्षा का आरंभ करने के लिए पुस्तक पूजन करना अति शुभ रहता है। ऐसा करने से पूरे विद्यार्थी जीवन में माँ सरस्वती की कृपा बनी रहती है,शिक्षा में आशातीत सफलता प्राप्त होती है। वसंत पंचमी के दिन बच्चों के अध्ययन कक्ष में कुछ वास्तु के अनुसार परिवर्तन कर एवं माँ सरस्वती की उपासना करने से विद्यार्थियों को शिक्षा में लाभ प्राप्त होता है।
Saraswati Puja 2021: वास्तु नियमों का ध्यान रखकर करें मां सरस्वती की उपासना, विद्यार्थियों को मिलेगी कामयाबी
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दिशा का रखें ध्यान-
खूब मेहनत एवं सुख-सुविधाओं के उपरांत भी वास्तुदोष होने पर परीक्षा में विद्यार्थियों को अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाता। इसलिए आपका बच्चा कहाँ पढ़ रहा है, पढ़ते वक्त किस दिशा में उसका चेहरा है, इस बात पर गौर करना वेहद ज़रूरी हो जाता है। परीक्षा में सफलता के लिए मेहनत के साथ-साथ अध्ययन कक्ष का सही दिशा में होना बहुत आवश्यक है। पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा ध्यान और शांति की दिशा मानी गई है व सकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव भी इसी दिशा में सबसे अधिक होता है। अतः ध्यान रहे कि अध्ययन कक्ष इन्हीं दिशाओं में हो और पढ़ते समय चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे ।पढ़ाई की मेज रखने की सबसे उपयुक्त जगह उत्तर जोन है,यहाँ मेज रखने से बच्चे कॅरियर पर सबसे ज्यादा ध्यान देते है । पढाई हेतु कमरे में पुस्तकों की छोटी और हल्की रैक या अलमारी पूर्व या उत्तर दिशा में होनी चाहिए। टेबल लैंप मेज़ के दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना लाभदायक होगा।टेबल कवर के रूप में सफ़ेद चादर का प्रयोग करना सात्विक विचारों में वृद्धि करता है।अध्ययन कक्ष को साफ़ एवं मध्य को खाली रखें , इससे ऊर्जा का संचार होता रहेगा।
ऐसे करें पूजा
वसंत पंचमी के दिन विद्यार्थी श्वेत या पीले वस्त्र पहन कर पढ़ने की मेज़ पर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में बुद्धि के देवता श्री गणेश और शिक्षा की देवी माँ सरस्वती की तस्वीर लगाएं। मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा करने के दौरान उनको पीले पुष्प, पीले रंग की मिठाई या खीर जरूर अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा उनको केसर या पीले चंदन का टीका लगाएं एवं पीले वस्त्र भेंट करें। इसके साथ ही पूजा के स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबों को रखें, ऐसा करने से मां सरस्वती की कृपा से ही व्यक्ति को ज्ञान, बुद्धि, विवेक के साथ विज्ञान, कला और संगीत में महारत हासिल करने का आशीष मिलता है।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥
शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्॥
हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्।
वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्॥2॥