Vaishakh Purnima 2026: इस वर्ष वैशाख पूर्णिमा की तिथि 30 अप्रैल को रात 9 बजकर 12 मिनट पर शुरू होकर 1 मई को रात 10 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि का विशेष महत्व होता है, इसलिए इस बार वैशाख पूर्णिमा 1 मई 2026 को ही मनाई जाएगी। इसी दिन पूजा-पाठ, दान-दक्षिणा और अन्य धार्मिक कार्य करना अधिक फलदायी माना जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं के साथ पूर्ण रूप में दिखाई देता है। इसका सीधा प्रभाव मन और भावनाओं पर पड़ता है, क्योंकि चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। ऐसे में यह दिन मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का उत्तम अवसर होता है। अगर इस दिन कुछ खास उपाय श्रद्धा के साथ किए जाएं, तो जीवन में स्थिरता, सुख-समृद्धि और शांति का संचार होता है।
Vaishakh Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा कल, सुख-समृद्धि और लाभ के लिए करें ये 5 सरल उपाय
Vaishakh Purnima 2026: 1 मई को वैशाख पूर्णिमा व बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन कुछ उपाय करना लाभकारी होता है। आइए इनके बारे में जानते हैं।
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दान-पुण्य करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा पर अन्न, जल, फल, वस्त्र, चावल और दूध का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं रहती और जीवन में बरकत बनी रहती है।
चंद्रमा को अर्घ्य दें
पूर्णिमा की रात चंद्रमा को कच्चे दूध में चीनी मिलाकर अर्घ्य देना चाहिए। यह उपाय मानसिक शांति देता है और कुंडली के चंद्र दोष को शांत करने में सहायक माना जाता है।
तुलसी को जल अर्पित करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा पर सुबह स्नान के बाद शुद्ध मन से तुलसी के पौधे को जल चढ़ाएं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और वातावरण पवित्र बना रहता है।
भगवान विष्णु को पीले भोग अर्पित करें
वैशाख पूर्णिमा पर विष्णु जी को पीले रंग की वस्तुएं जैसे हल्दी, केला या बेसन से बने पकवान अर्पित करें। इससे धन-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
भगवान शिव की पूजा करें
वैशाख पूर्णिमा पर शिव जी की आराधना भी अत्यंत शुभ मानी जाती है। शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित कर ॐ नमः शिवाय का जाप करने से मन को शांति और जीवन में संतुलन मिलता है।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।
दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी ।
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि ।
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा ।
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी ।
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे ।
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें ।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।