11 मई 2020 से शनि वक्री हो रहे हैं। वक्री चाल को उल्टी चाल भी कहते हैं। शनि इस समय मकर राशि में गोचर हैं, जहां पर अगले ढाई वर्षों तक रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कोई ग्रह सीधी दिशा से चलते हुए उल्टी दिशा में चलने लगता है, तो इस गति को वक्री गति कहा जाता है। शनि देव मकर राशि में रहते हुए 11 मई से 29 सितंबर तक वक्री अवस्था में ही रहेंगे।
Shani Vakri 2020: शनि की वक्री चाल से किन राशियों पर होगा सबसे ज्यादा असर
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शनि के वक्री होने पर उन राशि के जातकों पर ज्यादा असर देखने को मिलेगा जिन राशियों पर इस समय शनि की साढ़ेसाती या फिर ढैय्या चल रही है। शनि के मकर राशि में प्रवेश करने पर मौजूदा समय में धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढेसाती चल रही है। वहीं मिथुन और तुला राशि के जातकों पर ढैय्या का प्रकोप है। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों पर आगे आने वाले 30 वर्षों में कब-कब शनि का प्रकोप रहेगा।
शनि साढ़े साती और ढैय्या से बचने के लिए शनि धाम कोकिलावन में कराएं तेल अभिषेक
साढ़ेसाती- 29 मार्च 2025 से 31 मई 2032 तक
ढय्या- 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक
- 12 दिसंबर 2043 से 8 दिसंबर 2046 तक
शनि साढ़े साती और ढैय्या से बचने के लिए शनि धाम कोकिलावन में कराएं तेल अभिषेक
वृष राशि
साढ़ेसाती- 3 जून 2027 से 13 जुलाई 2034 तक
ढय्या- 27 अगस्त 2036 से 22 अक्टूबर 2038 तक
साढ़ेसाती- 8 अगस्त 2029 से 27 अगस्त 2036 तक
ढैय्या- 24 जनवरी 2020 से 29 अप्रैल 2022 तक
22 अक्टूबर 2038 से 29 जनवरी 2041 तक