ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि मनुष्य का स्वभाव, उसके कर्म और उसकी आदतें सीधे तौर पर ग्रहों की स्थिति और उनके फलादेश को प्रभावित करती हैं। ग्रह केवल जन्मकुंडली में ही अपना प्रभाव नहीं दिखाते, बल्कि व्यक्ति के आचरण से भी सक्रिय या निष्क्रिय होते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब मनुष्य अपनी आदतों पर नियंत्रण नहीं रख पाता, तब वे आदतें उसके ग्रहों को दुर्बल कर जीवन में बाधाएं बढ़ा देती हैं।
Rahu Gochar 2026: धन-संपत्ति में बाधा और तनाव में वृद्धि, इन राशियों पर होगा राहु का अशुभ प्रभाव
साल 2026 में राहु-बुध का दुर्लभ संयोग, इन राशियों के लिए शुभ रहेगी युति और मिलेगा आकस्मिक लाभ
2 of 8
ज्योतिष में सूर्य ग्रह का महत्व
- फोटो : अमर उजाला
सूर्य
धार्मिक ग्रंथों में सूर्य को आत्मा, तेज और सम्मान का कारक माना गया है। यदि व्यक्ति में अत्यधिक अहंकार हो, वह माता-पिता, बुजुर्गों या गुरुजनों का सम्मान न करें, तो सूर्य ग्रह कमजोर होता है। सूर्य के कमजोर होने से प्रतिष्ठा हानि, नेतृत्व क्षमता में कमी और स्वास्थ्य समस्याएं प्रकट होती हैं। विनम्रता और सेवा सूर्य को मजबूत करती है।
3 of 8
ज्योतिष में चंद्रमा का महत्व
- फोटो : अमर उजाला
चंद्रमा
चंद्रमा मन और भावनाओं का प्रतीक है। जो लोग अत्यधिक चिंता करते हैं, हर वक्त नकारात्मक सोचते हैं या क्रोध में निर्णय लेते हैं, वे चंद्रमा को कमजोर करते हैं। इसके प्रभाव से मानसिक अस्थिरता, घर-परिवार में तनाव और नींद से जुड़ी समस्याएं बढ़ती हैं। शांत रहने की आदत और जलदान से चंद्रमा संतुलित होता है।
4 of 8
ज्योतिष में मंगल ग्रह को सेनापति का दर्जा प्राप्त है
- फोटो : अमर उजाला
मंगल
मंगल साहस और ऊर्जा का ग्रह है। यदि किसी व्यक्ति में अत्यधिक क्रोध, झगड़ा करने की प्रवृत्ति, हिंसा या जोखिम उठाने की जल्दबाजी हो, तो मंगल ग्रह अशांत हो जाता है। इसके चलते दुर्घटनाएँ, कोर्ट-कचहरी के मामले और रक्त-संबंधी समस्याएं निर्माण होती हैं। संयम और अनुशासन मंगल को शुभ बनाते हैं।
5 of 8
बुध ग्रह का प्रभाव
- फोटो : अमर उजाला
बुध
बुध बुद्धि और वाणी का कारक है। जो लोग आदतन झूठ बोलते हैं, दूसरों को गलत सलाह देते हैं या गपशप में लिप्त रहते हैं, उनका बुध ग्रह खराब होने लगता है। इसके दुष्प्रभाव से निर्णय क्षमता घटती है और व्यापार में नुकसान होता है। सत्य बोलने और विद्या का सम्मान करने से बुध मजबूत रहता है।