Makar Sankranti 2020: ग्रहों के अधिपति एवं फलित ज्योतिष में आत्मा के कारक भगवान सूर्य धनु राशि की यात्रा समाप्त करके 15 जनवरी की प्रातः 4 बजकर 5 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। यहां पर ये 13 फरवरी को दोपहर बाद 3 बजकर 1 मिनट तक विराजमान रहेंगे। उसके बाद कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इनके मकर राशि में प्रवेश करते ही देवताओं का दिन और पितरों की रात्रि का शुभारंभ हो जाएगा। सूर्यदेव सभी ग्रहों के अधिपति एवं सिंह राशि के स्वामी है। आदिकाल में इनके पास सभी 12 राशियां थी। परंतु कुछ कालोपरांत इन्होंने सिंह राशि अपने पास रखा और कर्क राशि चंद्रमा को दे दिया। बाकी दो-दो राशियां अन्य ग्रहों में बांट दी।
मेष राशि में सूर्य उच्च एवं तुला राशि में नीच संज्ञक माने गए हैं। किसी भी जातक की जन्मकुंडली में यदि सूर्य अकेले ही बलवान हो केंद्र अथवा त्रिकोण में हों तो उस व्यक्ति का जीवन कामयाबियों से भरा रहता है। इनके राशि परिवर्तन का सभी बारह राशियों पर कैसा प्रभाव पड़ेगा। इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
मेष राशि- राशि से दशम भाव में सूर्य का गोचर सर्वश्रेष्ठ माना गया है। किसी भी तरह का रोजगार की दिशा में किया जा रहा प्रयास अति सफल रहेगा। शासन सत्ता का पूर्व सुख मिलेगा। अपने अधिकार क्षेत्र का सही उपयोग करते हुए कार्य करेंगे तो समाज में मान प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी। चुनाव से संबंधित कोई बड़ा निर्णय लेना चाह रहे हों तो और अच्छा है लाभ उठाएं।
वृषभ राशि- राशि से भाग्यभाव में सूर्य का गोचर मिलाजुला फल देगा। कई बार देखा गया है कि कार्य होते होते रह जाता है किंतु अंततः सफलता हासिल होती है अतः आप परेशान न हों। विदेश यात्रा के योग एवं विदेशी कंपनियों से लाभ। प्रतियोगिता में सफलता एवं संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। अपने अदम्य पराक्रम के बल पर विषम हालात को भी सामान्य कर लेंगे।
मिथुन राशि- राशि से अष्टम भाव में सूर्य का गोचर आपको यशस्वी और प्रतापी बनाएगा। किंतु स्वास्थ्य की दृष्टि से सावधान रहना पड़ेगा। अग्नि, विष एवं दवाओं के रिएक्शन से बचें। कोर्ट कचहरी के मामले बाहर ही निपटा लें तो बेहतर रहेगा। कार्यक्षेत्र में व्यर्थ विवाद एवं षड्यंत्र का शिकार होने से भी बचें। किसी महंगी वस्तु के क्रय का योग बन रहा है।
कर्क राशि- राशि से सप्तम भाव में सूर्य का गोचर दांपत्य जीवन के लिए सामान्य रहेगा। व्यापारिक वर्ग को भी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। इस अवधि के मध्य साझा व्यापार करने से बचें। सरकार के प्रतिष्ठानों में रुके हुए कार्यों का निपटारा होगा। विवाह से संबंधित वार्ता में विलंब हो सकता है। संतान के दायित्व की पूर्ति एवं प्राप्ति के भी योग।