Effects Of Rahu In Horoscope: आपने कई बार ऐसे लोगों की कहानी सुनी होगी, जो रातों-रात फर्श से अर्श तक का सफर तय कर लेते हैं। ऐसे में हर कोई इनकी किस्मत की दाद देता है तो कोई कहता है क्या स्मार्ट व्यक्ति है सही समय पर सही फैसले लेकर जिंदगी में आगे बढ़ गया। जाहिर है जिंदगी में हमेशा अभिव्यक्ति की कीमत ज्यादा रही है यानी पर्दे के पीछे की गई मेहनत से ज्यादा सलाम दुनिया पर्दे के सामने ठोंकती है।
Rahu: पलभर में किस्मत बदल देता है राहु, कुंडली में बैठा सही गणित तो दौलत-शोहरत के ढेर पर बैठ जाएंगे आप
वैदिक ज्योतिष में राहु को पापी ग्रह माना गया है। इसे ज्योतिष में एक छाया ग्रह के रूप में जाना जाता है, क्योंकि इसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है। अगर किसी की कुंडली में राहु शुभ स्थान पर विराजमान होते हैं, तो पल भर में व्यक्ति की किस्मत बदल सकती है।
Please wait...
शुभ स्थिति में राहु के प्रभाव
वैदिक ज्योतिष के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में राहु लग्न भाव में स्थित हो, तो उसका व्यक्तित्व आकर्षक और प्रभावशाली सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित माना जाता है। हालांकि इसका प्रभाव पूरी तरह से उस राशि पर निर्भर करता है जिसमें राहु स्थित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि राहु शुभ स्थिति में हो और कुंडली में बलवान हो, तो यह व्यक्ति को तेज बुद्धि और भाग्यशाली बनाता है। मजबूत राहु के प्रभाव से व्यक्ति धार्मिक कार्यों में रुचि लेता है और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त करता है।
Guru Uday In Mithun: 12 साल बाद बृहस्पति होंगे मिथुन में उदित, इन 3 राशियों को मिलेगा नौकरी, धन और सम्मान
Trigrahi Yog 2025: गुरु, सूर्य और बुध की युति से बनेगा त्रिग्रही योग, इन राशि वालों को मिलेंगे अच्छे मौके
कमजोर या पीड़ित राहु के प्रभाव
अगर कुंडली में राहु अशुभ या पीड़ित स्थिति में हो, तो इसके दुष्प्रभाव सामने आते हैं। ऐसे व्यक्ति में नकारात्मक आदतें विकसित हो सकती हैं, जैसे छल, कपट, और धोखा देना। वह मांसाहार, शराब और अन्य नशे की आदतों का शिकार हो सकता है। राहु का अशुभ प्रभाव व्यक्ति को अधार्मिक बनाता है।
पीड़ित राहु का असर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इससे शारीरिक रोग उत्पन्न हो सकते हैं, जैसे हिचकी, मानसिक असंतुलन, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, अल्सर और गैस से जुड़ी समस्याएं।
1. लग्न भाव (पहला भाव) में राहु
व्यक्ति आकर्षक, रहस्यमयी और प्रभावशाली होता है। आत्मविश्वास अधिक होता है, लेकिन अहंकार की भी प्रवृत्ति हो सकती है।वैवाहिक जीवन में परेशानियाँ आ सकती हैं।
2. धन भाव (दूसरा भाव) में राहु
व्यक्ति को धन की प्राप्ति होती है, लेकिन धन टिकता नहीं है। बोलचाल में कड़वाहट या धोखे की प्रवृत्ति हो सकती है। पारिवारिक जीवन में खटास आ सकती है।
3. पराक्रम भाव (तीसरा भाव) में राहु
साहसी, जोखिम लेने वाला और रणनीतिक व्यक्ति बनाता है। छोटी यात्राएं लाभदायक होती हैं। भाई-बहनों से तनाव संभव है।
गृहस्थ जीवन में अस्थिरता, मानसिक अशांति। माता से दूरी या संबंधों में तनाव। वाहन और संपत्ति के मामलों में अनियमितताएं या विवाद हो सकते हैं।
5. संतान भाव (पाँचवां भाव) में राहु
संतान सुख में देरी या बाधा। प्रेम संबंधों में धोखा या भ्रम की स्थिति। रचनात्मकता तो होती है लेकिन मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है।
6. ऋण-शत्रु-रोग भाव (छठा भाव) में राहु
रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। शत्रु परास्त होते हैं, लेकिन कानूनी विवाद संभव हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ रह सकती हैं, विशेषकर पेट या त्वचा से जुड़ी।