Guru Rashi Parivartan 2021: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह का राशि परिवर्तन बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। आज 20 नवंबर, शनिवार को सबसे ज्यादा शुभ फल देने वाले देवगुरु बृहस्पति कुंभ राशि में गोचर करने वाले हैं। कुंभ राशि पर शनि का स्वामित्व माना गया है जबकि मकर राशि में विराजमान देवगुरु शनि के स्वामित्व वाली ही दूसरी राशि है। गुरु करीब 12 साल बाद कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। गुरु किसी एक राशि में 13 महीनों के लिए रहते है। गुरु और शनि दोनों ही सम का भाव रखते हैं। गुरु और शनि में किसी भी तरह का कोई शत्रुता का भाव नहीं होता है। गुरु 20 नवंबर को अपनी नीच राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। गुरु का कुंभ राशि में जाने के कारण कई महीनों से मकर राशि में गुरु और शनि की युति खत्म हो जाएगी।
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Guru Rashi Parivartan 2021: आज गुरु का कुंभ राशि में परिवर्तन, जानें कन्या राशि के लोगों पर प्रभाव
Sat, 20 Nov 2021 06:08 AM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 20 Nov 2021 06:08 AM IST
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guru ka rashi parivartan
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12 वर्ष बाद कुंभ राशि में गुरु
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु किसी एक राशि में दोबारा आने के लिए करीब 12 महीने का समय लेते हैं। इससे पहले गुरु 2009 में कुंभ राशि में थे। गुरु के 20 नवंबर से कुंभ राशि में आने पर इनकी दृष्टि मिथुन, सिंह और तुला राशि पर रहेगी। इससे कुछ महीने पहले गुरु कुंभ राशि में रहते हुए वक्री होकर मकर राशि में आए थे। 20 नवंबर 2021 को गुरु फिर से कुंभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं। गुरु के कुंभ राशि में प्रवेश करने पर कई राशियों के जातकों पर इसका असर देखने को मिलेगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु किसी एक राशि में दोबारा आने के लिए करीब 12 महीने का समय लेते हैं। इससे पहले गुरु 2009 में कुंभ राशि में थे। गुरु के 20 नवंबर से कुंभ राशि में आने पर इनकी दृष्टि मिथुन, सिंह और तुला राशि पर रहेगी। इससे कुछ महीने पहले गुरु कुंभ राशि में रहते हुए वक्री होकर मकर राशि में आए थे। 20 नवंबर 2021 को गुरु फिर से कुंभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं। गुरु के कुंभ राशि में प्रवेश करने पर कई राशियों के जातकों पर इसका असर देखने को मिलेगा।
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ज्योतिष में गुरु ग्रह का महत्व
देवगुरु बृहस्पति धनु और मीन राशि के स्वामी है जबकि कर्क राशि में उच्च के और मकर राशि में नीच के होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बृहस्पति शिक्षा क्षेत्र, ज्ञान-विज्ञान, शोधपरक कार्य, प्रवचनकर्ता, धर्म तथा अध्यात्म से जुड़े क्षेत्र, बैंकिंग सेक्टर, लेखन, प्रकाशन तथा संपादन के कार्य में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। बृहस्पति अपनी नीच राशि मकर की यात्रा समाप्त करके 20 नवंबर की मध्य रात्रि 11 बजकर 17 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इस राशि पर ये 13 अप्रैल 2022 तक गोचर करेंगे उसके बाद मीन राशि में चले जाएंगे। धनु और मीन राशि के स्वामी बृहस्पति का राशि परिवर्तन पृथ्वी वासियों पर सर्वाधिक असर कारक रहता है।
देवगुरु बृहस्पति धनु और मीन राशि के स्वामी है जबकि कर्क राशि में उच्च के और मकर राशि में नीच के होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बृहस्पति शिक्षा क्षेत्र, ज्ञान-विज्ञान, शोधपरक कार्य, प्रवचनकर्ता, धर्म तथा अध्यात्म से जुड़े क्षेत्र, बैंकिंग सेक्टर, लेखन, प्रकाशन तथा संपादन के कार्य में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। बृहस्पति अपनी नीच राशि मकर की यात्रा समाप्त करके 20 नवंबर की मध्य रात्रि 11 बजकर 17 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इस राशि पर ये 13 अप्रैल 2022 तक गोचर करेंगे उसके बाद मीन राशि में चले जाएंगे। धनु और मीन राशि के स्वामी बृहस्पति का राशि परिवर्तन पृथ्वी वासियों पर सर्वाधिक असर कारक रहता है।
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राशि
कन्या राशि में गुरु का प्रभाव
राशि से छठे शत्रुभाव में गोचर करते हुए गुरु का प्रभाव कई तरह के अप्रत्याशित परिणाम और उतार-चढ़ाव का सामना करवाएंगे। गुप्त शत्रुओं की अधिकता रहेगी। पढ़े-लिखे और आपके नजदीक काम करने वाले ही आपके दुश्मन बनेंगे। इस अवधि के मध्य किसी को भी अधिक कर्ज देने से बचें अन्यथा आर्थिक हानि के योग। झगड़े-विवाद तथा कोर्ट कचहरी से संबंधित मामले भी आपस में सुलझा लेना समझदारी रहेगी। विदेशी मित्रों तथा संबंधियों से अप्रिय समाचार प्राप्ति के योग हैं।
राशि से छठे शत्रुभाव में गोचर करते हुए गुरु का प्रभाव कई तरह के अप्रत्याशित परिणाम और उतार-चढ़ाव का सामना करवाएंगे। गुप्त शत्रुओं की अधिकता रहेगी। पढ़े-लिखे और आपके नजदीक काम करने वाले ही आपके दुश्मन बनेंगे। इस अवधि के मध्य किसी को भी अधिक कर्ज देने से बचें अन्यथा आर्थिक हानि के योग। झगड़े-विवाद तथा कोर्ट कचहरी से संबंधित मामले भी आपस में सुलझा लेना समझदारी रहेगी। विदेशी मित्रों तथा संबंधियों से अप्रिय समाचार प्राप्ति के योग हैं।
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साल 2022 में गुरु का राशि परिवर्तन
- फोटो : अमर उजाला
साल 2022 में गुरु ग्रह और कन्या राशि पर प्रभाव
शुभता प्रदान करने वाले गुरु ग्रह साल 2022 में अपनी राशि बदलेंगे। ये 13 अप्रैल 2022 को स्वराशि मीन राशि में गोचर करेंगे। आइए जानते हैं पूरे साल गुरु ग्रह किन-किन स्थितियों में रहेंगे और कन्या राशि पर कैसा प्रभाव डालेंगे।
- साल के शुरुआती महीने में बृहस्पति कुंभ राशि में मौजूद रहेंगे।
- फिर इसके बाद 23 फरवरी 2022 को बृहस्पति अस्त होंगे।
- जहां से ये 27 मार्च 2022 को वापस से उदय होंगे।
- 13 अप्रैल 2022 को बृहस्पति अपनी खुद की राशि मीन में गोचर करेंगे। इसके बाद पूरे वर्ष ये मीन राशि में ही मौजूद रहेंगे।
- फिर इसके बाद बृहस्पति 29 जुलाई 2022 को मीन राशि में वक्री हो जाएंगे।
- साल के आखिर में यानी 24 नवंबर 2022 को बृहस्पति दोबारा से मार्गी होंगे।
कन्या राशि- आपकी राशि के लिए साल 2022 में गुरु शुरुआती महीनों में छठे भाव में मौजूद रहेंगे। आपके लिए साल बहुत ही बेहतरीन बीतेगा। बिजनेस करने वालें जातकों को अपने व्यापार में नई ऊंचाईयों को प्राप्त करेंगे।
शुभता प्रदान करने वाले गुरु ग्रह साल 2022 में अपनी राशि बदलेंगे। ये 13 अप्रैल 2022 को स्वराशि मीन राशि में गोचर करेंगे। आइए जानते हैं पूरे साल गुरु ग्रह किन-किन स्थितियों में रहेंगे और कन्या राशि पर कैसा प्रभाव डालेंगे।
- साल के शुरुआती महीने में बृहस्पति कुंभ राशि में मौजूद रहेंगे।
- फिर इसके बाद 23 फरवरी 2022 को बृहस्पति अस्त होंगे।
- जहां से ये 27 मार्च 2022 को वापस से उदय होंगे।
- 13 अप्रैल 2022 को बृहस्पति अपनी खुद की राशि मीन में गोचर करेंगे। इसके बाद पूरे वर्ष ये मीन राशि में ही मौजूद रहेंगे।
- फिर इसके बाद बृहस्पति 29 जुलाई 2022 को मीन राशि में वक्री हो जाएंगे।
- साल के आखिर में यानी 24 नवंबर 2022 को बृहस्पति दोबारा से मार्गी होंगे।
कन्या राशि- आपकी राशि के लिए साल 2022 में गुरु शुरुआती महीनों में छठे भाव में मौजूद रहेंगे। आपके लिए साल बहुत ही बेहतरीन बीतेगा। बिजनेस करने वालें जातकों को अपने व्यापार में नई ऊंचाईयों को प्राप्त करेंगे।