मृत्यु एक अटल सत्य है। इसे झुठलाया नहीं जा सकता है। जिसने इस धरती पर जन्म लिया है एक न एक दिन उसे इस संसार से विदा लेनी पड़ती है। शरीर नश्वर है और आत्मा अजर-अमर है। आत्मा एक शरीर को त्याग कर नए शरीर में प्रवेश करती है। इस तरह जीवन और मरण का चक्र चलता रहता है। इस जीवन मरण के चक्र से मुक्ति को ही मोक्ष या बैकुंठधाम की प्राप्ति कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में कुछ कार्य ऐसे बताए गए हैं जिनको करने वाले को जन्म और मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त हो जाती है और उसे बार-बार जन्म लेकर इस संसार में नहीं आना पड़ता है। तो चलिए जानते हैं कि कौन से हैं वे कार्य जिनको करने वाले व्यक्ति को होती है मोक्ष की प्राप्ति।
इन कार्यों को करने वाले जातकों को प्राप्त होती है जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति
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श्रीमद्भागवत गीता के 11वें अध्याय में भगवान श्री हरिविष्णु के विशाल रूप का वर्णन मिलता है। ज्योतिष शास्त्र कहता है कि यदि कोई जातक प्रतिदिन नियम के साथ श्रीमद्भागवत गीता के 11वें अध्याय का पाठ करता है, तो उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।
सनातन धर्म में एकादशी तिथि को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। यह व्रत भगवान विष्णु के समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि कोई जातक सदैव हर एकादशी का व्रत करता है और पूरे नियमों का पालन करता है तो उसे जन्म-मरण के बंधन के मुक्ति मिलती है और बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
काशी भगवान शिव की नगरी है कहा जाता है कि यह भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी हुई है। काशी नगरी का वर्णन शिवपुराण में भी मिलता है। इस नगरी के कोतवाल भगवान शिव के रूद्रस्वरुप भगवान कालभैरव हैं। मान्यता अनुसार जो जातक भगवान शिव की सेवा और सुमिरन करते हुए काशी में प्राण त्यागता है उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त हो जाती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी जातक को बार-बार कैलाश मानसरोवर के दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है तो उसके ऊपर भगवान शिव की विशेष कृपा होता है। मान्यता है कि जो जातक यहां के दर्शन कर लेता है और मानसरोवर के जल का पान कर लेता है उसे जन्म-मरण के फेरे में नहीं फंसना पड़ता है।