{"_id":"54872d3eb86ac7c07fc6fe3ccaa3c0af","slug":"upa-approved-formation-of-telangana-state","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंटेगा आंध्र, बनेगा तेलंगाना, हैदराबाद साझा राजधानी","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
बंटेगा आंध्र, बनेगा तेलंगाना, हैदराबाद साझा राजधानी
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 31 Jul 2013 12:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए गठबंधन सरकार ने आखिरकार दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश को विभाजित करके अलग तेलंगाना राज्य के गठन को मंजूरी दे दी।
विज्ञापन
यह देश का 29वां राज्य होगा और कहा गया है कि इसके गठन की प्रक्रिया में पांच महीने तक का समय लग सकता है।
इस फैसले की घोषणा करते हुए कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस इस विभाजन के राजनीतिक संकट से पूरी तरह वाकिफ है लेकिन इस मांग के इतिहास को ध्यान में रखते हुए इस राज्य के गठन का फैसला किया गया है।
विज्ञापन
पढ़ें:- तेलंगाना राज्य: कैसी होगी गठन की प्रक्रिया?
विज्ञापन
हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार किया कि तेलंगाना का गठन राजनीतिक वजहों से या चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है लेकिन उम्मीद जताई कि तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के प्रमुख चंद्रशेखर राव अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर लेंगे।
पढ़ें:- लोकसभा चुनाव में तेलंगाना भी नहीं होगा कांग्रेस का तारणहार
क्या है फैसला?
फिलहाल किए गए फैसले के अनुसार आंध्र प्रदेश के 23 जिलों में से 10 जिलों को मिलाकर तेलंगाना राज्य का गठन किया जाएगा।
पढ़ें:- तेलंगाना राज्य: अब तक का सफरनामा
इस तरह शेष आंध्र प्रदेश में, जिसे सीमा-आंध्र भी कहा जा रहा है, रायलसीमा के चार जिले और तटीय आंध्र प्रदेश के नौ जिले होंगे।
पढ़ें:- तेलंगाना मसला: आंध्र में 1,000 अतिरिक्त जवानों की तैनाती
हैदराबाद को लेकर तेलंगाना और शेष आंध्र के लोगों के बीच विवाद रहा है। इस विवाद को फिलहाल टालते हुए हैदराबाद को अगले दस वर्षों तक संयुक्त राजधानी बनाए रखने का निर्णय लिया गया है।
पढ़ें:- तेलंगाना बनाने के कांग्रेस के फैसले पर मोदी का तीखा वार
दिग्विजय सिंह के अनुसार प्रस्ताव किया गया है कि इन दस वर्षों में शेष आंध्र प्रदेश अपने लिए नई राजधानी की उपयुक्त जगह तलाश करेगा और फिर उसकी राजधानी वहां स्थानांतरित कर दी जाएगी।
इस विभाजन से राज्य की विधानसभा और लोकसभा की सीटें भी विभाजित हो जाएंगीं। तेलंगाना बनने के बाद इस नए राज्य में लोकसभा की 17 सीटें होंगी। जबकि 119 सीटें विधानसभा की होंगी। शेष आंध्रप्रदेश में 25 सीटें लोकसभा और 175 सीटें विधानसभा की होंगी।
हालांकि राज्य पुनर्गठन कानून में दोनों राज्यों में विधानसभा की सीटों पर पुनर्विचार किया जा सकता है। हालांकि लोकसभा और राज्यसभा की सीटों की संख्या में परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
अपनी-अपनी राजनीति
लोकसभा के पिछले चुनाव में यूपीए सरकार के गठन में आंध्र प्रदेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन वाईएस रेड्डी की मौत के बाद वहां की राजनीति में कई अहम मोड़ आ चुके हैं।
वाईएस रेड्डी के बेटे जगन मोहन रेड्डी कांग्रेस से अलग होकर कांग्रेस के खिलाफ खड़े हैं। टीआरएस ने यूपीए से नाता तोड़ लिया है। वह तेलंगाना की अहम ताकत हैं।
कांग्रेस को उम्मीद है कि टीआरएस के कांग्रेस में विलय के साथ उसे कम से कम तेलंगाना में अपनी जमीन बचाने का मौका मिल जाएगा।
रायलसीमा के चार जिलों में वाईएसआर की पार्टी की तूती बोलती है। तटीय आंध्र में भी उसकी धमक है लेकिन वह मुख्य रूप से तेलगू देशम पार्टी के नेता चंद्रबाबू नायडू का इलाका माना जाता है।
कयास लगाए जा रहे हैं कि अब कांग्रेस जगन मोहन से संबंध सुधारने की कोशिश करेगी ताकि शेष आंध्र में भी कांग्रेस का अस्तित्व बचा रह सके। हालांकि आगे की राजनीति कैसी होगी यह आने वाला समय ही बचाएगा।
आज मिल सकती है कैबिनेट की मंजूरी
बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की विशेष बैठक बुलाई गई है। बैठक में अलग तेलंगाना राज्य के गठन को मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है।
छह महीने लगेंगे तेलंगाना बनने में
तेलंगाना के अलग राज्य बनने में पांच से छह महीने का समय लगेगा। इसके लिए आंध्र प्रदेश विधानसभा से प्रस्ताव पास कराना होगा। इसके बाद राज्य के संबंध में बिल का मसौदा तैयार किया जाएगा। इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी देने के साथ ही इसे संसद के दोनों सदनों से पारित करवाया जाएगा। संसद की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति इस संबंध में अधिसूचना जारी करेंगे।
सुषमा ने दी पीएम को बधाई
संसद के मानसून सत्र में अलग तेलंगाना राज्य के गठन को लेकर विधेयक लाने की सरकार के निर्णय का लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने स्वागत किया है। उन्होंने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बधाई दी है।
आंध्र प्रदेश में हालात शांतिपूर्ण
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि आंध्र प्रदेश में हालात पूरी तरह से शांतिपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की अभी तक कोई सूचना नहीं मिली है।
उठाए गए हैं ऐहतियाती कदम
अलग तेलंगाना राज्य के गठन के मुद्दे पर अंतिम फैसला होने की स्थिति में आंध्र प्रदेश में हालात बिगड़ने की आशंका हैं। इसके मद्देनजर ऐहतियाती कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में अर्द्धसैनिक बल के 1200 जवान पहले से तैनात हैं।
केंद्र सरकार ने सोमवार को अर्द्धसैनिक बल के 1000 अतिरिक्त जवानों को आंध्र प्रदेश भेजा गया। इसके अलावा कर्नाटक आर्म्ड पुलिस के 200 और तमिलनाडु आर्म्ड पुलिस के 100 जवान हैदराबाद पहुंचे गए हैं। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी लगातार प्रदेश सरकार से संपर्क बनाए हुए हैं।
सोनिया से मिले तेलंगाना विरोधी कांग्रेस सांसद
तेलंगाना विरोध कांग्रेस सांसदों ने मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की और उन्हें अपनी चिंताओं से अवगत कराया। गांधी ने पार्टी सांसदों को भरोसा दिलाया है कि अलग तेलंगाना राज्य के गठन का फैसला लेते समय उनकी बातों का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
आंध्र प्रदेश भवन में खूब मना जश्न
अलग तेलंगाना राज्य के गठन को कांग्रेस कार्यसमिति की मंजूरी मिलते ही आंध्र प्रदेश भवन में जश्न का माहौल छा गया।
इस जश्न में आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दामोदर राजा नरसिम्हा के नेतृत्व में तेलंगाना क्षेत्र के मंत्री, सांसद और विधायक शामिल हुए। इस दौरान यहां जय तेलंगाना के नारेबाजी हुई और लड्डू बांटे गए।
आंध्र प्रदेश भवन परिसर में काफी संख्या में तेलंगाना समर्थक भी मौजूद थे। सभी के चेहरे में नए प्रदेश के गठन को मंजूरी मिलने की खुशी साफ झलक रही थी।
जश्न के बीच मीडिया से बातचीत में नरसिम्हा ने कहा कि आज का दिन उनके लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि आज तेलंगाना के लिए संघर्ष का सम्मान हुआ है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग तेलंगाना राज्य के लिए छह दशक से संघर्ष चल रहा था। इस दौरान सैकड़ों युवाओं ने अपने जीवन की आहुति दी।
चंद्रशेखर राव ने किया स्वागत
अलग तेलंगाना को लेकर पिछले 12 वर्षों से जोरदार आंदोलन चला रहे टीआरएस नेता के. चंद्रशेखर राव ने नए राज्य के गठन के फैसले का स्वागत किया है।
उन्होंने कहा कि 10 जिलों के साथ तेलंगाना बनाने के फैसले से मैं खुश हूं, लेकिन साझा राजधानी पर स्थिति साफ होना अभी बाकी है।
हालांकि इस फैसले के बाद कांग्रेस के साथ अपनी पार्टी के विलय के सवालों को वह टाल गए। उन्होंने कहा कि इस पर बाद में बात होगी।
किसी क्षेत्र के साथ न हो अन्याय
मानव संसाधन विकास मंत्री एमएम पल्लम राजू ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से अनुरोध किया गया है कि वह यह सुनिश्चित करें कि तेलंगाना मुद्दे पर फैसला लेते समय आंध्र प्रदेश के किसी भी क्षेत्र के साथ अन्याय न हो।
सोनिया ने की पीएम से मुलाकात
तेलंगाना समर्थकों और विरोधियों के बढ़ते दबाव के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात तेलंगाना मुद्दे पर फैसला लेने के लिए होने वाली यूपीए समन्वय समिति और कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक से पहले हुई।
तेलंगाना के 10 जिले
- अदिलाबाद, करीमनगर, खम्मम, महबूबनगर, मेडक, नालगोंडा, निजामाबाद, रंगारेड्डी, वारंगल और हैदराबाद।
तेलंगाना में होंगे 17 लोकसभा और 119 विधानसभा क्षेत्र
आंध्र प्रदेश में लोकसभा की 42 और विधानसभा की 294 सीटें हैं। प्रदेश के बंटवारे की स्थिति में तेलंगाना में लोकसभा की 17 और विधानसभा की 119 सीटें रहने की संभावना है।