मोदीः जिसकी उंगली पकड़कर चले उसी का झटका हाथ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
2009 में एक कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी से पूछा गया, 'क्या वे भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं?'
नरेंद्र मोदी ने जवाब दिया, 'हमारी ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी जी हैं और हम पूरी ताकत से उन्हें प्रधानमंत्री बनाएंगे।'
उनसे दोबारा पूछा गया कि क्या वे अगले चुनाव में प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनेंगे? उन्होंने जवाब दिया, आडवाणी जी प्रधानमंत्री बनेंगे, उन्हीं के नेतृत्व में भाजपा की सरकार चलेगी।' मोदी का ये वादा तो गोवा की उस बैठक में ही जार-जार हो गया था, जब अडवाणी की इच्छाओं को दरकिनार करते हुए भाजपा ने उन्हें चुनाव प्रचार समिति की कमान सौंपी।
पढ़ें, मोदी पीएम उम्मीदवार, आडवाणी ने जताई नाराजगी
हालांकि ये उम्मीद थी कि जब मोदी लाल किले को फतह करने के लिए कूच करेंगे, उन्हें विजयी आशीर्वाद देने उनके गुरु आडवाणी मौजूद रहेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मोदी ने इस बार अपने गुरु की उंगली छोड़ दी।
इन्हीं गुरु के बारे में पिछले लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने कहा था, 'जिस नरेंद्र को आप इतना प्यार करते हो, उसे बनाने का काम आडवाणी जी ने किया है। गुजरात के विकास के मार्गदर्शक आडवाणी जी हैं। आडवाणी जी ने मुझे उंगली पकड़कर चलाया है।'
पढ़ें, मोदी की ताजपोशी, पर आडवाणी ने फोड़ा चिट्ठी बम
फिलहाल भाजपा ने आडवाणी की गैरमौजूदगी में ही मोदी का तिलक कर दिया और 2014 लोकसभा चुनाव की कमान उन्हें सौंप दी। मोदी अब भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं।
चुनौती कम नहीं है सामने
नरेंद्र मोदी ने लाल कृष्ण आडवाणी से तो आसानी से पार पा लिया, लेकिन 2014 के लिए उनकी राह उससे ज्यादा मुश्किल है, जितनी मुश्किल 2009 में ये आडवाणी के लिए थी।
1998 का दौर लोकसभा में भाजपा के उत्कर्ष का रहा। ये वही दौर था जब अटल बिहारी वाजपेयी का आभामंडल अपने चरम पर था और कांग्रेस सोनिया गांधी के नेतृत्व में खड़ा होने की कोशिश कर रही थी।
पढ़ें, चुनाव जीतने के लिए जान लड़ा दूंगाः मोदी
उस दौर में भाजपा ने लोकसभा चुनावों में 182 सीटें जीतीं और लगभग 25 फीसदी वोट हासिल किए। 1999 के चुनाव में भाजपा ने 182 सीटें हासिल कीं, लेकिन लगभग डेढ़ फीसदी वोट गंवा दिए।
भाजपा उसके बाद लगातार गिरती ही रही है। 2004 और 2009 के चुनावों में न केवल उनकी सीटें घटीं हैं, वोट प्रतिशत भी कम हुआ है।
पिछले एक साल में हुए विधानसभा चुनावों पर गौर करें तो भाजपा को गुजरात छोड़ हर जगह हार ही पाई है। ये मोदी की चुनौती है कि वे गुजरात और सोशल मीडिया में अपनी लोकप्रियता को वोट में बदले।
कैसा रहा मोदी का सफर
मोदी 2001 से गुजरात के मुख्यमंत्री हैं। अक्टूबर 2001 में केशुभाई पटेल के इस्तीफे के बाद नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे।
उनके नेतृत्व में भाजपा ने 2002, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल किया।
पढ़ें, उद्धव बोले, मंथन के बाद निकला अमृत
नरेंद्र मोदी की राजनीतिक दीक्षा संघ की शाखाओं में हुई है। विद्यार्थी जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए। उन्होंने पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में भी काम किया।
सोमनाथ से लेकर अयोध्या तक की रथ यात्रा में लालकृष्ण आडवाणी के सारथी रहे नरेंद्र मोदी पहले भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री बने, फिर महामंत्री बनाए गए। नरेंद्र मोदी विवाहित हैं या अविवाहित, इस तथ्य को लेकर विवाद है।
दंगों से फर्जी मुठभेड़ तक
12 सालों से गुजरात की सत्ता काबिज नरेंद्र मोदी के दामन पर गुजरात दंगें के छींटे भी है।
फरवरी, 2002 में गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में लगी आग में 59 हिंदुओं की मौत हुई, जिसके बाद गुजरात कई दिनों तक सांप्रदायिक हिंसा की आग मे झुलसता रहा। इन दंगों में तीन हजार से अधिक मुसलमानों की हत्या हुई। इन हत्याओं का आरोप हिंदुवादी संगठनों पर लगता रहा है।
ये आरोप भी लगता रहा है कि मोदी ने मुख्यमंत्री रहते हुए अपनी ही रियाआ की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी तब उन्हें राजधर्म निभाने की नसीहत दी थी।
मोदी से इन दंगों के लिए खेद जताने की राजनीतिक मांग उठती रही है। किसी जमाने में भाजपा के थिंकटैंक का हिस्सा रहे सुधींद्र कुलकर्णी तक मोदी से गुजरात दंगों पर खेद जताने की बात कह चुके हैं।
मोदी की सरकार पर कई फर्जी मुठभेड़ों के भी आरोप हैं। इशरत जहां और तुलसी प्रजपति फर्जी मुठभेड़ जैसे मामलों में गुजरात के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जेल में बंद हैं।
इन मुठभेड़ों के मामले गुजरात में न चलकर देश के दूसरे राज्यों की अदलतों में चल रहे हैं। मोदी के दाहिने हाथ अमित शाह भी इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले मे जेल की हवा खा चुके हैं।
मोदी गुजरात के विकास का गुणगान करते भी नहीं थकते लेकिन विपक्षी दलों का दावा है कि गुजरात में उतना विकास नहीं हुआ है जितना मोदी दावा करते हैं।