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बड़े शहरों में पानी को लेकर क्या कहता है सर्वे?

Sat, 06 Dec 2014 03:28 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 06 Dec 2014 03:28 PM IST
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water crisis in big cities in up.

गंगा, यमुना और गोमती जैसी नदियों के बावजूद उत्तर प्रदेश के शहरी लोगों को भी पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। हालांकि सर्वे में शामिल 11 शहरों के करीब 48 फीसदी लोग पानी की गुणवत्ता को लेकर संतुष्ट हैं।

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उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों की तुलना में छोटे शहरों में पानी की आपूर्ति बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती। मसलन, आगरा, मेरठ, वाराणसी और इलाहाबाद जैसे बड़े शहरों की तुलना अगर बरेली और झांसी जैसे दस लाख से कम की आबादी वाले शहरों से करें, तो यही पाते हैं कि छोटे शहरों में पानी के लिए लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है।
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अलबत्ता हंसा रिसर्च के सर्वे के मुताबिक, छोटे शहरों में मुरादाबाद में पानी की उतनी किल्लत नहीं है, क्योंकि यहां अधिकांश घरों में बोरवेल मौजूद है। नगर निकायों के जरिये घरों में होने वाली पानी की आपूर्ति के मामले में बड़े शहर भाग्यशाली कहे जा सकते हैं।
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सर्वे में मिली राय को देखें, तो पता चलता है कि छोटे शहरों के अधिकांश लोग पानी के लिए हैंडपंप के भरोसे हैं। बड़े शहरों में आगरा का हाल सबसे बुरा कहा जा सकता है, जहां एक चौथाई लोग पीने का पानी खरीदने को मजबूर हैं।

सर्वे में शामिल इन 11 शहरों को यदि पैमाना मानें, तो महज 20 फीसदी घरों को चौबीसों घंटे पानी मिलता है। पानी के साथ एक बड़ी दिक्कत बिजली की भी है, क्योंकि पानी की आपूर्ति बिजली की सप्लाई पर भी निर्भर करती है।

सर्वे में शामिल लोगों ने पानी की गुणवत्ता को औसत बताया है। जबकि 22 फीसदी लोगों की राय तो यह थी कि उन्हें मिलने वाला पानी बेहद खराब है। पानी की गुणवत्ता के मामले में औद्योगिक शहर कानपुर सबसे खराब है। हाल के वर्षों में जापानी इंस्फेलाइटिस की बीमारी से चर्चा में रहे गोरखपुर में भी पानी की गुणवत्ता से लोग परेशान हैं।


इस सर्वे में एक और बात सामने आई कि योजनाबद्ध कॉलोनियां बनने के बावजूद बड़ी आबादी मोहल्लों में रहती है और इन शहरों के करीब 35 फीसदी परिवार पीने के पानी के लिए सरकारी नल या सरकारी बोरवेल पर निर्भर हैं।
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