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नींद उड़ाने वाले सपने देखें युवा: गोपाल दास नीरज
अमर उजाला ब्यूरो एटा।
Updated Sun, 20 Dec 2015 11:16 PM IST
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राजकीय इंटर कालेज में रविवार को हुए भूतपूर्व छात्र समागम में सभी ने अपनी दशकों पुरानी यादें ताजा की। एक साथ दशकों बाद जमा हुए इन पूर्व छात्रों ने जमकर मस्ती की। कालेज की बिल्डिंग, फर्नीचर को देख अपने वो पल याद किए। मुख्य अतिथि पदमश्री गोपाल दास नीरज थे। उन्होंने कहा वो इसी स्कूल से पढ़ चुके हैं। आयोजकों को बधाई और वर्तमान छात्रों से कहा ऐसा सपना देखें जो नींद उड़ा दे, तभी सफलता मिलेगी।
राजकीय इंटर कालेज क्रीड़ास्थल पर आयोजित समारोह में आईपीएस अजय चौधरी ने कहा कि जीआईसी ही नहीं यहां की जुझारू मिट्टी आज भी उन्हें प्रेरणा देती है। सदर विधायक आशीष यादव ने कहा कि ये छात्र समागम एक अच्छी पहल है। विधायक ने संस्था को पांच लाख की विकास निधि देने का भी ऐलान किया। आईपीएस अंशुमान यादव ने कहा कि पूर्व छात्र विद्यालय और जिले के लिए कुछ करना चाहते हैं। शीघ्र ही इसे मूर्त रूप दिया जाएगा। पूर्व छात्र राजवीर सिंह ने कहा कि वो अनाथ थे, जीआईसी में पढ़ने आए थे। लेकिन तत्कालीन सीनियर संजीव यादव ने उनका हौसला ही नहीं बढ़ाया वरन पुस्तकें देकर प्रशासनिक प्रतियोगिताआें की तैयारी की सलाह दी।
कार्यक्रम अध्यक्ष संजीव कुमार ने कहा कि पूर्व छात्रों के लिए जीआईसी एक इमारत भर नहीं है। उन्हें यहां संघर्ष, परिश्रम करने के संस्कार मिले हैं। सैफई आर्युविज्ञान संस्थान के उपनिदेशक डा. रमाकांत यादव ने कहा कि इस परिसर में हमने बहुत कुछ सीखा है। एसडीएम सुनील कुमार ने कहा कि विद्यालय की पवित्रता से कुशाग्रता ही नहीं संस्कार भी मिलते हैं। सत्य प्रकाश यादव, प्रधानाचार्य महावीर यादव, राजीव वर्मा, संयोजक अनूप दुबे आदि मौजूद थे। संचालन रजनीश यादव ने किया। उपस्थित लोगों में डा. रामसिंह यादव, साहब सिंह सीडीओ, नेत्रपाल शर्मा, शिवेंद्र देव मिश्र, रामलाल कुशवाहा, सुमन कुमार, राजीव यादव बॉबी, डा. ललित दुबे, मनीष दुबे, अनुपम दुबे आदि मौजूद रहे।
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खेल के लिए देंगे आधा खर्च
ज्वाइंट कमिश्नर पुलिस के पद पर तैनात अजय चौधरी ने वर्तमान व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए स्वीकारा कि इस दौर में सही परिणाम मुश्किल है। खेल प्रतिभाओं की हिम्मत बढ़ाते हुए ऐलान किया कि दिल्ली की किसी भी एकेडमी का आधा खर्च वो उठाएंगे। पिछले साल भी फर्नीचर के लिए एक लाख दिए थे।
पदमश्री गोपाल दास नीरज
91 वर्षीय पदमश्री नीरज ने 1942 में जीआईसी से हाईस्कूल किया था। आर्थिक बदहाली में कचहरी टाइपिस्ट बने नीरज की प्रतिभा ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति ही नहीं दी। वरन साहित्यक उपलब्धियों के लिए दो बार भारत सरकार और उत्कृष्ट गीतों के लिए तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिल चुका है।
अजय चौधरी 1996 में बने आईपीएस
जीआईसी के छात्र रहे अजय चौधरी दिल्ली के ले. गर्वनर के ज्वाइंट कमिशभनर ओएसडी हैं। एमबीए की शिक्षा के बाद 1996 में आईपीएस बने चौधरी को सेवाकाल में दर्जन भर से अधिक पुरस्कार मिले हैं। इनमें राष्ट्रपति मेडल 2012, आंतरिक सुरक्षा मेडल, कठिन सेवा पदक 1999 और अरुणाचल प्रदेश में तैनाती के दौरान राज्यपाल सिल्वर मेडल प्रमुख हैं।
आईपीएस अंशुमान को मिले दर्जनों पुरस्कार
अंशुमान यादव ने उच्च शिक्षा जवाहर लाल नेहरू विवि दिल्ली से पूरी की। ईमानदारी के लिए इन्हें भी आधा दर्जन पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं। यह सेवानिवृत शिक्षक डा. रामसिंह यादव के पुत्र हैं।
आईएएस राजेश ने 1981 में किया था हाईस्कूल
1981 में जीआईसी से हाईस्कूल करने वाले राजेश यादव इन दिनों मेरठ विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष हैं। बचपन से ही मेधावी रहे हैं। परिवहन निगम में एआरएम रह चुके हैं। प्रदेश के कई जिलों में एसडीएम, एडीएम के पद पर तैनात रहे हैं।
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राजकीय इंटर कालेज क्रीड़ास्थल पर आयोजित समारोह में आईपीएस अजय चौधरी ने कहा कि जीआईसी ही नहीं यहां की जुझारू मिट्टी आज भी उन्हें प्रेरणा देती है। सदर विधायक आशीष यादव ने कहा कि ये छात्र समागम एक अच्छी पहल है। विधायक ने संस्था को पांच लाख की विकास निधि देने का भी ऐलान किया। आईपीएस अंशुमान यादव ने कहा कि पूर्व छात्र विद्यालय और जिले के लिए कुछ करना चाहते हैं। शीघ्र ही इसे मूर्त रूप दिया जाएगा। पूर्व छात्र राजवीर सिंह ने कहा कि वो अनाथ थे, जीआईसी में पढ़ने आए थे। लेकिन तत्कालीन सीनियर संजीव यादव ने उनका हौसला ही नहीं बढ़ाया वरन पुस्तकें देकर प्रशासनिक प्रतियोगिताआें की तैयारी की सलाह दी।
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कार्यक्रम अध्यक्ष संजीव कुमार ने कहा कि पूर्व छात्रों के लिए जीआईसी एक इमारत भर नहीं है। उन्हें यहां संघर्ष, परिश्रम करने के संस्कार मिले हैं। सैफई आर्युविज्ञान संस्थान के उपनिदेशक डा. रमाकांत यादव ने कहा कि इस परिसर में हमने बहुत कुछ सीखा है। एसडीएम सुनील कुमार ने कहा कि विद्यालय की पवित्रता से कुशाग्रता ही नहीं संस्कार भी मिलते हैं। सत्य प्रकाश यादव, प्रधानाचार्य महावीर यादव, राजीव वर्मा, संयोजक अनूप दुबे आदि मौजूद थे। संचालन रजनीश यादव ने किया। उपस्थित लोगों में डा. रामसिंह यादव, साहब सिंह सीडीओ, नेत्रपाल शर्मा, शिवेंद्र देव मिश्र, रामलाल कुशवाहा, सुमन कुमार, राजीव यादव बॉबी, डा. ललित दुबे, मनीष दुबे, अनुपम दुबे आदि मौजूद रहे।
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खेल के लिए देंगे आधा खर्च
ज्वाइंट कमिश्नर पुलिस के पद पर तैनात अजय चौधरी ने वर्तमान व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए स्वीकारा कि इस दौर में सही परिणाम मुश्किल है। खेल प्रतिभाओं की हिम्मत बढ़ाते हुए ऐलान किया कि दिल्ली की किसी भी एकेडमी का आधा खर्च वो उठाएंगे। पिछले साल भी फर्नीचर के लिए एक लाख दिए थे।
पदमश्री गोपाल दास नीरज
91 वर्षीय पदमश्री नीरज ने 1942 में जीआईसी से हाईस्कूल किया था। आर्थिक बदहाली में कचहरी टाइपिस्ट बने नीरज की प्रतिभा ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति ही नहीं दी। वरन साहित्यक उपलब्धियों के लिए दो बार भारत सरकार और उत्कृष्ट गीतों के लिए तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिल चुका है।
अजय चौधरी 1996 में बने आईपीएस
जीआईसी के छात्र रहे अजय चौधरी दिल्ली के ले. गर्वनर के ज्वाइंट कमिशभनर ओएसडी हैं। एमबीए की शिक्षा के बाद 1996 में आईपीएस बने चौधरी को सेवाकाल में दर्जन भर से अधिक पुरस्कार मिले हैं। इनमें राष्ट्रपति मेडल 2012, आंतरिक सुरक्षा मेडल, कठिन सेवा पदक 1999 और अरुणाचल प्रदेश में तैनाती के दौरान राज्यपाल सिल्वर मेडल प्रमुख हैं।
आईपीएस अंशुमान को मिले दर्जनों पुरस्कार
अंशुमान यादव ने उच्च शिक्षा जवाहर लाल नेहरू विवि दिल्ली से पूरी की। ईमानदारी के लिए इन्हें भी आधा दर्जन पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं। यह सेवानिवृत शिक्षक डा. रामसिंह यादव के पुत्र हैं।
आईएएस राजेश ने 1981 में किया था हाईस्कूल
1981 में जीआईसी से हाईस्कूल करने वाले राजेश यादव इन दिनों मेरठ विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष हैं। बचपन से ही मेधावी रहे हैं। परिवहन निगम में एआरएम रह चुके हैं। प्रदेश के कई जिलों में एसडीएम, एडीएम के पद पर तैनात रहे हैं।