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कठेरिया को कोर्ट से बड़ी राहत
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Tue, 21 Apr 2015 01:40 AM IST
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अपने जाति प्रमाणपत्र व अन्य शैक्षिक अभिलेखों में हेराफेरी करने के आरोपों का सामना कर रहे केंद्रीय राज्यमंत्री डा. रामशंकर कठेरिया को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने साक्ष्य व आरोप का आधार न पाते हुए केस से उन्मोचित (नाम हटाने) करने के आदेश दिए हैं।
बसपा के लोकसभा प्रत्याशी रहे कुंवर चंद वकील ने 30 अप्रैल 2010 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कठेरिया ने अपने शिक्षा संबंधी प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, अंक तालिकाओं और अन्य अभिलेखों में हेरफेर करके डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में प्रवक्ता पद पर नियुक्ति पाई है। इसके जवाब में कठेरिया ने 17 मार्च 2015 को कोर्ट में दिए प्रार्थनापत्र में मुकदमे को गलत तथ्यों पर आधारित बताते हुए उन्मोचित करने की अपील की थी। हालांकि इससे पूर्व 24 मई 2011 को कठेरिया के ऐसे ही प्रर्थना पत्र को इसी कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। तब कठेरिया ने सेशन कोर्ट में रिवीजन दायर किया जो 23 सितंबर 2011 को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद कठेरिया ने 17 अक्टूबर 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली।
हाईकोर्ट ने उनके रिवीजन पर आदेश कर सेशन कोर्ट आगरा को गुण-दोष के आधार पर सुनकर निर्णीत करने का निर्देश दिया। इस आदेश के बाद कुंवर चंद वकील ने भी हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई, लेकिन हाईकोर्ट ने 25 नवंबर 2014 को सेशन कोर्ट द्वारा पारित 24 मई 2011 के आदेश को अपास्त (निरस्त) करते हुए उन्मोचन प्रार्थना पत्र को निस्तारित करने के आदेश किए। इसी के अनुपालन में कोर्ट ने सुनवाई की और आरोपों का साक्ष्य व आधार न पाते हुए कठेरिया को उक्त केस से उन्मोचित करने के आदेश किए हैं। उनकी पैरवी अधिवक्ता विजय आहूजा व देवेंद्र सिंह ने की।
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बसपा के लोकसभा प्रत्याशी रहे कुंवर चंद वकील ने 30 अप्रैल 2010 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कठेरिया ने अपने शिक्षा संबंधी प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, अंक तालिकाओं और अन्य अभिलेखों में हेरफेर करके डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में प्रवक्ता पद पर नियुक्ति पाई है। इसके जवाब में कठेरिया ने 17 मार्च 2015 को कोर्ट में दिए प्रार्थनापत्र में मुकदमे को गलत तथ्यों पर आधारित बताते हुए उन्मोचित करने की अपील की थी। हालांकि इससे पूर्व 24 मई 2011 को कठेरिया के ऐसे ही प्रर्थना पत्र को इसी कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। तब कठेरिया ने सेशन कोर्ट में रिवीजन दायर किया जो 23 सितंबर 2011 को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद कठेरिया ने 17 अक्टूबर 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली।
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हाईकोर्ट ने उनके रिवीजन पर आदेश कर सेशन कोर्ट आगरा को गुण-दोष के आधार पर सुनकर निर्णीत करने का निर्देश दिया। इस आदेश के बाद कुंवर चंद वकील ने भी हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई, लेकिन हाईकोर्ट ने 25 नवंबर 2014 को सेशन कोर्ट द्वारा पारित 24 मई 2011 के आदेश को अपास्त (निरस्त) करते हुए उन्मोचन प्रार्थना पत्र को निस्तारित करने के आदेश किए। इसी के अनुपालन में कोर्ट ने सुनवाई की और आरोपों का साक्ष्य व आधार न पाते हुए कठेरिया को उक्त केस से उन्मोचित करने के आदेश किए हैं। उनकी पैरवी अधिवक्ता विजय आहूजा व देवेंद्र सिंह ने की।
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