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तेजी से होते विकास ने घटा दी वृक्षों की संख्या

Fri, 20 Mar 2015 11:13 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Fri, 20 Mar 2015 11:13 PM IST
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फीरोजाबाद। आगरा-लखनऊ ग्रीन एक्सप्रेस-वे हो या फिर माल भाड़ा कारीडोर इनके
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निर्माण से जिले में कृषि योग्य भूमि तो घटी ही साथ ही बड़े पैमाने पर वृक्ष इनकी भेंट चढ़ गए। इसके एवज में पौधारोपड़ नहीं हो सका। जिले में हरित पट्टिकाओं को बनाने के लिए पौधारोपड़ तो प्रति वर्ष किया जा रहा है, लेकिन परिणाम कम ही आता है।


जिले में वनों का प्रतिशत निरंतर घटता जा रहा है। इसका बड़ा कारण तेजी से घटता भूगर्भजल भी है। बारिश कम होने तथा भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन के कारण पौधे रोपण के बाद सुरक्षित नहीं रहते। यदि आंकड़ों पर गौर करें तो प्रतिवर्ष लाखों पौधे रोपित किए जाते हैं। यही नहीं, जिला मुख्यालय से लेकर गांव के स्कूल तक में पौधे रोपित करने का अभियान चलता है। वन विभाग द्वारा बीज बुबान का काम किया जाता है।

लेकिन यह पौधे भी सुरक्षित नहीं बचते। वन विभाग की ओर से पुलिस लाइन के साथ ही मैनपुरी रोड पर हरित पट्टिका बनाई है। इसी के साथ पीएमजीएसवाई योजना के तहत बनी सड़कों के किनारे पौधे रोपड़ के आदेश थे। लेकिन यह आदेश हवाई साबित हुए। राजा का ताल केसमीप बनी हरित पट्टिका के कई पौधे सूख गए।


मनरेगा योजना में पौधारोपड़ का लक्ष्य नहीं हो सका पूरा
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में भी पौधारोपड़ का लक्ष्य जिले में पूरा नहीं हो सका। प्रशासन द्वारा दस लाख 12 हजार पौधे रोपित करने का लक्ष्य था। लेकिन चार मार्च 2015 तक चार लाख 68 हजार 269 पौधे रोपित हुए।
ब्लाक       लक्ष्य       रोपित हुए
अरांव       96000       27000
एका        104000      62800
फीरोजाबाद 126000      49600
जसराना     92000       30900
खैरगढ़      120000      61650
मदनपुर      126000     21494
नारखी       114000     78875
शिकोहाबाद  126000    42350
टूंडला        108000    93600

कुल       1012000      468269


वन विभाग के द्वारा वनों के घटते प्रतिशत को ध्यान में ही रखकर हरित पट्टिका बनाई जा रहीं है। इनको बचाने के हर संभव प्रयास किए हैं। कम बारिश और भूगर्भ जल की कमी से पौधे सुरक्षित रखने में दिक्कत है।
- डा. मनोज कुमार डीएफओ फीरोजाबाद।
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