{"_id":"776f726ad94ccbb391865c799a606223","slug":"cipher-sensitive-security-arrangements-at-the-railway-station-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संवेदनशील रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा इंतजाम सिफर ","category":{"title":"City and States Archives","title_hn":"शहर और राज्य आर्काइव","slug":"city-and-states-archives"}}
संवेदनशील रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा इंतजाम सिफर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Mon, 23 Feb 2015 10:26 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेपाल बार्डर से लगे कुमाऊं के अंतिम रेल हेड टनकपुर स्टेशन पर सुरक्षा इंतजाम शून्य समान है। सुरक्षा के ऐसे कोई बंदोबस्त नहीं हैं, जिससे यात्री अपनी सुरक्षा को लेकर बेफिक्र रहें। इसके अलावा न तो स्टेशन पर लगेज लाकर की सुविधा है और न ही आम यात्रियों के विश्राम के लिए पर्याप्त व्यवस्था है।
विज्ञापन
टनकपुर स्टेशन 1905 में अंग्रेजों द्वारा निर्मित किया गया था। हर साल बजट में केंद्र सरकार स्टेशनों पर तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था का दावा करती है, लेकिन यहां का संवेदनशील रेलवे स्टेशन सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से रेलवे की उपेक्षा का शिकार रहा है। पूर्णागिरि धाम के चलते यहां हमेशा दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है। हर दिन पीलीभीत, इज्जतनगर और शाहजहांपुर के बीच चार ट्रेनें अप-डाउन होती हैं। फिर भी आरपीएफ थाना है वह भी हेड कांस्टेबल और चार जवानों के भरोसे छोड़ा गया है। ट्रेन टाइम को छोड़ कर थाने के दरवाजे पर अक्सर ताला लटका नजर आता है। ऐसे में स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे रहती है।
विज्ञापन
तीन माह तक चलने वाले मां पूर्णागिरि मेला अवधि में कमाई के लिए रुटीन ट्रेनों के अलावा मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन तो किया जाता है, लेकिन सुरक्षा और सुविधाओं के प्रति रेलवे विभाग उदासीन बना रहता है। रेलवे स्टेशन में लगेज लाकर सुविधा तक नहीं है, जिस कारण यात्रियों को या तो सामान साथ लेकर ट्रेन की प्रतीक्षा करनी पड़ती है या फिर सामान की रखवाली में घंटों प्लेटफार्म पर डेरा जमाए रखना पड़ता है। रेलवे स्टेशन में मेटल डिटेक्टर डोर और सीसीटीवी कैमरे तो दूर डिस्प्ले बोर्ड तक नहीं लगा है। स्टेशन मास्टर गोपाल सिंह बोहरा का कहना है कि सुरक्षा के इन इंतजामों के प्रस्ताव न तो कभी विभाग ने मांगे और न ही भेजे गए हैं।
विज्ञापन