{"_id":"c9354cabf63528d96049d99b5fd74232","slug":"swati-break-the-nsui-dream","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वाति ने काला किया 'NSUI का ड्रीम' ","category":{"title":"Campus Archives","title_hn":"कैंपस आर्काइव","slug":"campus-archives"}}
स्वाति ने काला किया 'NSUI का ड्रीम'
अमर उजाला, आफताब अजमत, देहरादून
Updated Sat, 07 Sep 2013 01:26 PM IST
विज्ञापन
देहरादून के डीएवी कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष पद के लिए टिकट न मिलने से खफा होकर स्वाति का अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ना एनएसयूआई के लिए घातक साबित हुआ।
विज्ञापन
स्वाति ने 1276 वोट खींचकर एनएसयूआई प्रत्याशी भूपेंद्र नेगी की हार की खाई बढ़ा दी। इसके साथ ही संगठन का डीएवी पर जीत का सपना फिर चूर हो गया।
पढें, डीएवीः अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के सिद्घार्थ राणा जीते
एबीवीपी से हार का सामना
लगातार छह साल से एबीवीपी से हार का सामना कर रही एनएसयूआई को इस बार डीएवी में अपना परचम फहराने की उम्मीद थी।
संगठन में भूपेंद्र नेगी और स्वाति नेगी अध्यक्ष पद के टिकट के प्रबल दावेदार थे। दोनों पक्षों में इस मसले पर हिंसक झड़पें भी हुईं। हालांकि, प्रदेश पदाधिकारियों ने भूपेंद्र के नाम पर हामी भरी।
विज्ञापन
तब 167 वोट अधिक होती
इससे खफा स्वाति संगठन से इस्तीफा देने के साथ ही निर्दलीय मैदान में उतर गई। भूपेंद्र को 2147 वोट मिले, जबकि स्वाति ने 1276 वोट लिए। दोनों प्रत्याशियों के वोट जोड़ दें तो यह संख्या एबीवीपी प्रत्याशी सिद्धार्थ राणा (3246) से 167 वोट अधिक होती।
विज्ञापन
संगठन के सूत्र भी अब मान रहे हैं कि एनएसयूआई में बगावत न हुई होती तो अध्यक्ष पद पर इस बार उलटफेर किया जा सकता था। खास बात यह है कि छात्रा जोन के बूथों से एनएसयूआई और स्वाती को लगभग बराबर वोट मिले।