छात्र आंदोलन पर कुलपति ने दिया बड़ा बयान
फीस बढ़ोतरी और छात्र संघ चुनाव पर एक साल की रोक को लेकर लिए फैसले वापस नहीं होंगे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने साफ कर दिया है कि वह इन फैसलों पर अडिग हैं। एससीए का गठन अब मनोनयन से होगा।
इनके खिलाफ छात्र संगठनों के प्रदर्शनों को कुलपति ने एक रूटीन प्रक्रिया बताया। कहा कि यह छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है। यदि छात्र संगठन शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठाते हैं तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
हिंसा हुई या फिर परिसर में इन प्रदर्शनों से शैक्षणिक माहौल खराब किया जाता है तो जरूरत पड़ने पर वे विश्वविद्यालय को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का फैसला भी ले सकते हैं। उनके पास स्थिति को काबू करने और बिगड़ती व्यवस्था को सुधारने के लिए यही विकल्प बचता है।
जरूरी था कड़े फैसले लेना
कुलपति ने कहा कि फीस बढ़ोतरी जरूरी थी। इसे वापस लिया जाना संभव नहीं है। छात्र संघ चुनाव में होने वाली हिंसा और इससे लगातार माहौल बिगड़ने के कारण प्रत्यक्ष चुनाव पर रोक लगाना जरूरी हो गया था। अब शिक्षक राजनीति की बारी है।
उन्हें प्रदेश सरकार, पुलिस और प्रशासन पर पूरा भरोसा है। इसके साथ ही छात्रों पर भी पूरा यकीन है कि वे ऐसी स्थिति नहीं आने देंगे, जिसमें विश्वविद्यालय को बंद करना पड़े। कुलपति प्रो. वाजपेयी ने कहा कि लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों में हिंसा से यदि प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव संभव न हों तो विकल्प के रूप में मनोनयन से एससीए गठित की जा सकती है।
इसके मुताबिक अकादमिक, खेल, सांस्कृतिक और अन्य गतिविधियों की मेरिट में रहे छात्रों का मनोनयन कर एससीए में भेजा जाएगा। इसमें प्रक्रिया का हवाला नहीं है। इसके लिए कमेटी गठित की है, जो प्रक्रिया तय करेगी।