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3 छात्रों का कमाल, कबाड़ से बना डाली रेसिंग कार

Mon, 20 Apr 2015 03:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 20 Apr 2015 03:14 PM IST
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3 engineering students creat racing car by using garbage

चंडीगढ़ के तीन इंजीनियरिंग के छात्रों ने कबाड़ से रेसिंग कार बनाई है। इसे गो कार्ट का नाम दिया है। इंजीनियरिंग के छात्रों में नमनकंडवाल, सौरभ दहिया और विशाल ठाकुर हैं। तीनों छात्र चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेज के मेकेनिकल इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष के छात्र हैं। ये कार दो महीने की मेहनत से बनाई गई है।

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नमन कंडवाल और सौरभ दहिया ने बताया कि कॉलेज के मेकेनिकल डिपार्टमेंट हेड डॉ. राधेश्याम का विशेष सहयोग रहा। इस कार को बनाने में 82 हजार की लागत आई है। इसमें डिस्क ब्रेक और पावर स्टीयरिंग का प्रयोग किया गया है।
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नमन ने बताया कि इस गो कार्ट में 109 सीसी एक्टिवा का इंजन लगाया है। यह कार 180 किलो का लोड लेकर चल सकती है। कार दो सीटर है। एक लीटर में 37 किलोमीटर चलती है। पेट्रोल से चलने वाली इस कार की अधिकतम स्पीड 70 किलोमीटर प्रति घंटा है।
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उन्होंने बताया कि कार में 30 हजार रुपये और खर्च करते तो इसके ऊपर के हिस्से को कवर कर धूप से बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि इंटरनेशनल सीरीज ऑफ कार्टिंग की ओर से बंगलूरू में आयोजित प्रतियोगिता में 64 गो कार्ट शमिल किए गए थे। इसमें इस कार्ट को आठवां स्थान मिला।


यह प्रतियोगिता 9 से 12 मार्च को आयोजित की गई थी। तीनों छात्रों ने बताया कि यह कार हैंडिकैप्ड लोगों के लिए काफी लाभदायक है। नमन कंडवाल के पिता हरिमोहन कंडवाल चंडीगढ़ डीसी ऑफिस में सुपरिंटेंडेंट के पद पर कार्यरत हैं। जबकि सौरभ दहिया के पिता जोगिंदर सिंह दहिया पानीपत रिफाइनरी में अधिकारी हैं। विशाल ठाकुर के पिता सुरेंद्र ठाकुर बिजनेसमैन हैं।

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