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हमें सामाजिक भेदभाव दूर कर सबको स्वीकार करना होगा : भागवत
अमर उजाला ब्यूरो, भोपाल
Updated Sat, 06 Jan 2018 07:22 AM IST
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Mohan Bhagwat
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पुणे के भीमा-कोरेगांव में हुई जातीय हिंसा के संदर्भ में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भारत में एकता की जरूरत बताई है। साथ ही देश को सामाजिक भेदभाव से मुक्त करने का आह्वान किया है। बीती रात उज्जैन में भारत माता मंदिर का लोकार्पण करते हुए भागवत ने कहा कि हमारे देश में सभी नागरिक बराबर हैं, लिहाजा अपना पराया वाली भावना दूर करनी होगी। क्योंकि हम सब भारत माता की सेवा के लिए समर्पित हैं। सभी को बराबर मानना होगा और मेरा-तुम्हारा, ऊंच-नीच जैसे सभी तरह के भेदभाव से दूर रखना होगा।
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भागवत ने कहा कि जहां सद्भाव रहता है, क्रोध वहां से कोसों दूर रहता है। सभी नागरिकों को सद्भाव के साथ रहना चाहिए। हमें हमेशा भारत माता के अखंड रूप की सेवा में समर्पित रहना चाहिए। हम पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हैं। हम अपने भीतर और हर जगह ईश्वर का वास मानने वाले लोग हैं। भारत का बुनियादी सिद्धांत इसी दर्शन पर आधारित है।
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उन्होंने कहा द्रमुक के संस्थापक सीएन अन्नादुरै तमिलनाडु को पृथक देश मानने लगे थे और उनका कहना था कि भारत से इसका कोई लेना देना नहीं है। मगर 1962 में जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया तो अन्नादुरै का कहना था कि देश खतरे में है, ऐसे वक्त अलगाव की वकालत करना विदेशी ताकत को मजबूत करना होगा।
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उन्होंने कहा द्रमुक के संस्थापक सीएन अन्नादुरै तमिलनाडु को पृथक देश मानने लगे थे और उनका कहना था कि भारत से इसका कोई लेना देना नहीं है। मगर 1962 में जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया तो अन्नादुरै का कहना था कि देश खतरे में है, ऐसे वक्त अलगाव की वकालत करना विदेशी ताकत को मजबूत करना होगा।