{"_id":"6027a7c38ebc3ee93e12b4f2","slug":"vaccination-update-vimsar-doctors-to-study-seroconversion-of-vaccinated-people","type":"story","status":"publish","title_hn":"वीआईएमएसएआर के चिकित्सक करेंगे टीका लगवा चुके लोगों पर सीरोकन्वर्जन का अध्ययन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वीआईएमएसएआर के चिकित्सक करेंगे टीका लगवा चुके लोगों पर सीरोकन्वर्जन का अध्ययन
Sat, 13 Feb 2021 03:49 PM IST
दीप्ति मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संबलपुर
Published by: दीप्ति मिश्रा
Updated Sat, 13 Feb 2021 03:49 PM IST
विज्ञापन
vaccine
- फोटो : istock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ओडिशा के संबलपुर के बुरला स्थित ‘वीर सुरेन्द्र साई इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च’ (वीआईएमएसएआर) के चिकित्सक कोविड-19 के टीके के प्रभाव का अध्ययन करेंगे और पता लगाएंगे कि टीकाकरण के बाद इससे एंटीबॉडी बनने में कैसे मदद मिली। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि यह अध्ययन भुवनेश्वर के ‘रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर’ (आरएमआरसी) के वैज्ञानिकों के साथ मिल कर किया जाएगा। राज्य स्वास्थ्य अनुसंधान समिति ने इस अध्ययन की मंजूरी दे दी है। यह अध्ययन 12 महीनों तक चलेगा।
अध्ययन में शामिल प्रधान जांचकर्ता डॉ संजीव मिश्रा ने बताया, ‘‘ इस अध्ययन का मकसद जिन लोगों का टीकाकरण हो चुका है उन पर ‘सीरोकन्वर्जन’ का पता लगाना है। इससे यह गणना की जाएगी कि सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए कितने लोगों को टीका लगाए जाने की जरूरत है, ताकि हम महामारी को रोकने में सफल रहें।’’
विज्ञापन
‘सीरोकन्वर्जन’ वह अवधि है, जिसमें एक खास एंटीबॉडीज विकसित होती हैं और रक्त में उनका पता लगाया जा सकता है। ‘सीरोकन्वर्जन’ होने के बाद खून की जांच में एंटीबॉडी का पता लगाया जा सकता है।
विज्ञापन
अधिकारियों ने बताया कि यह अध्ययन भुवनेश्वर के ‘रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर’ (आरएमआरसी) के वैज्ञानिकों के साथ मिल कर किया जाएगा। राज्य स्वास्थ्य अनुसंधान समिति ने इस अध्ययन की मंजूरी दे दी है। यह अध्ययन 12 महीनों तक चलेगा।
विज्ञापन
अध्ययन में शामिल प्रधान जांचकर्ता डॉ संजीव मिश्रा ने बताया, ‘‘ इस अध्ययन का मकसद जिन लोगों का टीकाकरण हो चुका है उन पर ‘सीरोकन्वर्जन’ का पता लगाना है। इससे यह गणना की जाएगी कि सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए कितने लोगों को टीका लगाए जाने की जरूरत है, ताकि हम महामारी को रोकने में सफल रहें।’’
विज्ञापन
‘सीरोकन्वर्जन’ वह अवधि है, जिसमें एक खास एंटीबॉडीज विकसित होती हैं और रक्त में उनका पता लगाया जा सकता है। ‘सीरोकन्वर्जन’ होने के बाद खून की जांच में एंटीबॉडी का पता लगाया जा सकता है।