गूगल के खिलाफ नहीं दर्ज होगा मानहानि का मुकदमा
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जिला न्यायालय ने गूगल सर्च इंजन के खिलाफ दाखिल निगरानी खारिज कर दी है और अवर न्यायालय के आदेश की पुष्टि कर दी है। यह आदेश एडीजे जयतेंद्र कुमार ने एडीजीसी गुलाब चंद्र अग्रहरि को सुनकर दिया है।
अभियोजन के अनुसार भाजपा नेता और अधिवक्ता सुशील कुमार मिश्र ने गूगल सर्च इंजन, लेरी पेग सीईओ अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनी और भारत में कंपनी के उपाध्यक्ष राजन आनंदन, हैदराबाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की अर्जी सीजेएम कोर्ट में दाखिल की थी, जो खारिज हो गई थी।
वादी ने इस आदेश के खिलाफ जिला जज के न्यायालय में रिवीजन दाखिल किया। आरोप है कि गूगल ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल करने की नीयत से टॉपटेन अपराधियों की सूची में उनकी फोटो पोस्ट की थी। वादी का कहना है कि इससे भारत के नागरिकों की छवि खराब हुई है, जिसके कारण विपक्षी पर मानहानि का अपराध बनता है।
वादी 156(3) के तहत वाद दाखिल करने के लिए अधिकृत नहीं
निगरानी खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा है कि मानहानि का अपराध असंज्ञेय प्रकृति का है, जिसमें प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा सकती है। सीआरपीसी की धारा 199(1) में केवल मानहानि से व्यथित व्यक्ति ही परिवाद दाखिल कर सकता है।
इसके अतिरिक्त अन्य की ओर से परिवाद दाखिल करने की कुछ शर्तें हैं, जो इस मामले में पूरी नहीं हो सकती हैं। संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के संबंध में लोक अभियोजक के द्वारा ही प्रस्तुत परिवाद पर सेशन कोर्ट संज्ञान ले सकते हैं। वादी 156(3) के तहत वाद दाखिल करने के लिए अधिकृत नहीं है।