कोलकाता: नोटबंदी से ठीक पहले भाजपा ने जमा कराए 1 करोड़ रुपए
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माकपा की प्रदेश शाखा ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि बीते आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पांच सौ और हजार के नोटों पर पाबंदी लगाने के ऐलान से महज कुछ घंटे पहले ही प्रदेश भाजपा ने यहां अपने बैंक खाते में एक करोड़ रुपये जमा कराए थे। माकपा के मुखपत्र गणशक्ति में छपी एक रिपोर्ट में यह आरोप लगाया गया है। इसमें बैंक के ब्योरे के साथ खाता संख्या का भी जिक्र है। दूसरी ओर, भाजपा ने इस आरोप का खंडन किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्टी ने यहां इंडियन बैंक की चित्तरंजन एवेन्यू शाखा में स्थित अपने खाते में उक्त रकम जमा कराई थी। उसमें 60 लाख रुपये एक हजार के नोटों की शक्ल में थे और बाकी 40 लाख 500 के नोटों की शक्ल में। माकपा का दावा है कि प्रधानमंत्री के ऐलान से महज कुछ देर पहले ही उक्त रकम जमा कराई गई थी। इस रिपोर्ट में सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि क्या भाजपा के करीबी लोगों को सरकार के फैसले की पहले से जानकारी थी और उन लोगों ने इसका फायदा उठाया?
इसके एवज में रसीद दी जाती है
दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने इस आरोप का खंडन किया है। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में कोई अनियमितता नहीं बरती गई है। उन्होंने कहा कि उक्त रकम राज्य में होने वाले उपचुनावों के दौरान खर्च की जानी है। यह घोषित आय है और पार्टी किसी भी जांच एजेंसी को इस लेन-देन का ब्योरा देने के लिए तैयार है। लेकिन पार्टी के पास एक साथ इतनी बड़ी रकम कहां से आई?
इस सवाल पर घोष ने कहा कि यह रकम पार्टी को विभिन्न तबकों से चंदे के तौर पर मिली थी। भाजपा नेता ने कहा कि पार्टी के खर्च के लिए दान व चंदा मिलना एक सामान्य प्रक्रिया है और इसका एक हिस्सा नकदी के तौर पर मिलता है। इसके एवज में रसीद दी जाती है। उन्होंने कहा कि पुष्टि के लिए पार्टी के पास नकद चंदे व दान के एवज में जारी रसीदों की प्रतियां मौजूद हैं। मालूम हो कि 19 नवंबर को राज्य के कूचबिहार और तमलुक संसदीय सीटों के अलावा बर्दवान जिले की मोंटेश्वर सीट पर उपचुनाव होना है।