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मैं बीजेपी का चमचा हूं, यह अफवाह उड़ाई जा रही है: ऋषि कपूर
अमर उजाला, ब्यूरो/जयपुर
Updated Fri, 20 Jan 2017 08:04 PM IST
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- फोटो : SELF
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जेएलएफ में शुक्रवार को अभिनेता ऋषि कपूर खुलकर बोले। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ यह अफवाह उड़ाई जा रही है कि मैं बीजेपी का चमचा हूं। बात केवल इतनी है कि मैं खुलकर, बिना डरे, अपनी प्रतिक्रिया दे देता हूं। इसलिए मुझे कोई काम गलत लगता है, तो मैं सरकार की और भाजपा की भी खिलाफत करता हूं। मेरा राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं है और न ही मैं किसी पार्टी का समर्थन और न ही विरोध करता हूं।
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ऋषि कपूर ने जेएलएफ में फिर एक बार खुद से जुड़े पुराने विवाद को हवा दे दी। उन्होंने किसी परिवार विशेष का नाम लिए बगैर कहा कि अधिकांश सरकारी संपत्तियों पर एक ही परिवार में पैदा हुए व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं। जबकि कई एेसे स्थानीय लोग होते हैं, जिन्होंने शहर व देश विकास में बहुत योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि यह बात सभी राजनीतिक दलों पर लगू होती है। जिसकी सरकार होती है, वह एेसा ही करने लगता है। उन्होंने कहा कि सरकारी सम्पत्तियों से राजनेताओं के नाम हटें, चाहे संविधान बदलना पड़े।
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ऋषि कपूर ने ‘मैं शायर तो नहीं’ सत्र में कहा कि सरकारी सम्पत्तियों का नाम राजनेताओं के नाम से नहीं रखने के मुद्दे पर पत्रकारों से भी सहयोग करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मुद्दा देश से जुड़ा हुआ है और सभी इसके प्रति जागरूक होने चाहिए। अकेले दिल्ली में 64 सम्पत्तियां हैं जो एक परिवार के नाम से हैं। जेआरडी टाटा, लता मंगेशकर जैसे लोगों का योगदान भी अतुलनीय है।
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25 साल स्वेटर पहन नाच-गाने-रोमांस में निकाले
rishi kapoor
ऋषि कपूर ने कहा कि जिंदगी के इस पड़ाव पर सोचता हूं कि 25 साल तो मैने स्वेटर पहनकर नाच-गाने-रोमांस में निकाल दिए, एक्टिंग तो अब कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि मैं इसलिए नहीं चला कि राजकपूर का बेटा हूं, मैने मेहनत की है।
मेरे दादा पृथ्वीराज का मेरे पिता राजकपूर के करिअर में, मेरे पिता का मेरे करिअर में और मेरा मेरे बेटे रणबीर कपूर के करिअर में कोई दखल नहीं है। सभी मेहनत से चले, जबिक कई हीरो-हीरोइनों के बेटे अपना करिअर फिल्मों में नहीं बना सके। स्टार का पुत्र होने मात्र से कोई फिल्म देखने नहीं चला जाता। जब मैं फिल्मों में आया, तो एक्शन की धूम थी और अमिताभ, धर्मेंद्र, शत्रघ्न सिन्हा जैसे हीरो राज कर रहे थे। मेरा फिल्मी करिअर आसान नहीं था।
मेरे दादा पृथ्वीराज का मेरे पिता राजकपूर के करिअर में, मेरे पिता का मेरे करिअर में और मेरा मेरे बेटे रणबीर कपूर के करिअर में कोई दखल नहीं है। सभी मेहनत से चले, जबिक कई हीरो-हीरोइनों के बेटे अपना करिअर फिल्मों में नहीं बना सके। स्टार का पुत्र होने मात्र से कोई फिल्म देखने नहीं चला जाता। जब मैं फिल्मों में आया, तो एक्शन की धूम थी और अमिताभ, धर्मेंद्र, शत्रघ्न सिन्हा जैसे हीरो राज कर रहे थे। मेरा फिल्मी करिअर आसान नहीं था।
राजनीति पर बोले गुलजार
गुलजार
गुलजार ने अपने सत्र में राजनीति पर तंज तथा दंगे, धर्म, समाज और आम जनता की भावना को लेकर व्यंगभरी, चुभनभरी और यथार्थ पर एेसी-एेसी पक्तियां सुनाई कि श्रोता वाह-वाह कह उठे।
गुलजार ने कहा कि कुछ चुभन मुझे होती है, तो आपको भी होती होगी। फर्क यह है कि आप बोलते नहीं, इसलिए मुझे बोलना पड़ता है। यह मेरा फर्ज है। नज्में प्रहार नहीं करती है, लेकिन बोलती जरूर है और इतना तो हक बनता है। उन्होंने नेता के भाषण और आमजन की सोच को इन पक्तियां में सनाया...नेता— पिछडे वर्ग के लोगों को आगे लाना है...आम आदमी— अरे छोडो जब चाहे आगे पीछे कर लेते हो, हिन्दुस्तान तो गन्ना है छील छील कर खा रहे पीढी दर पीढी।
सियासतदानों पर गुलजार ने टिप्पणी की...बहुत से मसले लेकर गया था बड़े नेता की मीटिंग में वो ही सब हल करेंगे... बड़े नेता ने समझाया- करप्शन और भ्रष्टाचार से साफ करना है सिस्टम को। समझ नहीं आया कि कौन किसके मसलों को हल करेगा। उन्होंने एक डॉन की सेल्फमेड कविता सुनाई और व्यवस्था पर चोट की। टैटू के जरिए गुलजार ने दंगों का जिक्र किया...उसने जानें क्यों अपने कंधों पर नीलगाय का एक टैटू बनवाया था। मर जाता कल दंगों में, अच्छे लोग थे, गाय देखकर छोड़ दिया।
गुलजार ने कहा कि कुछ चुभन मुझे होती है, तो आपको भी होती होगी। फर्क यह है कि आप बोलते नहीं, इसलिए मुझे बोलना पड़ता है। यह मेरा फर्ज है। नज्में प्रहार नहीं करती है, लेकिन बोलती जरूर है और इतना तो हक बनता है। उन्होंने नेता के भाषण और आमजन की सोच को इन पक्तियां में सनाया...नेता— पिछडे वर्ग के लोगों को आगे लाना है...आम आदमी— अरे छोडो जब चाहे आगे पीछे कर लेते हो, हिन्दुस्तान तो गन्ना है छील छील कर खा रहे पीढी दर पीढी।
सियासतदानों पर गुलजार ने टिप्पणी की...बहुत से मसले लेकर गया था बड़े नेता की मीटिंग में वो ही सब हल करेंगे... बड़े नेता ने समझाया- करप्शन और भ्रष्टाचार से साफ करना है सिस्टम को। समझ नहीं आया कि कौन किसके मसलों को हल करेगा। उन्होंने एक डॉन की सेल्फमेड कविता सुनाई और व्यवस्था पर चोट की। टैटू के जरिए गुलजार ने दंगों का जिक्र किया...उसने जानें क्यों अपने कंधों पर नीलगाय का एक टैटू बनवाया था। मर जाता कल दंगों में, अच्छे लोग थे, गाय देखकर छोड़ दिया।