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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- क्या बिना आधार कार्ड वालों का कोई वजूद नहीं

Thu, 11 Jan 2018 02:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Thu, 11 Jan 2018 02:29 AM IST
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Do not exist without adhar card : Supreme Court
aadhaar card
आए दिन कल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं के लिए आधार कार्ड को जरूरी बनाने के सरकारी फैसलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक तल्ख सवाल किया कि क्या जिनके पास आधार नहीं है वे वजूद में ही नहीं हैं? बता दें कि देश में करीब 70 लाख लोग बेघर हैं। 
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सर्वोच्च अदालत ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव कुमार ने बताया कि रैनबसेरे में रहने से पहले लोगों को कोई पहचान पत्र दिखाना होता है जिसमें आमतौर पर लोगों से आधार दिखाने के लिए कहा जाता है। इस पर न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि क्या जिनकेपास आधार नहीं है वे वजूद में नहीं हैं? पीठ ने कहा कि यदि आधार के लिए पता जरूरी है, तब तो बेघरों का आधार बन ही नहीं सकता। क्या इस कड़कड़ाती ठंड में जरूरतमंद लोगों से रैनबसेरे में शरण लेने के लिए आधार मांगा जाएगा। 
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इसके जवाब में मुख्य सचिव ने कहा कि आधार जरूरी नहीं है, कोई अन्य पहचान पत्र दिखाने से भी रैनबसेरे में शरण ली जा सकती है। यूपी सरकार की ओर से यह भी कहा कि रैनबसेरे में आने वाले अधिकतर लोग फ्लोटिंग पॉपुलेशन का हिस्सा होते हैं। अदालत के निर्देश पर मुख्य सचिव बुधवार को पेश हुए थे। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी जानना चाहा किकितने लोगों के पास आधार हैं। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने बताया कि करीब 90 करोड़ लोगों के पास आधार है।

यूपी सरकार द्वारा बताई बेघरों की संख्या पर कड़ा एतराज जताया

Do not exist without adhar card : Supreme Court
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सुनवाई के दौरान पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बताए गए बेघरों की संख्या पर कड़ा एतराज जताया। यूपी सरकार ने बताया कि त्वरित सर्वेक्षण के मुताबिक राज्य में 22 हजार लोग बेघर हैं। इस पर पीठ ने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक, राज्य में करीब 1.82 लाख बेघर हैं लेकिन आप 22 हजार ही बता रहे हैं। 

...तो वापस करिए बेघरों के मद मिलने वाली शेष राशि

अदालत ने कहा कि  यदि 22 हजार ही बेघर हैं तो बेघरों के मद मिलने वाली शेष राशि आपको वापस कर देनी चाहिए। आखिर 22 हजार ही लोग बेघर कैसे हो सकते हैं। इस पर यूपी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सर्वेक्षण जारी है। जुलाई तक  काम पूरा हो जाएगा। उन्होंने पीठ से आग्रह किया कि 22 हजार के आंकड़े को नजरअंदाज कर दिया जाए।

मिल बैठकर समाधान निकालने को कहा

पीठ ने इस मसले पर राज्य स्तरीय कमेटी बनाने की बात कही। साथ ही केंद्र व याचिकाकर्ताओं को मिल बैठकर रैनबसेरों के मामलों का समाधान निकालने केलिए कहा। अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी। 
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