क्या दिल्ली चुनावों में रामजी करेंगे भाजपा का बेड़ा पार?
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सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर नौ नवंबर 2019 को अपना फैसला सुनाया था। फैसले में ही राममंदिर निर्माण के लिए तीन महीने की समय सीमा के अंदर एक बोर्ड गठित करने की बात कही गई थी। आठ फरवरी को यह समय सीमा पूरी हो रही थी, इसलिए सरकार को यह काम इससे पहले ही करना था। लेकिन जिस तरह से बुधवार को प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर पक्ष रखा है, इस फैसले को भी राजनीतिक नजरिये से देखा जा रहा है।
विपक्ष ने फैसले की समय सीमा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि दिल्ली चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ट्रस्ट के गठन की घोषणा ऐसे समय में की है। लेकिन क्या यह निर्णय दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा को कोई लाभ पहुंचा पायेगा? खासकर यह बात ध्यान में रखते हुए कि इससे भी ज्यादा चर्चा उस समय हुई थी, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर अपना फैलाया सुनाया था।
कोर्ट के फैसले के चंद दिनों के भीतर हुए झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। ऐसे में राममंदिर ट्रस्ट के गठन की घोषणा चुनाव पर बहुत फर्क डाल सकेगी, इस पर लोगों को संदेह है।
दिल्ली चुनाव में भाजपा की साख दांव पर
दिल्ली की सत्ता से भाजपा पिछले 22 साल से बाहर है। इस बीच उसने अपने करिश्माई नेताओं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में अपना विस्तार देश के अनेक राज्यों तक कर लिया है। लेकिन इसी बीच मोदी और अमित शाह के होने के बावजूद वह दिल्ली की सत्ता तक नहीं पहुंच पाई।
वर्ष 2014 के आम चुनाव में अपार लोकप्रियता के साथ नरेंद्र मोदी केंद्र की सत्ता पर पहुंचे थे, लेकिन लगभग साल भर बाद हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में वे पार्टी के लिए जीत नहीं दिला सके। इसी प्रकार वर्ष 2019 के आम चुनाव में नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर रिकॉर्ड 303 सांसदों के साथ केंद्र में सरकार बना चुके हैं और एक बार फिर उनके सामने दिल्ली विधानसभा की चुनौती है।
लेकिन इस बार भी दिल्ली की राह भाजपा के लिए आसान नहीं रहने वाली है। आम आदमी पार्टी की अरविंद केजरीवाल सरकार उन्हें कड़ी चुनौती पेश कर रही है। सरकार के शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी की मुफ्त योजनाओं का जादू बरकरार है और उसके फिर से सत्ता में वापसी की चर्चाएं होने लगी हैं।
लेकिन भाजपा इस बार कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती। यही कारण है कि पार्टी ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए दो रैलियां कर चुके हैं, तो अमित शाह रोजाना अनेक रोड शो-जनसभा कर जनता से संपर्क कर रहे हैं।
उनके आलावा पार्टी के सभी सांसद, संगठन के नेता, बाहरी राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री और अन्य नेता मैदान में कमान संभाल चुके हैं और पार्टी के लिए सघन प्रचार कर रहे है। सहयोगी दल जेडीयू और जजपा नेता भी भाजपा के लिए वोट मांग रहे हैं।
विश्व हिन्दू परिषद ने किया बचाव
रामजन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने इस फैसले का स्वागत किया है। विहिप नेता डॉक्टर सुरेंद्र जैन का कहना है कि केंद्र सरकार को यह काम दी गई समय सीमा में ही करना था, इसलिए इस पर विवाद खड़ा करना बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि इस फैसले को वही लोग राजनीति के चश्मे से देख रहे हैं जिन्होंने इस फैसले को रोकने के लिए पूरी कोशिश की थी।
डॉक्टर सुरेंद्र जैन ने कहा कि इस बोर्ड में एक दलित समुदाय के व्यक्ति के होने को अनिवार्य कर सरकार ने सामाजिक एकता को अद्भुत संदेश दिया है। इस निर्णय का पूरे देश में बड़ा सन्देश जाएगा और इससे हिंदू समाज को एक करने में सहायता मिलेगी।