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जानलेवा सेल्फी: जानिए कहां होती हैं इसके कारण सबसे अधिक मौतें?
बीबीसी हिंदी
Updated Mon, 29 Jan 2018 12:33 PM IST
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सेल्फी लेते हुए मौत की घटनाओं में हाल के समय में काफी बढ़ोतरी हुई है। कुछ दिनों पहले आंध्र प्रदेश के वारंगल में एक जिम ट्रेनर ने पटरी पर आती ट्रेन के साथ सेल्फी लेने की कोशिश की और ट्रेन की टक्कर लगने से वे घायल हो गए। फेसबुक पर 21 सेकंड का वीडियो हजारों बार शेयर किया गया है जिसमें 25 वर्षीय टी। शिवा पटरी के पास खड़े हैं और पीछे से ट्रेन आती दिखाई दे रही है।
उन्हीं के करीब खड़े एक शख्स द्वारा दी जा रही चेतावनी और बार-बार बज रहा ट्रेन का सायरन साफ सुनाई दे रहा है। शिवा वहां से हटते नहीं हैं और वीडियो बनाते रहते हैं और कहते हैं, "वन मिनट।" दाईं ओर से ट्रेन उनके सिर से टकराती है जिसके बाद फोन गिर जाता है। दक्षिण मध्य रेलवे के पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार ने बीबीसी न्यूज तेलुगू को बताया कि शिवा इसके जरिए सनसनी फैलाना चाहते थे और खुद की 'वीरता' दर्शाना चाहते थे। अशोक कुमार युवाओं को चेतावनी देते हुए कहते हैं कि वह जिंदगी दांव पर लगाकर ऐसी हरकतें न करें।
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उन्हीं के करीब खड़े एक शख्स द्वारा दी जा रही चेतावनी और बार-बार बज रहा ट्रेन का सायरन साफ सुनाई दे रहा है। शिवा वहां से हटते नहीं हैं और वीडियो बनाते रहते हैं और कहते हैं, "वन मिनट।" दाईं ओर से ट्रेन उनके सिर से टकराती है जिसके बाद फोन गिर जाता है। दक्षिण मध्य रेलवे के पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार ने बीबीसी न्यूज तेलुगू को बताया कि शिवा इसके जरिए सनसनी फैलाना चाहते थे और खुद की 'वीरता' दर्शाना चाहते थे। अशोक कुमार युवाओं को चेतावनी देते हुए कहते हैं कि वह जिंदगी दांव पर लगाकर ऐसी हरकतें न करें।
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सेल्फी का ट्रेंड और भारत में मौतें
पीट्सबर्ग के कार्नेज मेलन विश्वविद्यालय में पीएचडी के छात्र हेमंक लांबा और उनके दोस्तों की टीम ने 2014 से 2016 के दौरान सेल्फी से संबंधित मौतों का अध्ययन किया। उनके अध्ययन के अनुसार, तेज रफ्तार से आती ट्रेन के आगे वीडियो बनाना भारत में घातक प्रवृत्ति बना है।
अक्तूबर 2017 में रेलवे ट्रैक पर सेल्फी लेते हुए कर्नाटक में तीन और दिल्ली में दो किशोरों की मौत हो गई थी। अक्तूबर 2017 में ही ओडिशा के रायगढ़ जिले में सेल्फी लेने के दौरान आंध्र प्रदेश की 27 और 23 वर्षीय दो युवतियां नदी में डूब गई थीं।
जुलाई 2017 में आंध्र प्रदेश के ही विशाखापट्टनम जिले के बोर्रा केव्स जंक्शन पर एक चलती ट्रेन के आगे सेल्फी लेने के कारण एक फार्मेसी के छात्र की मौत हो गई थी। आंध्र प्रदेश में ही एक ट्रेन के डिब्बे पर चढ़कर सेल्फी लेने के दौरान हाई-वॉल्टेज वायर के संपर्क में आने से एक इंजीनियरिंग छात्र की करंट लगने से मौत हो गई थी।
कार्नेज के शोध छात्रों और दिल्ली के इंद्रप्रस्थ इंस्टट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन द्वारा दुनिया की 127 सेल्फी के दौरान हुई मौतों का जब अध्ययन किया गया तो पता चला कि इसमें से 76 मौतें सिर्फ भारत में हुई थीं। जो पूरी दुनिया में सबसे अधिक आंकड़ा था।
अक्तूबर 2017 में रेलवे ट्रैक पर सेल्फी लेते हुए कर्नाटक में तीन और दिल्ली में दो किशोरों की मौत हो गई थी। अक्तूबर 2017 में ही ओडिशा के रायगढ़ जिले में सेल्फी लेने के दौरान आंध्र प्रदेश की 27 और 23 वर्षीय दो युवतियां नदी में डूब गई थीं।
जुलाई 2017 में आंध्र प्रदेश के ही विशाखापट्टनम जिले के बोर्रा केव्स जंक्शन पर एक चलती ट्रेन के आगे सेल्फी लेने के कारण एक फार्मेसी के छात्र की मौत हो गई थी। आंध्र प्रदेश में ही एक ट्रेन के डिब्बे पर चढ़कर सेल्फी लेने के दौरान हाई-वॉल्टेज वायर के संपर्क में आने से एक इंजीनियरिंग छात्र की करंट लगने से मौत हो गई थी।
कार्नेज के शोध छात्रों और दिल्ली के इंद्रप्रस्थ इंस्टट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन द्वारा दुनिया की 127 सेल्फी के दौरान हुई मौतों का जब अध्ययन किया गया तो पता चला कि इसमें से 76 मौतें सिर्फ भारत में हुई थीं। जो पूरी दुनिया में सबसे अधिक आंकड़ा था।
कैसे रुकेगा यह सिलसिला?
सेल्फी के कारण मौतों में हो रही बढ़ोतरी के कारण मुंबई पुलिस ने उन 15 जगहों को चिन्हित किया है जहां पर सेल्फी लेना "खतरनाक हो सकता है।" दक्षिण मध्य रेलवे के प्रवक्ता शकील अहमद ने बीबीसी न्यूज तेलुगू को बताया कि इस बात को ध्यान मे रखना आवश्यक है कि रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 145 और 147 के तहत रेलवे ट्रैक पर चढ़कर या उसके इर्द-गिर्द खड़े होकर सेल्फी या फोटो लेना कानूनन अपराध है।
2017 में सैमसंग कंपनी ने एक वीडियो जारी किया था जिसमें मोबाइल उपयोगकर्ताओं से आग्रह किया गया था कि सेल्फी लेते वक्त सावधान रहें। यहां तक कि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी इस अभियान के सदस्य थे।
सेल्फी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर शोध करने वाले समूह ने एक मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया है जिसमें दुनिया भर की खतरनाक जगहें चिन्हित हैं। विजयवाड़ा के सिद्धार्थ इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चरर और दो बेटों की मां प्रसूना बलंतरापू हालिया पीढ़ी को 'सेल्फी वाली पीढ़ी' बताते हुए कहती हैं कि सेल्फी जिंदगी का हिस्सा बन गया है और युवाओं के बीच इस ट्रेंड को कोई रोक नहीं सकता है,
यहां तक की उम्रदराज लोग भी काफी सेल्फी लेते हैं। अतीत में हुई मौतों का जिक्र करते हुए वह कहती हैं कि युवा सेल्फी से मोह कैसे छोड़ सकते हैं जब इस संस्कृति को देश के प्रधानमंत्री से लेकर फिल्म स्टार तक बढ़ावा दे रहे हैं।
2017 में सैमसंग कंपनी ने एक वीडियो जारी किया था जिसमें मोबाइल उपयोगकर्ताओं से आग्रह किया गया था कि सेल्फी लेते वक्त सावधान रहें। यहां तक कि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी इस अभियान के सदस्य थे।
सेल्फी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर शोध करने वाले समूह ने एक मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया है जिसमें दुनिया भर की खतरनाक जगहें चिन्हित हैं। विजयवाड़ा के सिद्धार्थ इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चरर और दो बेटों की मां प्रसूना बलंतरापू हालिया पीढ़ी को 'सेल्फी वाली पीढ़ी' बताते हुए कहती हैं कि सेल्फी जिंदगी का हिस्सा बन गया है और युवाओं के बीच इस ट्रेंड को कोई रोक नहीं सकता है,
यहां तक की उम्रदराज लोग भी काफी सेल्फी लेते हैं। अतीत में हुई मौतों का जिक्र करते हुए वह कहती हैं कि युवा सेल्फी से मोह कैसे छोड़ सकते हैं जब इस संस्कृति को देश के प्रधानमंत्री से लेकर फिल्म स्टार तक बढ़ावा दे रहे हैं।
वह कहती हैं, "समाज भावनाओं की गरीबी से पीड़ित है। पूरा समाज एक किशोरावस्था में है जो अच्छे और बुरे में भेद नहीं कर सकता है।" हैदराबाद के एक मनोचिकित्सक सी। वीरेंदर कहते हैं कि बहुत से युवा ऐसे सेल्फी लेते हैं जैसे वे अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिव डिसॉर्डर (एडीएचडी) से पीड़ित हैं।
वीरेंदर बताते हैं कि उनसे दो किशोरियों ने संपर्क किया था कि वे किसी भी विषय पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाती हैं। उन्होंने पाया कि पढ़ाई के खराब होते प्रदर्शन के पीछे सेल्फी लेने का जुनून भी था। अबू धाबी के हड्डी रोग चिकित्सक डॉक्टर किरण कुमार मानते हैं कि सेल्फी के कारण हो रही मौतों को रोकने के लिए टेक्नॉलजी के बाहर मौजूद जीवन को महत्व देने की जरूरत है। उन्होंने फोन पर बताया कि आज असल जीवन में जिनको भावनात्मक समर्थन नहीं मिल रहा है वह उन्हें सोशल मीडिया से ढूंढने की कोशिश करते हैं।
वीरेंदर बताते हैं कि उनसे दो किशोरियों ने संपर्क किया था कि वे किसी भी विषय पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाती हैं। उन्होंने पाया कि पढ़ाई के खराब होते प्रदर्शन के पीछे सेल्फी लेने का जुनून भी था। अबू धाबी के हड्डी रोग चिकित्सक डॉक्टर किरण कुमार मानते हैं कि सेल्फी के कारण हो रही मौतों को रोकने के लिए टेक्नॉलजी के बाहर मौजूद जीवन को महत्व देने की जरूरत है। उन्होंने फोन पर बताया कि आज असल जीवन में जिनको भावनात्मक समर्थन नहीं मिल रहा है वह उन्हें सोशल मीडिया से ढूंढने की कोशिश करते हैं।