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सोशल मीडिया पर सैलरी से जुड़ा मैसेज वायरल, जिसने शिक्षामित्रों में मचाई खलबली
amarujala.com- Presented by: विजय जैन
Updated Wed, 09 Aug 2017 04:24 PM IST
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अतिथि शिक्षकों ने मांगी नियुक्ति
- फोटो : अमर उजाला
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शरारती तत्वों ने सचिव बेसिक शिक्षा के फर्जी हस्ताक्षर से एक आदेश तैयार करके उसकी कापी सोशल मीडिया पर डाल दी। इसमें शिक्षामित्रों का मानदेय 17000 रुपये करने का आदेश था। साथ ही बीएसए को निर्देश दिए गए थे कि अगर सात दिन के अंदर कोई शिक्षामित्र स्कूल में जाकर कार्यभार ग्रहण नहीं करता है, तो उसकी तत्काल सेवा समाप्त कर दी जाए। इस आदेश की कॉपी जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो शिक्षामित्रों ने इस आदेश को सरकार का निर्णय मानते हुए विरोध करना शुरू कर दिया। हालांकि, कुछ देर बाद ही आदेश फर्जी साबित हो गया।
लखनऊ में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक थी। शिक्षामित्र आस लगाए थे कि कैबिनेट उनके हक में कोई फैसला लेगी। इसी बीच में दोपहर में सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा के हस्ताक्षर से एक पत्र वायरल हुआ। जिस पर लिखा था कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार विभाग ने निर्णय लिया है कि उत्तर प्रदेश के समस्त शिक्षामित्रों का मानेदय तत्काल प्रभाव से 17000 रुपये तय किया जाता है।
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लखनऊ में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक थी। शिक्षामित्र आस लगाए थे कि कैबिनेट उनके हक में कोई फैसला लेगी। इसी बीच में दोपहर में सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा के हस्ताक्षर से एक पत्र वायरल हुआ। जिस पर लिखा था कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार विभाग ने निर्णय लिया है कि उत्तर प्रदेश के समस्त शिक्षामित्रों का मानेदय तत्काल प्रभाव से 17000 रुपये तय किया जाता है।
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शिक्षामित्रों में हड़कंप
guest teacher
- फोटो : AmarUjala
सभी बीएसए को आदेशित किया जाता है कि वे अपने जनपद के सभी समायोजित शिक्षामित्रों को उनके मूल विद्यालय में सरकार की ओर से निर्धारित किए गए नए मानदेय पर कार्यभार ग्रहण करवा कर आख्या शासन को प्रेषित करें। यदि कोई शिक्षामित्र सात दिन के अंदर कार्यभार ग्रहण नहीं करता, तो उसकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाए। यह आदेश सोशल मीडिया पर वायरल होते ही शिक्षामित्रों में हड़कंप मच गया। शिक्षामित्रों के संगठन के पदाधिकारियों ने आंदोलन करने की चेतावनी दे दी। हालांकि, बाद में पड़ताल करने पर यह मैसेज फर्जी निकला। अब पुलिस इस बात का पता लगाने पर लगी है कि यह पोस्ट किसने किया है।
इस मामले में बीएसए डा. सत्यनारायण से पूछा गया तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला था। कहा कि कोई कुछ भी सोशल मीडिया पर डाले, इससे फर्क नहीं पड़ता है। जब हमारे पास आदेश आएगा, उसके बाद देखा जाएगा। जिसने यह पोस्ट डाला है, उसके खिलाफ कार्रवाई करने का काम पुलिस का है, हमारा नहीं। इसमें हम कुछ नहीं कर सकते।
इस मामले में बीएसए डा. सत्यनारायण से पूछा गया तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला था। कहा कि कोई कुछ भी सोशल मीडिया पर डाले, इससे फर्क नहीं पड़ता है। जब हमारे पास आदेश आएगा, उसके बाद देखा जाएगा। जिसने यह पोस्ट डाला है, उसके खिलाफ कार्रवाई करने का काम पुलिस का है, हमारा नहीं। इसमें हम कुछ नहीं कर सकते।