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Hindi News ›   Crime ›   this is how sant rampal Acquitted in two false case

दो केसों में 10 मिनट में फैसला, जानिए बरी होते ही क्या बोले रामपाल?

Wed, 30 Aug 2017 11:04 AM IST
amarujala.com, Presented By: विकास जांगड़ा
amarujala.com, Presented By: विकास जांगड़ा Updated Wed, 30 Aug 2017 11:04 AM IST
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this is how sant rampal Acquitted in two false case
संत रामपाल जी महाराज - फोटो : फाइल चित्र
जेएमआईसी मुकेश कुमार की कोर्ट ने करीब 10 मिनट के अंदर फैसला पढ़कर सुना दिया। जानिए, बरी होते ही क्या बोले रामपाल?
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जेएमआईसी मुकेश कुमार की कोर्ट मंगलवार को सेंट्रल जेल वन में लगी। रामपाल को छोड़कर सेंट्रल जेल-वन में मामले के सभी अभियुक्त मौजूद थे। रामपाल सेंट्रल जेल टू में बंद थे। रामपाल को वीसी से पेश किया गया। करीब 10 मिनट के अंदर जज ने फैसला पढ़कर सुना दिया। फैसला सुनने के बाद रामपाल बोले यह सत्य की जीत है।
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सतलोक आश्रम के मुखी रामपाल व उसके बेटे सहित आठ लोग दो मामलो में बरी हो गए। दोनों मामलों में कुल आठ लोग थे। जिनमें एक केस में रामपाल सहित पांच व दूसरे में रामपाल सहित 6 लोग शामिल थे। 
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फैसले के बाद बोले रामपाल- सच की जीत हुई

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रामपाल जज के समक्ष स्क्रीन पर हाथ जोड़कर खड़े रहे। 10 मिनट तक जब फैसला पढ़कर सुनाया गया वे गर्दन झुकाए हुए खड़े थे। जब दोनों मामलों में बरी सुनने की आवाज रामपाल को सुनाई दी तो रामपाल केवल ये ही शब्द बोले कि सत्य की जीत हुई सत साहेब।

इसके साथ ही सेंट्रल जेल वन में मौजूद उनके बेटे व अनुयायियों ने भी सत्य की जीत की बात कही। फैसला सुनने के बाद जब कोर्ट से जेल परिसर में रामपाल के अनुयायी जाने लगे तो उन्होंने खुशी जाहिर की और कहा कि सत्य की जीत हुई है। बाहर निकलकर सत साहेब इसी तरह के नारे दो से तीन बार लगाए गए। 

रामपाल व उसके अनुयायियों पर दर्ज केस में पुलिस की कार्रवाई व गवाही कमजोर साबित हुई। जिस मुख्य शिकायतकर्ता के नाम पर केस दर्ज हुआ था उसने आते ही कहा कि उन्हें किसी ने बंधक नहीं बनाया था। वे पुलिस के डर के मारे बाहर नहीं निकले थे।  

पुलिस ने जिसे गवाह बना दिया, वो कोर्ट जाते ही मुकर गया

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करौंथा कांड केस में रामपाल की कोर्ट में पेशी - फोटो : अमर उजाला
बंधक बनाने के मामले में शिकायतकर्ता व गवाह मुकर गए, वहीं सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने के मामले में तो सरकार आरोप सिद्ध ही नहीं कर पाई।  पुलिस ने रतिया के सुखदेव सिंह को शिकायतकर्ता बनाया था। पुलिस से उसका कोई सीधा संपर्क नहीं हुआ। उसने फतेहाबाद के एक पत्रकार के पास कॉल की। वह पत्रकार उसका परिचित था।

उसने पत्रकार को कहा कि वह दो-तीन दिन पहले रामपाल के बरवाला आश्रम में आया था। बाहर पुलिस डंडे मार रही है। कोई जानकार है क्या। मुझे यहां से सेफ निकालने का कोई रास्त है तो बताओ। इस पर पत्रकार ने परिचित की मदद करने के लिए पुलिस कंट्रोल रूम में कॉल कर दी। पुलिस ने इसी कॉल को आधार बनाकर सुखदेव सिंह को शिकायतकर्ता बना लिया।  

पुलिस ने जब इन दोनों के पास गवाही के लिए समन भेजा तो दोनों गवाह मुकर गए। शिकायतकर्ता ही मुकर गया। कोर्ट के समक्ष उसने कहा कि मैंने तो अपने परिचित के पास पुलिस के डर से कॉल की थी। बाहर पुलिस खड़ी थी, कहीं पिटाई न करने लग जाए इस डर के चलते कॉल की थी। अंदर किसी ने हमें बंधक नहीं बनाया हुआ था।
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