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नामी स्कूलों में चल रहा था एडमिशन घोटाला, जानें कैसे होती थी धांधली

Wed, 30 Nov 2016 01:38 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 30 Nov 2016 01:38 PM IST
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school bribe racket disclose in calcutta

कोलकाता में गैर-कानूनी ढंग से नामी स्कूलों में बच्चों के एडमिशन कराने का काला सच सामने आया है। बच्चों के माता-पिता से लाखों रुपये लेकर एडमिशन कराने वाली महिला मंजू राठी को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप है कि मंजू नर्सरी से लेकर 12वीं तक के दाखिलों के लिए 5 से 15 लाख तक की रिश्वत लिया करती थी।

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बोहवानीपुर की रहने वाली राठी एक बिजनेमैन की पत्नी है और उससे पुलिस ने 16 लाख रुपये बरामद किए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक जब्त की गई रकम में 4 लाख के नए नोट हैं और बाकी की रकम पुराने 500 और 1000 के नोटों के रूप में बरामद हुई है। 
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टेलिग्राफ की खबर के अनुसार उसने इस साल करीब 60 बच्चों का एडमिशन करवाया। चौंका देने वाली बात है कि राज्य के टॉप स्कूल में हर साल करीब 100 बच्चों का एडमिशन राठी का टारगेट हुआ करते थे और इस गोरखधंधे में नामी स्कूलों ने भी उसका साथ दिया। मामले का खुलासा तब हुआ जब एक माता-पिता ने आरोप लगाया कि राठी ने पैसे ले लिए लेकिन उनके बच्चे को एडमिशन कहीं नहीं मिला। 

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क्लाइंट को ऐसे फंसाती थी अपने जाल में

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पुलिस ने बताया कि बच्चे के माता-पिता को कभी जानकारी मिलने पर ही राठी से मिलने का मौका मिलता था तो कभी राठी खुद अपने ग्राहक ढूंढ लिया करती थी। इतना ही नहीं राठी की इस धांधली में स्कूल भी उसका साथ देते थे।

स्कूल प्रशासन माता-पिता को आगे की औपचारिक्ताओं का बहाना देकर राठी से मिलने का इशारा देते थे। इस बीच राठी माता पिता को बच्चे के भविष्य के नाम पर मामूली रकम का हवाला देकर अपने जाल में फंसा लेती थी।
 

कभी-कभी घोटाले में मुख्य भूमिका निभाते थे स्कूल

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पूरे घोटाले में सामने आया कि राठी ने बड़े स्कूलों में ऊंची पहचान बना रखी थी। राठी का दबदबा इस कदर कायम था कि उसके लिए कभी-कभी स्कूल माता-पिता को एडमिशन के लिए मजबूर करने पर मुख्य भूमिका निभाते थे। स्कूल प्रशासन राठी को उनकी अकाउंट अधिकारी बताकर उसके पास भेज दिया करते थे। 

उसके बाद राठी उनसे खुलकर पैसों की बात करती थी। इस बीच जो भी इस डील के लिए मान जाते थे, उनसे स्कूल और रअपनी जेब भर लिया करते थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार साल में राठी की ओर से राज्य के पुराने और नए स्कूलों में करीब 12 बच्चों का एडमिशन कराया जाता था, इसमें हर स्कूल में एक लड़का और लड़की को भेजा जाता था। वहीं करीब 10 सालों से साउथ कोलकाता बॉयस स्कूल में 12 बच्चों की सीट सुरक्षित होती थी।
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