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मार्केटिंग कंपनी के ब्रांच मैनेजर की हत्या का आरोपी गिरफ्तार, प्रताड़ना से तंग आकर किया जुर्म

Mon, 20 Aug 2018 09:32 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, गोरखपुर
ब्यूरो/ अमर उजाला, गोरखपुर Updated Mon, 20 Aug 2018 09:32 PM IST
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Sales manager arrested for killing marketing company Branch Manager in Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्राइवेट कंपनी के ब्रांच मैनेजर तथा राजस्थान निवासी बजरंग सिंह की हत्या के आरोपी को शाहपुर थाने की पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी संजीत कुमार कंपनी में सीनियर सेल्स मैनेजर था। वह बिहार के चाकंद जिले के राहिन निवासी है। पुलिस के मुताबिक उसने प्रताड़ना से आजिज आकर यह जुर्म किया। पुलिस ने उसे बिहार के सिवान जिले के गौरी गांव स्थित उसकी ससुराल से पकड़ा।

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सोमवार को सीओ क्राइम प्रवीण सिंह ने बताया कि शाहपुर में आवास विकास कॉलोनी में मार्केटिंग कंपनी आर्डियल मर्चेंडाइजिंग इंडिया का दफ्तर है। राजस्थान, झालावाड़ जिले के संगरिया निवासी बजरंग सिंह (32) कंपनी में ब्रांच मैनेजर थे। बृहस्पतिवार की रात सीनियर सेल्स मैनेजर संजीत यादव ने बजरंग के सिर पर रॉड से हमला कर उनकी हत्या कर दी और फरार हो गया। 
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पुलिस बजरंग के पिता मनोहर की तहरीर पर संजीत के खिलाफ केस दर्ज कर उसकी तलाश में जुटी थी। उन्होंने बताया कि संजीत से कंपनी के विज्ञापन में ट्रेनिंग के दौरान 8500 रुपये और खाना, रहना फ्री में हाने की बात कही थी। जब काम कराया गया तो सारी सुविधा गायब थी। कंपनी का ब्रांच मैनेजर बजरंग अक्सर प्रताड़ित और पिटाई करता था। लालच देकर भी प्रमोशन नहीं दिया गया। 
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सीओ ने बताया कि उसके बाद संजीत दस दिनों से हत्या करने का प्लान बना रहा था। 16 अगस्त की रात को सामान कम बिकने पर बजरंग ने उसकी पिटाई। इससे गुस्से में उसने बजरंग पर डंडे से वार कर हत्या कर दी और फरार होकर अपनी ससुराल पहुंच गया।
 

कर्मचारियों को प्रताड़ित करती थी कंपनी

पुलिस के अनुसार कंपनी अनुशासन का पालन कराने के लिए कर्मचारियों को प्रताड़ित करती थी। कंपनी के मैनेजर रोजाना सामान बेचने का बड़ा लक्ष्य देते थे। लक्ष्य पूरा न होने पर डांट-फटकार के साथ पिटाई आम बात थी। कभी-कभी कर्मचारियों को खाना भी नहीं नसीब होता था। काम करने वाले युवकों और युवतियों को तनख्वाह का वादा कर केवल बिके सामान पर मामूली कमीशन दिया जाता था। 

हत्यारोपी संजीत और अन्य कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि खुद संजीत की घर की हालत ठीक नहीं थी। उसके पिता विकलांग हैं। पत्नी बच्चों सहित  घर की जिम्मेदारी उठाने के लिए वह विज्ञापन देखकर काम करने आया था, लेकिन उसे धोखा मिला। पुलिस ने बताया कि कर्मचारियों को आपस में बात करने की भी छूट नहीं मिलती थी। कंपनी सभी कर्मचारियों के आईडी और जरूरी कागजात अपने पास जमा कर लेती थी।

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