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Hindi News ›   Crime ›   accused of rape and murder of girl child sentenced to death in UP

ढाई साल की बच्ची से रेप और हत्या के दोषी को मृत्युदंड

Fri, 04 Mar 2016 05:55 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर Updated Fri, 04 Mar 2016 05:55 PM IST
सार

  • तीन साल पहले दिया था वारदात को अंजाम, अब मिली मौत की सजा
  • बच्ची को बहला-फुसलाकर खेत में ले गया और दुष्कर्म के बाद मार दिया

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accused of rape and murder of girl child sentenced to death in UP
बच्ची के गुनहगार को मौत की सजा - फोटो : demo pic

विस्तार

वो आज होती तो साढ़े पांच साल की हो जाती। उसके पैरों की छम-छम से घर-आंगन गूंजता था। सबके आंख का तारा थी वो नन्हीं बच्ची। लेकिन उस दरिंदे ने उसके साथ वहशत को अंजाम दे डाला, जिसे आज अपने कुकर्मों की सजा मिली ही। बच्ची के गुनहगार को आखिरकार करीब तीन साल चली जिरह के बाद अदालत ने मौत की सजा मुकर्रर की है। इस फैसले से मासूम लौटकर तो नहीं आएगी, लेकिन घरवालों को थोड़ी राहत की सांस जरूर मिली होगी।

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यूपी के सहारनपुर में तीन साल पहले एक दरिंदे ने नागल क्षेत्र के एक गांव में ढाई साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। मामले में गुरुवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने हत्यारे को मौत की सजा सुनाई। दोषी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
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न्यायाधीश ने धारा 366-1 के तहत मृत्युदंड की पुष्टि के लिए पत्रावली उच्च न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। वहां से पुष्टि होने के बाद अभियुक्त को फांसी पर लटकाने का आदेश दिया जाएगा।
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फरवरी 2013 में थाना नागल क्षेत्र के एक गांव निवासी अभियुक्त बॉबी पुत्र सुशील ने घर के बाहर खेल रही ढाई साल की बच्ची को टॉफी दिलाने के बहाने बहला-फुसलाकर गन्ने के खेत में ले जाकर दुष्कर्म किया और गला घोंटकर मार दिया था।

लड़की के गायब होने पर घर वालों ने तलाश की। ग्रामीणों ने बताया कि बॉबी बच्ची को लेकर गन्ने की खेत की ओर गया था। ग्रामीण और परिजनों ने मौके पर पहुंचकर बॉबी को दबोच लिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता विक्रमजीत सिंह ने बताया कि घटना की रिपोर्ट बच्ची के पिता ने नागल थाने में दर्ज कराई थी।

मामले की सुनवाई के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक ओम प्रकाश त्रिपाठी ने अभियुक्त बॉबी को धारा 302 और 376 के तहत मौत की सजा सुनाई और पांच हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया।


अपर सत्र न्यायाधीश ओपी त्रिपाठी का यह फैसला समाज के दरिंदों के लिए सबक बनेगा। इस फैसले के बाद समाज में रह रहे आपराधिक प्रवृत्ति के दरिंदों के मन में खौफ भी पैदा होगा। वरिष्ठ नागरिक और शिक्षाविद डा. एसके उपाध्याय का कहना है कि तीन वर्ष पहले हुई घटना हृदय विरादक थी। इसमें सख्त सजा से दोषी को भी अपने अपराध का आभास होगा। इसके अलावा ऐसे दरिंदों के लिए यह सबक बनेगा।

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