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बंगलूरू के साइबर क्राइम स्टेशन में 5,000 मामलों की जांच के लिए केवल एक इंस्पेक्टर

क्राइम डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 17 Dec 2018 10:22 AM IST
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cyber crime pexels - फोटो : pexels.com
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साल 2018 में भारत की टेक्नोलॉजी कैपिटल कहे जाने वाले बंगलूरू में भारी संख्या में साइबर क्राइम के मामले सामने आए हैं। इन मामलों में कई मामले तो पासवर्ड चोरी के हैं, जिनसे लोगों के अकाउंट से पैसे निकाले गए। लेकिन हैरानी की बात तो ये है कि यहां साइबर क्राइम स्टेशन में ऐसे ही 5,000 मामलों की जांच के लिए केवल एक इंस्पेक्टर है। 
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आंकड़ों से पता चलता है कि बंगलूरू में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन साल 2017 में खुला था। साइबर शिकायतों के लिए इसे सेंट्रल पॉइंट के तौर पर खोला गया था। 14 दिसंबर तक यहां 4,714 शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। 

वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि तकनीक के बढ़ने से ठगी के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। साल के अंत तक मामले पांच हजार से भी अधिक हो जाएंगे। जिसमें 10 करोड़ रुपये की ठगी शामिल है। पैसों की ये संख्या अगले साल तक दोगुनी हो सकती है। इस स्टेशन में एक इंस्पेक्टर, एक सब इंस्पेक्टर 18 लोगों के स्टाफ के साथ काम करते हैं। जो केवल 100 मामले ही सुलझा पाते हैं। राजधानी में एक नियमित पुलिस स्टेशन में रोजाना ऐसे करीब 300 मामले दर्ज होते हैं। वहीं इस साइबर क्राइम स्टेशन में महीने में 400 और दिन में 13 मामले दर्ज होते हैं।

बंगलूरू पुलिस अब मामलों को हल करने के लिए नए तरीके खोज रही है। लोगों को जागरुक करने के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा पुलिस ने अपने प्रस्ताव में अधिक से अधिक साइबर स्टेशन खोलने की बात भी कही है। 

डीसीपी क्राइम एस गिरीश का कहना है, "हम एक साल में 20 कर्मियों की मौजूदगी में केवल 100 ही मामलों की जांच कर पाते हैं। सरकार को आठ नए साइबर स्टेशन खोले जाने का प्रस्ताव भेज दिया गया है।"

इन अपराधों में ऑनलाइन फेक सेल, पासवर्ड चोरी, कार्ड स्वाइप जैसे मामले सामने आते हैं। जिनमें लोगों को 25 हजार से लेकर 25 लाख रुपये तक का नुकसान हुआ है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "वर्तमान में, एक पुलिकर्मी 5 हजार मामले संभाल रहा है। बेहतर जांच के लिए हमें 100 मामलों पर एक पुलिसकर्मी की जरूरत है। इसका मतलब ये है कि 5 हजार मामलों की जांच के लिए 50 पुलिसकर्मियों की आवश्यकता है।"
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