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सैफई में एक महीने में मर गए 92 बच्चे, वजह जानकर पैरों तले खिसक जाएगी जमीन
amarujala.com, Presented by: शारुख खान
Updated Sat, 09 Sep 2017 01:41 AM IST
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सैफई में एक महीने में 92 बच्चों की मौत हो गई। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय प्रशासन ने मृत्युदर को सामान्य बताया है। मरने वालों में आधे से ज्यादा बच्चे दूसरी जगहों से रेफर होकर आए।
अस्पतालों में बच्चों की मौतों के मामले में गोरखपुर और फर्रखाबाद के बाद अब सैफई के आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। यहां के बाल रोग विभाग में एक महीने में 92 बच्चों की मौत की खबर से शुक्रवार को हड़कंप की स्थिति रही।
हालांकि अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की भर्ती के अनुपात में मृत्युदर को सामान्य बताकर किसी भी प्रकार की जांच कराने से इनकार कर दिया है। कुलपति ब्र्रिगेडियर डॉ. टी प्रभाकर ने बताया कि अगस्त में 1464 मरीज बाल रोग विभाग में भर्ती हुए। उसमें से 92 बच्चों की मौत हुई।
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पढ़ें:- महाराष्ट्र: अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी, अगस्त में 55 नवजातों की मौत
इसमें आधे से ज्यादा संख्या उन बच्चों की है जो दूसरी जगहों से रेफर होकर आए। बच्चों की मृत्यु दर ऑल इंडिया मेडिकल इंस्टीट्यूट, केजीएमसी सहित देश के बड़े चिकित्सा संस्थानों की तुलना में सामान्य है।
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अस्पतालों में बच्चों की मौतों के मामले में गोरखपुर और फर्रखाबाद के बाद अब सैफई के आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। यहां के बाल रोग विभाग में एक महीने में 92 बच्चों की मौत की खबर से शुक्रवार को हड़कंप की स्थिति रही।
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हालांकि अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की भर्ती के अनुपात में मृत्युदर को सामान्य बताकर किसी भी प्रकार की जांच कराने से इनकार कर दिया है। कुलपति ब्र्रिगेडियर डॉ. टी प्रभाकर ने बताया कि अगस्त में 1464 मरीज बाल रोग विभाग में भर्ती हुए। उसमें से 92 बच्चों की मौत हुई।
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इसमें आधे से ज्यादा संख्या उन बच्चों की है जो दूसरी जगहों से रेफर होकर आए। बच्चों की मृत्यु दर ऑल इंडिया मेडिकल इंस्टीट्यूट, केजीएमसी सहित देश के बड़े चिकित्सा संस्थानों की तुलना में सामान्य है।
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बच्चों की मौतों पर ‘धरती के भगवानों’ की यह सफाई मानक पर भले ही भारी न पड़ती हो, लेकिन पीड़ित परिवारीजनों के लिए यह एक और आघात हो सकती है। जिस जगह जान बचाने के लिए लोग दौड़े आते हों, वहां मौतों की संख्या को मानक पर रखा जाना लोगों के लिए पीड़ादायी हो सकता है।
हालांकि अस्पताल के खिलाफ किसी भी पीड़ित परिवार ने शिकायत नहीं की है, लेकिन शुक्रवार को मौतों का आंकड़ा सामने आते ही अस्पताल में हड़कंप की स्थिति रही। रजिस्टर खुल गए, मौतों के कारण बताए जाने लगे। इन मौतों के पीछे कहीं भी अव्यवस्था की बात नहीं बताई गई है।
पढ़ें:- 32 दिन...28 मौतें...ये कैसा सामान्य बुखार
सैफई आयुर्विज्ञान विवि के डीन डॉ. केएम शुक्ला ने बताया कि सैफई में अगस्त में जिन 92 बच्चों की मौत हुई है, उनमें से 45 बच्चे वे हैं जिनकी मौत डिलीवरी के तीन घंटे से तीन दिन के अंदर हुई है। 45 में से 33 बच्चे वे हैं जो घरों या पीएचसी, सीएचसी में डिलीवरी के बाद पैदा हुए।
वह भी सामान्य से कम समय में अर्थात नौ महीने से पहले की अवधि में। उन बच्चों को गंभीर स्थिति में सैफई रेफर किया गया था। ऐसे बच्चे असामान्य होते हैं। उनका वजन 1 किग्रा अथवा उससे कम होता है। ऐसे बच्चों को बचा पाना मुश्किल होता है। 12 बच्चों की मौत सैफई अस्पताल में डिलीवरी के बाद मां की बीमारियों के चलते असामान्य स्थिति में हुई।
हालांकि अस्पताल के खिलाफ किसी भी पीड़ित परिवार ने शिकायत नहीं की है, लेकिन शुक्रवार को मौतों का आंकड़ा सामने आते ही अस्पताल में हड़कंप की स्थिति रही। रजिस्टर खुल गए, मौतों के कारण बताए जाने लगे। इन मौतों के पीछे कहीं भी अव्यवस्था की बात नहीं बताई गई है।
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सैफई आयुर्विज्ञान विवि के डीन डॉ. केएम शुक्ला ने बताया कि सैफई में अगस्त में जिन 92 बच्चों की मौत हुई है, उनमें से 45 बच्चे वे हैं जिनकी मौत डिलीवरी के तीन घंटे से तीन दिन के अंदर हुई है। 45 में से 33 बच्चे वे हैं जो घरों या पीएचसी, सीएचसी में डिलीवरी के बाद पैदा हुए।
वह भी सामान्य से कम समय में अर्थात नौ महीने से पहले की अवधि में। उन बच्चों को गंभीर स्थिति में सैफई रेफर किया गया था। ऐसे बच्चे असामान्य होते हैं। उनका वजन 1 किग्रा अथवा उससे कम होता है। ऐसे बच्चों को बचा पाना मुश्किल होता है। 12 बच्चों की मौत सैफई अस्पताल में डिलीवरी के बाद मां की बीमारियों के चलते असामान्य स्थिति में हुई।
दवाओं और सुविधाओं की कमी नहीं: कुलपति
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बाकी बच्चों की मौत सांप, बिच्छू काटने, दुर्घटना, निमोनिया, मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारी से हुई। सैफई अस्पताल में भर्ती 1464 मरीजों की भर्ती के अनुपात में मृत्यु दर 6.2 फीसदी है। ऑल इंडिया, केजीएमसी सहित बड़े चिकित्सा संस्थानों में औसत मृत्यु दर 5.5 से 7.4 के बीच है।
सैफई आयुर्विज्ञान विवि के कुलपति ब्रिगेडियर डॉ. टी प्रभाकर ने कहा कि बाल रोग चिकित्सालय में पर्याप्त चिकित्सक हैं। पर्याप्त दवा है। ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। बाल रोग विभाग में 60 बेड हैं। तीन आईसीयू यूनिट हैं। हर महीने औसतन 800 डिलीवरी होती है। कहीं कोई गड़बड़ नहीं है, तो जांच का सवाल नहीं उठता।
सैफई आयुर्विज्ञान विवि के कुलपति ब्रिगेडियर डॉ. टी प्रभाकर ने कहा कि बाल रोग चिकित्सालय में पर्याप्त चिकित्सक हैं। पर्याप्त दवा है। ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। बाल रोग विभाग में 60 बेड हैं। तीन आईसीयू यूनिट हैं। हर महीने औसतन 800 डिलीवरी होती है। कहीं कोई गड़बड़ नहीं है, तो जांच का सवाल नहीं उठता।