बलात्कार के केस में समझौता के लिए आरोपी को लगे 10 लाख रुपए
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे के एक शख्स पर लगे बलात्कार के आरोप को उस वक्त खारिज कर दिया जब आरोपी ने पीड़िता को बतौर समझौता राशि 10 लाख रुपए देने के लिए तैयार हो गया।
बलात्कार का आरोप लगाने वाली 23 वर्षीय लड़की अभी सात माह की गर्भवती है। पीड़िता गीता पाटिल ने जब मामले में समझौता करने के लिए दो जजों अभय ओका और अमजद सैयद की बेंच में अपील दायर की तो जजों ने विशेष परिस्थितियों को देखते हुए समझौता कराने के लिए तैयार हो गए।
आरोपी समीर शिंदे को समझौते के लिए सपथपत्र देने के लिए कहा। समीर पहले से शादीशुदा था। अदालत ने पीड़िता की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए लगता है कि दोनों के बीच सहमति से संबंध बने हैं। लेकिन युवती के पेट में पल रहे मासूम के सुरक्षित भविष्य के लिए एक निश्चित रकम जमा करराना जरूरी है।
राष्ट्रीय बैंक में जमा कराएं 10 लाख रुपए
दो जजों की बेंच ने कहा कि आरोप समीर किसी राष्ट्रीय बैंक में पीड़िता के नाम पर 10 लाख रुपए 10 साल के लिए फिक्स डिपोजिट कराए। इस रकम का ब्याज पीड़िता नियमित रूप से ले सकती है और 10 साल की अवधि पूरी होने पर वह इस राशि को निकाल भी सकती है।
जून 2016 में पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ बलात्कार की शिकायत दी थी जिसके बाद पुलिस ने बलात्कार और मानसिक रूप से चोंट पहुंचाने का मामला दर्ज किया था।
मंगलवार को पीड़िता ने जब मामले पर समझौता कराने की अर्जी दी तो उसकी ओर वकील ने दलील दी कि पुलिस ने गलतफहमी में बलात्कार का मामला दर्ज किया था। अब पीड़िता को एफआईआर रद्द कराने में कोई आपत्ति नहीं है।
वहीं समीर भी समझौता के लिए 10 लाख रुपए जमा कराने के लिए तैयार हो गया। समीर ने इस डेट पर पांच लाख रुपए जमा कराए जबकि अगली डेट तक और पांच लाख रुपए जमा कराने की बात कही।