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फैसले की घड़ी: जानिए, डेरा सच्चा सौदा से जुड़े 11 बड़े विवाद

Thu, 24 Aug 2017 11:58 AM IST
बीबीसी, हिंदी
बीबीसी, हिंदी Updated Thu, 24 Aug 2017 11:58 AM IST
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major disputes related to Dera Sacha Sauda
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह पर चल रहे साध्वी यौन शोषण केस में शुक्रवार (25 अगस्त) को फैसला आने वाला है। डेरा समर्थकों की तरफ से प्रदर्शनों की आशंका में पंजाब और हरियाणा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
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डेरा सच्चा सौदा की स्थापना साल 1948 में शाह मस्ताना ने की थी। मौजूदा प्रमुख गुरमीत सिंह ने 1990 में डेरे की गद्दी संभाली थी। 90 के दशक से लेकर आज तक डेरा और उसके प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह विवादों में हैं। देखें, क्या हैं उनसे जुड़े 11 बड़े विवाद:
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1. बच्चे की मौत को लेकर पत्रकारों से विवाद

1998 में गांव बेगू का एक बच्चा डेरा की जीप के नीचे आ गया। इसके बाद गांववालों का डेरा से विवाद हो गया। डेरा पर घटना का समाचार प्रकाशित करने पर अखबारों के नुमाइंदों को धमकाने के आरोप लगे। बाद में डेरा सच्चा सौदा की प्रबंधन समिति और मीडियाकर्मियों की पंचायत हुई।
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इसमें डेरा सच्चा सौदा की तरफ से लिखित माफी मांगी गई और मामला सुलझ गया।

2. यौन शोषण के आरोप वाली गुमनाम चिट्ठी

मई 2002 में डेरा सच्चा सौदा की एक कथित साध्वी ने डेरा प्रमुख पर यौन शोषण के आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री को गुमनाम चिट्ठी भेजी और इसकी एक प्रति पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भी भेजी गई।

10 जुलाई, 2002 को डेरा सच्चा सौदा की प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कुरुक्षेत्र के रणजीत सिंह की हत्या हो गई। आरोप लगा कि डेरा सच्चा सौदा के प्रबंधकों को शक था कि रणजीत ने अपनी बहन से गुमनाम चिट्ठी लिखवाई है जो डेरा में साध्वी थी। 24 सितंबर 2002 को हाईकोर्ट ने साध्वी यौन शोषण मामले में गुमनाम पत्र का संज्ञान लेते हुए सीबीआई को जांच के आदेश दिए।
 

3. पत्रकार पर जानलेवा हमला और मौत

major disputes related to Dera Sacha Sauda
24 अक्टूबर, 2002 को सिरसा के सांध्य दैनिक 'पूरा सच' के संपादक रामचन्द्र छत्रपति को घर के बाहर गोलियां मारी गईं। आरोप डेरा पर लगा। मीडियाकर्मियों ने जगह-जगह धरने-प्रदर्शन किए। 21 नवंबर 2002 को रामचन्द्र छत्रपति की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मृत्यु हो गई।

हाई कोर्ट ने पत्रकार छत्रपति और रणजीत हत्या मामलों की सुनवाई इकट्ठी करते हुए 10 नवंबर, 2003 को सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए। डेरा की याचिका पर दिसंबर 2003 में जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगाया और फिर नवंबर 2004 में दूसरे पक्ष की सुनवाई के बाद जांच जारी रखने के आदेश दिए। इसके बाद डेरा समर्थकों ने चंडीगढ़ में हजारों की संख्या में सीबीआई के अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।

4. गुरुगोबिंद सिंह जैसी वेशभूषा को लेकर विवाद

मई 2007 में पंजाब के बठिंडा में डेरा सलावतपुरा में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह की वेषभूषा को लेकर विवाद हो गया। अखबारों में छपी तस्वीरों में वह जिस परिधान में नजर आ रहे थे, सिखों का कहना था कि वह उनके दसवें गुरु गोबिंद सिंह की वेशभूषा की नकल है। इसके विरोध में बठिंडा में डेरा प्रमुख का पुतला फूंका गया। इस दौरान प्रदर्शनकारी सिखों पर डेरा प्रेमियों ने हमला बोल दिया। इसके बाद उत्तर भारत में सिखों और डेरा प्रेमियों के बीच कई जगह टकराव हुआ।

5. डेरा प्रेमी ने चलाई गोली

7 मई 2007 को सुनाम में प्रदर्शन कर रहे सिखों पर गोली चला दी गई। आरोप डेरा प्रेमी पर लगा। इस घटना में सिख युवक कोमल सिंह की मौत हो गई। इसके बाद सिख जत्थेबंदियों ने डेरा प्रमुख की गिरफ्तारी को लेकर आंदोलन किया। पंजाब में डेरा प्रमुख के जाने पर पाबंदी लग गई। डेरा सच्चा सौदा इस मामले में झुकने को तैयार नहीं था।
18 जून 2007 को बठिंडा की अदालत ने राजेन्द्र सिंह सिद्धू की याचिका पर डेरा प्रमुख के खिलाफ गैर जमानती वॉरंट जारी कर दिए। इसके बाद डेरा प्रेमियों ने पंजाब की बादल सरकार के खिलाफ जगह-जगह हिंसक प्रदर्शन किए।

6. पाबंदी के बावजूद नामचर्चा और फायरिंग

major disputes related to Dera Sacha Sauda
16 जुलाई 2007 को सिरसा के गांव घुक्कांवाली में प्रशासन की तरफ से रोक के बावजूद डेरा सच्चा सौदा ने नामचर्चा रखी। सिखों ने डेरा प्रमुख के काफिले को काले झंडे दिखाए। इस बात से दोनों पक्षों में पथराव हो गया। डेरा प्रमुख को नामचर्चा बीच छोड़कर जाना पड़ा।
इसके कुछ ही दिन बाद 24 जुलाई, 2007 को गांव मल्लेवाला में नामचर्चा में एक डेरा प्रेमी ने अपनी बंदूक से फायर कर दिया जिसमें तीन पुलिस कर्मियों समेत आठ लोग जख्मी हो गए।

7. जज को मिला धमकी भरा खत

31 जुलाई 2007 को सीबीआई ने हत्या मामलों और साध्वी यौन शोषण मामले में जांच पूरी कर न्यायालय में चालान दाखिल कर दिया। सीबीआई ने तीनों मामलों में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया। कोर्ट ने डेरा प्रमुख को 31 अगस्त तक अदालत में पेश होने के आदेश जारी कर दिया। इस बीच सीबीआई के विशेष जज को भी धमकी भरा लेटर मिला जिसके चलते उन्हें सुरक्षा मांगनी पड़ी।

8. डेरा के पूर्व मैनेजर की गुमशुदगी को लेकर आरोप

2010 में डेरा के पूर्व साधु राम कुमार बिश्नोई ने हाई कोर्ट में याचिका दायर करके डेरा के पूर्व मैनेजर फकीर चंद की गुमशुदगी की सीबीआई जांच की मांग की। बिश्नोई का आरोप था कि डेरा प्रमुख के आदेश पर फकीर चंद की हत्या कर दी गई है। इस मामले में भी उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश दिए। इसके बाद डेरा प्रेमियों ने हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में सरकारी सम्पति को नुकसान पहुंचाया और बसों में आगजनी की गई। हालांकि जांच के दौरान सीबीआई ने सबूत न जुटा पाने पर क्लोजर रिपोर्ट फाइल करदी। बिश्नोई ने उच्च न्यायालय में क्लोजर को चुनौती दी हुई है।

9. गुरुद्वारे पर धावा बोलने का आरोप

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दिसंबर 2012 में सिरसा में डेरा सच्चा सौदा की नामचर्चा को लेकर एक बार फिर सिख और डेरा समर्थक आमने-सामने आ गए। यहां डेरा प्रेमियों पर गुरुद्वारे पर धावा बोलने और सिखों के वाहनों को जलाने का आरोप लगा। हालात पर काबू पाने के लिए कर्फ्यू लगाना पड़ा था और डेरा प्रेमियों पर मामला दर्ज हुआ था।

10. डेरा के साधुओं को नपुंसक बनाने का आरोप

फतेहाबाद जिले के टोहाना में रहने वाले हंसराज चौहान ने 17 जुलाई 2012 को हाई कोर्ट में याचिका डालकर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख पर डेरा के 400 साधुओं को नपुंसक बनाए जाने के आरोप लगाया। चौहान ने कहा था कि छत्रपति हत्या प्रकरण के आरोपी निर्मल और कुलदीप भी डेरा सच्चा सौदा के नपुंसक साधु है। कोर्ट ने हत्या मामलों में जेल में बंद डेरा के साधुओं के पूछताछ के आदेश दिए। इसमें उन्होंने स्वीकार किया कि वे नपुंसक हैं मगर कहा कि वे अपनी मर्जी से बने हैं। यह मामला अदालत में विचाराधीन है।

11. हास्य अभिनेता किकू शारदा की गिरफ्तारी

13 जनवरी 2016 को हास्य अभिनेता किकू शारदा को गुरमीत राम रहीम सिंह की नकल उतारने के आरोप में हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। राम रहीम के समर्थकों ने किकू के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने का मामला दर्ज कराया था।
31 दिसंबर, 2015 को गुरमीत राम रहीम सिंह के कुछ समर्थकों ने यह मामला दर्ज कराया था। किकू ने अपने ट्वीट में इस नकल के लिए माफी भी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने यह नकल किसी दुर्भावना से नहीं की थी।
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