{"_id":"5995ecc04f1c1b8a2f8b45aa","slug":"father-sold-newborn-baby-in-deoria","type":"story","status":"publish","title_hn":"गरीबी में पिता ने बेच दिया जिगर का टुकड़ा, बाद में ऐसे मिला वापस ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
गरीबी में पिता ने बेच दिया जिगर का टुकड़ा, बाद में ऐसे मिला वापस
amarujala.com, Presented by: शाहरुख खान
Updated Fri, 18 Aug 2017 12:51 AM IST
विज्ञापन
फाइल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवरिया। क्या पता कि इतना बुरा दौर भी आएगा, भूख मिटाने के लिए जिगर का टुकड़ा बिक जाएगा... यह लाइन जन्म लेते गैरों के हाथ बिकने वाले नवजात पर सटीक बैठ रही है। चंद रुपयों के लिए आशा बहू के झांसे में आकर एक पिता ने ऐसा काम किया है। लेकिन मां के ममता की जीत हुई और गांववालों की मदद से बच्चा वापस मिला।
खुखुंदू के धनौती गांव निवासी अजय प्रसाद की पत्नी इंद्रावती देवी को 10 अगस्त को घर पर एक बेटे को जन्म दिया। गांव की आशा बहू उर्मिला और अजय जच्चा-बच्चा को बीमार बताते हुए सलेमपुर सीएचसी में लेकर चले गए। नवजात को भाटपाररानी के बेलपार निवासी रिंकू देवी को दस हजार में बेच दिया।
अस्पताल में भर्ती बीमार मां से आशा बहू और पति ने बच्चे को आईसीयू में होने की बात कही। चार दिन पूर्व महिला अस्पताल से घर आई तो बच्चे के बारे में पूछी। पति ने बच्चे की मौत हो जाने की बात कही। लेकिन इंद्रावती को विश्वास नहीं हुआ।
विज्ञापन
तीन माह पूर्व गरीबी से परेशान अजय को आशा बहू उर्मिला अपनी झांसे में लेकर गर्भ में ही बच्चे की कीमत लगा दी थी। दस हजार में पति को सिर्फ पांच हजार रुपये मिले। यह बात गांव में फैली तो प्रधान राकेश सिंह सक्रिय हुए और लोगों की मदद से रिंकू के घर पहुंचे। पंचायत के बाद गुरुवार को इंद्रावती का बेटा मिला।
प्रधान राकेश सिंह ने बताया कि गरीबी से तंग आकर पति ने ऐसा किया था। इसका यह तीसरा बेटा था।
विज्ञापन
खुखुंदू के धनौती गांव निवासी अजय प्रसाद की पत्नी इंद्रावती देवी को 10 अगस्त को घर पर एक बेटे को जन्म दिया। गांव की आशा बहू उर्मिला और अजय जच्चा-बच्चा को बीमार बताते हुए सलेमपुर सीएचसी में लेकर चले गए। नवजात को भाटपाररानी के बेलपार निवासी रिंकू देवी को दस हजार में बेच दिया।
विज्ञापन
अस्पताल में भर्ती बीमार मां से आशा बहू और पति ने बच्चे को आईसीयू में होने की बात कही। चार दिन पूर्व महिला अस्पताल से घर आई तो बच्चे के बारे में पूछी। पति ने बच्चे की मौत हो जाने की बात कही। लेकिन इंद्रावती को विश्वास नहीं हुआ।
विज्ञापन
तीन माह पूर्व गरीबी से परेशान अजय को आशा बहू उर्मिला अपनी झांसे में लेकर गर्भ में ही बच्चे की कीमत लगा दी थी। दस हजार में पति को सिर्फ पांच हजार रुपये मिले। यह बात गांव में फैली तो प्रधान राकेश सिंह सक्रिय हुए और लोगों की मदद से रिंकू के घर पहुंचे। पंचायत के बाद गुरुवार को इंद्रावती का बेटा मिला।
प्रधान राकेश सिंह ने बताया कि गरीबी से तंग आकर पति ने ऐसा किया था। इसका यह तीसरा बेटा था।