10 साल की रेप पीड़िता ने जन्मी बेटी, आरोपी चाचा से मैच नहीं बच्ची का DNA
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भारत में पुलिस ने एक 10 साल की बलात्कार पीड़ित लड़की के मामले की जांच फिर शुरू की है। दरअसल इस मामले में 10 वर्षीय लड़की की बेटी का डीएनए आरोपी चाचा से नहीं मिला है। चाचा पर ही बच्ची से बलात्कार करने का आरोप है जिससे वो गर्भवती हुई।
10 वर्षीय बलात्कार पीड़ित लड़की ने सुप्रीम कोर्ट से गर्भ गिराने की अनुमति नहीं मिलने के बाद अगस्त में एक बच्चे को जन्म दिया। 10 वर्षीय पीड़ित लड़की को गर्भवती होने का पता नहीं था। उसे बताया गया कि पत्थर की वजह से उसका पेट निकला हुआ है।
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लड़की ने आरोप लगाया था कि पिछले सात महीनों के दौरान उसके चाचा ने उससे कई बार बलात्कार किया। चाचा को गिरफ़्तार कर लिया गया और स्पेशल कोर्ट में उन पर मुकदमा चला। जेल में बंद चाचा ने अब तक कोई बयान नहीं दिया है। डीएनए टेस्ट के नतीजों के बाद अब सवाल है कि क्या लड़की के साथ किसी और ने बलात्कार किया था। रिपोर्ट के मुताबिक लड़की के पिता ने पहले बीबीसी से कहा था कि अभियुक्त ने उनके खिलाफ लगे आरोपों से इंकार नहीं किया है। जबकि पुलिस का कहना था कि आरोपी ने अपने अपराध स्वीकार लिया है।
जांच में शामिल एक अधिकारी ने बुधवार को बीबीसी को बताया, "अभी तक किसी अन्य संभावना के बारे में नहीं सोचा गया था। लड़की ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए अदालत में गवाही दी थी जिसमें उसने स्पष्ट रूप से चाचा पर आरोप लगाया और उसके साथ हुई ज्यादतियों के तथ्यों की भी जानकारी दी।" अधिकारी ने कहा, "लड़की की मां के उस बयान के बाद कि उन्हें और किसी पर संदेह नहीं है, इस मामले ने बहुत अजीब मोड़ ले लिया है।"
मंगलवार को पुलिस और सलाहकारों ने एक बार फिर लड़की के परिवार वालों से बातचीत की। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बीबीसी पंजाबी को बताया कि वो फ़ॉरेंसिक जांच की दोबारा पड़ताल करेंगे जिससे डीएनए सैंपल में कोई खामी नहीं, इसका पता लगाया जा सके।
जानें क्या है पूरा मामला?
10 वर्षीय लड़की गर्भवती है इसका पता जुलाई में चला था जब उसने पेट में दर्द की शिकायत की और उसके माता-पिता उसे अस्पताल ले गए। तब बच्ची करीब 23 सप्ताह की गर्भवती थी। डॉक्टरों के गर्भ गिराने से इंकार करने के बाद चंडीगढ़ की एक अदालत से गुहार की गई। डॉक्टरों से सलाह के बाद कोर्ट ने भी इसकी इजाजत नहीं दी। लड़की ने जुलाई में बच्चे को जन्म दिया। लड़की के मां-बाप के उस बच्चे को रखने से मना करने के बाद नवजात को शिशु कल्याण केंद्र में रखा गया है। इतनी कम उम्र में मां बनने का यह ऐतिहासिक मामला दुनिया भर में सुर्खियां में रहा।
कानून क्या कहता है?
भारतीय कानून के मुताबिक 20 सप्ताह से अधिक के गर्भ को गिराने की इजाजत नहीं है क्योंकि मेडिकल साइंस के मुताबिक इससे मां की जान को खतरा रहता है। लेकिन हाल के वर्षों में अदालतों में कई ऐसी याचिकाएं आई हैं। इनमें से कई बलात्कार के मामले हैं। ये मामले सामने आने में इतना समय लगने के पीछे कारण लड़कियों के कम उम्र का होना है जिन्हें इस स्थिति की पहले से कोई जानकारी नहीं होती।
बीते शुक्रवार को ही एक 32 हफ़्तों की गर्भवती 13 वर्षीय लड़की ने एक बच्चे को जन्म दिया. इस मामले में भी कोर्ट से उसे गर्भ गिराने की इजाजत नहीं मिली थी। नवजात की दो दिनों बाद ही मौत हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक, "मई में, इसी तरह का एक मामला हरियाणा में भी आया जहां एक पिता ने अपनी सौतेली बेटी से बलात्कार किया था। हालांकि इस मामले में लड़की 20 हफ़्ते की गर्भवती थी और अदालत ने उसे गर्भ गिराने की इजाजत दे दी।"
कानून के तहत भारत में किसी भी बलात्कार पीड़ित लड़की का नाम नहीं लिया जा सकता। भारत में बलात्कार के आंकड़े प्रत्येक 155 मिनट पर 16 साल से कम उम्र की लड़की और प्रत्येक 13 घंटे में 10 साल से कम उम्र की लड़की से होता है बलात्कार। 2015 में दस हज़ार से अधिक बच्चियों से बलात्कार का मामला सामने आया। भारत में 18 साल से कम उम्र की करीब 2.4 करोड़ महिलाएं विवाहित हैं। एक सरकारी शोध में शामिल की गई करीब 53.22 फीसदी बच्चियों के साथ किसी न किसी प्रकार के यौन उत्पीड़न पता चला।
50 फीसदी शिकार लड़कियां यौन उत्पीड़न करने वाले को पहले से जानती थीं या उन्हीं के संरक्षण में थीं।