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Bihar Politics: भाजपा ने मनाया विश्वासघात दिवस, आज जिला-प्रखंड दफ्तरों पर देगी धरना

एजेंसी, पटना। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 11 Aug 2022 05:42 AM IST
सार

अनुभवी नेताओं को दरकिनार कर अनुभवहीन नेताओं की टीम तैयार करना भाजपा और जदयू में अलगाव का कारण बना। दोनों दलों के नेताओं का मानना है कि नीतीश सरकार में भाजपा की नई टीम में न सिर्फ अनुभव की कमी थी, बल्कि उनका पार्टी और विधायकों पर नियंत्रण नहीं था। इसके कारण बनी संवादहीनता ने गठबंधन की बलि ले ली।

सत्ता से सड़क पर: नीतीश और राजद के गठजोड़ के खिलाफ धरना देते भाजपा नेता।
सत्ता से सड़क पर: नीतीश और राजद के गठजोड़ के खिलाफ धरना देते भाजपा नेता। - फोटो : [email protected]
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विस्तार

नीतीश कुमार के अचानक राजग छोड़कर महागठबंधन का हिस्सा बनने के खिलाफ भाजपा पूरे बिहार में विश्वासघात दिवस मना रही है। पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और राधामोहन सिंह, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय समेत तमाम भाजपा नेताओं ने बुधवार को पटना स्थिति भाजपा कार्यालय के बाहर धरना दिया। पार्टी ने बृहस्पतिवार को भी सभी जिला और प्रखंड कार्यालयों पर धरना देने का एलान किया है। 



भाजपा शपथ से रही दूर कहा-हमें नहीं बुलाया
कोई भी भाजपा नेता महागठबंधन सरकार के शपथ समारोह में शामिल नहीं हुआ। एक भाजपा नेता ने बताया कि उन्हें न्योता ही नहीं दिया गया तो कैसे जाते।

अनुभवहीन नेताओं से बढ़ी खाई
अनुभवी नेताओं को दरकिनार कर अनुभवहीन नेताओं की टीम तैयार करना भाजपा और जदयू में अलगाव का कारण बना। दोनों दलों के नेताओं का मानना है कि नीतीश सरकार में भाजपा की नई टीम में न सिर्फ अनुभव की कमी थी, बल्कि उनका पार्टी और विधायकों पर नियंत्रण नहीं था। इसके कारण बनी संवादहीनता ने गठबंधन की बलि ले ली।


साल 2005 से ले कर 2020 तक, भाजपा ने जदयू के साथ तीन बार सरकार बनाई। तीनों ही बार सरकार में सुशील मोदी, नंदकिशोर यादव, प्रेम कुमार जैसे अनुभवी और वरिष्ठ नेता को तरजीह दी गई। इनके रिश्ते भी नीतीश से बेहतर थे। हालांकि 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी ने नया नेतृत्व उभारने की कवायद की तहत इन नेताओं की अनदेखी कर दी। सुशील मोदी की जगह तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी जैसे अनुभवहीन चेहरों को डिप्टी सीएम बनाया गया। मोदी राज्यसभा भेज दिए गए तो प्रेम कुमार और नंदकिशोर को तरजीह नहीं दी गई। भाजपा के मंत्रियों में से एक का भी कद नीतीश से साहस के साथ बात करने या अपने विधायकों पर नियंत्रण रखने लायक नहीं था। नतीजे में भाजपा विधायकों ने नीतीश पर सीधा हमला करना शुरू कर दिया।

दिखा समन्वय का अभाव
संवादहीनता का आलम यह था कि विधानसभा में ही मुख्यमंत्री और स्पीकर के बीच टकराव हुआ। स्पीकर बार-बार खराब कानून व्यवस्था का हवाला दे कर सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साधते रहे।

भाजपा की कमजोर रणनीति
सरकार बनने के बावजूद विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान की निभाई भूमिका के कारण नीतीश नाराज थे। बाद में जदयू ने आरसीपी सिंह के जरिये पार्टी में टूट कराने के आरोप मढ़े। जाहिर तौर पर नौकरशाह से राजनेता बने आरसीपी का जदयू में अपना कोई वजूद नहीं था। जब इस मुद्दे पर मतभेद बढ़ा तब भी इसे पाटने वाला कोई मजबूत चेहरा भाजपा के पास नहीं था।

लालू परिवार का दबदबा
लालू परिवार का असर शपथ में भी साफ नजर आया। अगली पंक्ति में राबड़ी देवी के साथ तेजस्वी की पत्नी राजश्री और भाई तेज प्रताप बैठे थे। राजश्री के बगल वाली सीट पर तेजस्वी बैठे थे।
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युवाओं के लिए एक महीने में रिकॉर्ड रोजगार
उपमुख्यमंत्री तेजस्वी ने शपथ के बाद कहा कि वह बिहार में 10 लाख नौकरियां देने के वादे को पूरा करेंगे। एक महीने में युवाओं के लिए रिकॉर्ड नौकरियां निकलेंगी। बुधवार को शपथ से पूर्व नीतीश ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से बात की। लालू की बेटी मीसा भारती ने कहा कि लालू ने नीतीश को शुभकामनाएं दीं।

भाजपा सहयोगियों के लिए भी है खतरा
नीतीश का फैसला सही है। भाजपा क्षेत्रीय दलों को खत्म करना चाहती है। भाजपा चुनाव के आसपास ही हाथ मिलाती है और तय करती है कि सहयोगी दल कम सीटें ही जीते। महाराष्ट्र में भी ऐसा ही हुआ था।  -शरद पवार, अध्यक्ष, एनसीपी

ममता-नीतीश ही लेंगे भाजपा से टक्कर
भाजपा से टक्कर लेने वालों में ममता बनर्जी और नीतीश सबसे आगे हैं। अगले चुनाव में दोनों विपक्ष का नेतृत्व कर भाजपा को कड़ी टक्कर देंगे और मोदी राज को खत्म करेंगे।
-शत्रुघ्न सिन्हा, तृणमूल सांसद

धोखा देकर बनी यह सरकार
यह सरकार बिहार की जनता को धोखा देकर बनी है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान कर बनी है जो जदयू के खराब प्रदर्शन के बावजूद नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में एक और कार्यकाल देने के वादे पर कायम रहे। -सुशील मोदी, भाजपा सांसद

लाेकतांत्रिक ताकतें होंगी मजबूत
नीतीश की महागठबंधन में वापसी से धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ताकतें मजबूत होंगी। -एमके स्टालिन, सीएम, तमिलनाडु

भाजपा से असहज थे  
नीतीश भाजपा के साथ असहज थे और इसी कारण वे एक गठबंधन से दूसरे में चले गए। बिहार में बदलते सियासी समीकरण का प्रभाव फिलहाल प्रदेश तक ही सीमित रहेगा। अल्पावधि में राष्ट्रीय स्तर पर इसके प्रभाव की संभावना नहीं है। -प्रशांत किशोर, चुनावी रणनीतिकार

सब कुछ चमत्कारिक
कोई पैसा नहीं पकड़ा गया, कोई ईडी का छापा नहीं, असम के सीएम नहीं, रिसॉर्ट की यात्रा नहीं। सत्ता परिवर्तन चमत्कारिक, सभ्य और कम खर्च से हुआ। मुख्यमंत्री को सबसे बड़ी पार्टी और दूसरों का समर्थन मिला। महाराष्ट्र में भाजपा ने दल-बदल कराया। बिहार में भाजपा खारिज और बाहर हो गई। -जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव

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