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भाजपा ने गहलोत के खिलाफ खोला मोर्चा, कहा- महिलाओं के खिलाफ अपराध का गढ़ बना राजस्थान
Thu, 08 Oct 2020 12:03 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 08 Oct 2020 12:03 PM IST
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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
- फोटो : For Reference Only
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अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार के शासन के दौरान राजस्थान में महिलाओं और दलितों के खिलाफ अपराध अप्रत्याशित रूप से बढ़ने का आरोप लगाते हुए, भाजपा ने राज्य में एक नई नीति बनाने की मांग की है जिसमें मुआवजे के रूप में 10 लाख रुपये और बलात्कार पीड़ितों के लिए एक सरकारी नौकरी शामिल है।
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विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया के नेतृत्व में भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राज्यपाल कलराज मिश्रा से मुलाकात की और राज्य सरकार को बलात्कार पीड़ितों के पुनर्वास के लिए एक नई नीति तैयार करने के निर्देश देने का आग्रह किया, साथ ही महिलाओं और दलितों के खिलाफ गंभीर अपराधों की समयबद्ध जांच और ऐसे मामलों की प्रभावी निगरानी की भी मांग की।
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मिश्रा को सौंपे गए ज्ञापन में, भाजपा ने आरोप लगाया कि पिछले 20 महीनों में, जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार कार्यालय में रही है, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और आम लोगों के खिलाफ अपराध में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
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राजस्थान में दिसंबर 2018 से अगस्त 2020 तक कुल 4.35 लाख मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें बलात्कार, छेड़छाड़ जैसे 11,200 मामले शामिल हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के 2019 के आंकड़ों से पता चलता है कि देश में अपराध के कुल मामलों में 7 फीसदी राजस्थान से हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध में राज्य दूसरे स्थान पर है। 2018 की तुलना में 2019 में अपराध में 49.10 फीसदी की वृद्धि हुई है।
“राज्य बलात्कार से संबंधित अपराधों में पहले स्थान पर है, क्योंकि देश का 18.72 फीसदी अपराध यहां होता है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। यह शर्मनाक है कि 12 वर्ष से ऊपर और 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ बलात्कार के मामलों में राज्य शीर्ष पर है। राजस्थान देश में दलितों के खिलाफ अपराधों के कुल मामलों में 14.81 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पर है।"
राज्यपाल को ज्ञापन देने पहुंचे कटारिया के साथ विपक्ष के नेता राजेंद्र राठौड़, राज्य भाजपा प्रमुख सतीश पूनिया और अन्य लोग थे।
प्रतिनिधिमंडल ने अपनी बात का समर्थन करने के लिए बांसवाड़ा, सिरोही, भरतपुर, धौलपुर आदि में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की हाल की घटनाओं का उल्लेख किया।
कटारिया ने कहा, "मुख्यमंत्री गृह मंत्री भी हैं, लेकिन ऐसी घटनाओं पर चुप हैं। राज्य ऐसे मामलों से शर्मिंदा है और लोग भय में जी रहे हैं। कांग्रेस को सरकार में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।"
उन्होंने कहा कि महिला आयोग और एससी आयोग जैसी संस्थाएं, जिनके पास शक्तियां हैं, खाली पड़ी हैं।
कांग्रेस नेता अर्चना शर्मा ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि भाजपा देश भर में अपनी नाकामी को छिपाने के लिए आधारहीन आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनता, विशेषकर महिलाओं और दलितों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।