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चुनावी वादों के शोर में गुम हो गया प्रदूषण का मुद्दा, सभी दलों के घोषणापत्र मौन  

Tue, 13 Nov 2018 03:13 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 13 Nov 2018 03:13 PM IST
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Assembly elections 2018: All parties are silent over the issue of pollution
BJP- Congress
देश में इन दिनों पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों का शोर है। प्रचार चरम पर है और नेताओं के बड़े-बड़े वादों का दौर जारी है। तमाम पार्टियों ने इस बार वादों का पिटारा तो खोला है लेकिन घोषणापत्र का नाम ही बदल दिया। छत्तीसगढ़ में भाजपा ने इसे संकल्प पत्र का नाम दिया है तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने इसे वचन पत्र का नाम दिया है। वहीं, अजीत जोगी की जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने इसे शपथ पत्र कहा है। हर किसी ने बढ़-चढ़कर वादे किए हैं, लेकिन प्रदूषण की समस्या का कहीं जिक्र नहीं है। 
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अमूमन इन घोषणा पत्रों में वही पुराने वादे दोहराए गए हैं और जनता को नए-नए सपने दिखाए गए हैं। इनमें किए गए वादे और दावे को हर रैली और जनसभाओं में दोहराया जा रहा है। लेकिन कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिनका जिक्र राजनीतिक दलों ने करना जरूरी नहीं समझा है। ऐसा ही एक बहुत जरूरी मुद्दा है प्रदूषण का जो इन दिनों शहर-शहर, गांव-गांव के लिए चिंता का सबब बन गया है।  
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बहरहाल, मुद्दे की बात यह है कि हमेशा की तरह इस बार भी राजनीतिक दलों ने प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे को छोड़ दिया है। स्वास्थ्य सुविधाओं का घोषणा पत्रों में जिक्र जरूर है, लेकिन जानलेवा प्रदूषण पर किसी का ध्यान नहीं गया। इसे लेकर नेताओं की सोच कितनी अगंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि पटाखे चलाने पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को भी ठेंगा दिखाने का प्रयास हुआ। 
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प्रदूषण ने दिल्ली-एनसीआर में कैसे हालात पैदा किए हैं ये किसी से छिपा नहीं है। पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने का सीधा असर दिल्ली-एनसीआर में दिख रहा है। सुबह की शुरुआत ही धुंध से हो रही है और दिन खत्म होने तक माहौल दमघोंटू बना रहता है। इससे हर उम्र के लोगों खासकर बच्चों के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट को तक इसमें दखल देना पड़ा। बावजूद इसके हालात बहुत नहीं सुधरे हैं। कोर्ट के आदेश का माननीयों ने ही सम्मान नहीं किया। 

 

कोर्ट का फैसला आने के बाद उज्जैन से बीजेपी सांसद चिंतामणि मालवीय ने कहा- मैं दिवाली अपने परंपरागत तरीके से ही मनाऊंगा। रात को लक्ष्मी पूजन करके 10 बजे के बाद ही पटाखे चलाऊंगा। हमारी हिंदू परंपरा में मैं किसी की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं कर सकता। बकायदा उन्होंने ट्वीट कर इस तरह का बयान जारी किया था। 

भाजपा के संकल्प पत्र में किसानों, गरीबों के हालात बदलने की बात कही गई है। गरीबों को 2022 तक घर देने का वादा है, किसानों को कर्ज माफी का वादा है, लेकिन दिन ब दिन फिजां में घुलते जहर से निपटने की कोई बात इसमें नहीं कही गई है। 

वहीं, कांग्रेस और दूसरे दल भी इस मुद्दे को भूल गए हैं। कांग्रेस ने किसानों का बिजली बिल आधा करने और कर्जा पूरा माफ करने का वादा किया, हर परिवार को बेरोजगार युवा को 10 हजार रुपये प्रतिमाह देने और पेंशन राशि 300 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये करने का वादा किया है, लेकिन बढ़ते प्रदूषण और इससे निपटने का जिक्र नहीं है। 

बच्चों को खतरा 

प्रदूषण से सबसे बड़ा खतरा बच्चों को है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक,  भारत में हर साल वायु प्रदूषण की वजह से 20 लाख से ज्यादा बच्चों की भ्रूण में ही मौत हो जाती है। 2016 में ही भारत में करीब एक लाख बच्चों  की मौत वायु प्रदूषण से हुई। दुनिया में पांच साल तक के बच्चों की मौत का ये सबसे बड़ा आंकड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक पांच साल से कम के 60,987 बच्चों की मौत प्रदूषण का स्तर पीएम 2.5 पहुंचने के कारण हुई।  

 
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