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तीन करोड़ वाले टेबल के चक्कर में फंसा AIIMS, प्रधानमंत्री मोदी से शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Tue, 23 Jan 2018 02:08 AM IST
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देश का सबसे बड़ा चिकित्सीय संस्थान एम्स अब शवगृह में रखे जाने वाले टेबल के चक्कर में फंसा है। आमतौर पर करीब दो करोड़ की कीमत वाले इस टेबल के लिए हाल ही में एम्स प्रशासन ने निविदा जारी की है। आरोप है कि निविदा में दी गई शर्तों को केवल यूके की कंपनी ही पूरा कर सकती है। इस कंपनी ने टेबल की कीमत तीन करोड़ रुपये तय की है।
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विदेशी कंपनी से शवगृह में रखने वाले टेबल खरीदने का मामला
प्रबंधन पर स्वदेशी कंपनियों को ठुकराकर एक करोड़ का लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से शिकायत की गई है। इस पर एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि सब कुछ नियमों के तहत ही होगा। यदि इसमें किसी प्रकार की तकनीकी कमी है, तो उसकी समीक्षा करेंगे। यदि अनियमितता पाई गई तो निविदा भी रद्द कर सकते हैं।
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प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से की शिकायत
दरअसल, वर्ष 2016 में 29 अगस्त को एम्स ने पोस्टमार्टम के लिए जरूरी दो ऑटोप्सी टेबल के लिए एक निविदा निकाली थी। इसमें कई स्वदेशी कंपनियों ने आवेदन दिया था, लेकिन दोनों टेबल की करीब डेढ़ करोड़ कीमत लगाने वाली तीन कंपनियों का चयन तो किया, मगर इसके बाद प्रक्रिया को रोक दिया। महीनों गुजरने के बाद 21 दिसंबर, 2017 को फिर से नए नियमों के साथ निविदा जारी की गई। जैसा कि शिकायत में कहा गया है कि नई निविदा में इस तरह की शर्तें शामिल की गईं, जोकि दुनिया में केवल यूके की कंपनी ही पूरा कर सकती है। इस कंपनी ने टेबल की कीमत तीन करोड़ रुपये तय की है।
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पहले भी सुर्खियों में रहा
बताया जा रहा है कि एम्स इससे पहले भी चिकित्सीय उपकरणों और दवाओं की खरीद को लेकर सुर्खियों में रहा है। इन मामलों में सीबीआई की जांच के घेरे में कई अधिकारी भी हैं। सूत्रों की मानें तो एम्स ने इस मामले में फोरेंसिक विशेषज्ञों की सलाह भी नहीं ली है। अब कहा जा रहा है कि यदि एम्स प्रशासन निविदा रद्द नहीं करेगा, तो इस मामले में कई अधिकारी शक के घेरे में आ सकते हैं।