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RSS: जनगणना में धार्मिक डाटा संग्रह के तरीके पर संघ सहमत; समन्वय समिति की बैठक में जनसांख्यिकी बदलाव पर मंथन
Fri, 21 Aug 2026 05:40 AM IST
Pavan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Fri, 21 Aug 2026 05:40 AM IST
सार
संघ की समन्वय बैठक में जनसांख्यिकी बदलाव और जनसंख्या असंतुलन पर चर्चा हुई। बैठक में जनगणना के दौरान धर्म के साथ माता-पिता के धर्म और जन्मस्थान की जानकारी जुटाने के नए तरीके का समर्थन किया गया। नशामुक्ति, युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने और संघ प्रमुख के अमेरिका-यूरोप दौरे पर भी मंथन हुआ। यूएससीआईआरएफ की मांग पर संघ की प्रतिक्रिया को लेकर सहमति नहीं बन सकी।
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मोहन भागवत, आरएसएस प्रमुख
- फोटो : IANS
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विस्तार
विशाखपत्तनम में बुधवार से शुरू हुई संघ की तीन दिवसीय समन्वय बैठक के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को जनसांख्यिकी बदलाव और जनसंख्या असंतुलन पर मैराथन मंथन हुआ। इस दौरान अनुषांगिक संगठनों ने इसके कारण बढ़ी चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा किए और जनगणना में धार्मिक आंकड़ा जुटाने के नए तरीके का समर्थन किया गया।
यह भी पढ़ें- पूर्वी सीमा पर केंद्र की पैनी नजर: एक महीने में दूसरी बार उत्तर बंगाल पहुंचे अमित शाह, क्या है सुरक्षा एजेंडा?
इस बैठक में संघ प्रमुख के अमेरिका दौरे के खिलाफ अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) के रुख पर भी चर्चा हुई। हालांकि इस मामले में प्रतिक्रिया देने पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई। संघ सूत्रों के मुताबिक जनसांख्यिकी बदलाव और जनसंख्या असंतुलन के दौरान सरकार के धर्म का आंकड़ा जुटाने के लिए नए तरीके अपनाने का समर्थन किया गया। गौरतलब है कि देश में पहली बार धार्मिक आंकड़ा जुटाते समय संबंधित व्यक्ति को अपने धर्म के साथ माता-पिता का धर्म के साथ उनके जन्मस्थान की भी जानकारी देनी होगी। संघ का मानना है कि पहले इस प्रक्रिया का पालन न होने के कारण देश में धर्मांतरण और जनसांख्यिकी बदलाव की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आती थी।
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नशा, युवा, पंच परिवर्तन पर मंथन
इस बैठक के पहले दिन अनुषांगिक संगठनों के वार्षिक कार्यों की समीक्षा की गई। इसके बाद देश को नशामुक्त करने और युवाओं को राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति से जोड़े रखने केलिए अभियान चलाने पर चर्चा हुई। इस दौरान खासतौर पर सभी अनुषांगिक संगठनों को युवाओं के लगातार संपर्क में रहने के लिए उपाय तलाशने के निर्देश दिए गए।
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यूएससीआईआरएफ की मांग पर भी चर्चा
अंतिम सत्र में संघ प्रमुख की 25 अगस्त से शुरू हो रही अमेरिका व यूरोप यात्रा पर भी मंथन हुआ। खासतौर से यूएससीआईआरएफ की संघ पर प्रतिबंध लगाने और इस यात्रा पर रोक लगाने संबंधी मांग पर विमर्श हुआ। हालांकि बैठक में इस बात पर सहमति नहीं बन पाई कि संगठन इस पर प्रतिक्रिया दे या नहीं। पार्टी अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद नितिन नवीन पहली बार इस बैठक में शामिल हुए थे। सूत्रों के मुताबिक बैठक में संघ की ओर से भाजपा को प्रचारक उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई।
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इस बैठक में संघ प्रमुख के अमेरिका दौरे के खिलाफ अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) के रुख पर भी चर्चा हुई। हालांकि इस मामले में प्रतिक्रिया देने पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई। संघ सूत्रों के मुताबिक जनसांख्यिकी बदलाव और जनसंख्या असंतुलन के दौरान सरकार के धर्म का आंकड़ा जुटाने के लिए नए तरीके अपनाने का समर्थन किया गया। गौरतलब है कि देश में पहली बार धार्मिक आंकड़ा जुटाते समय संबंधित व्यक्ति को अपने धर्म के साथ माता-पिता का धर्म के साथ उनके जन्मस्थान की भी जानकारी देनी होगी। संघ का मानना है कि पहले इस प्रक्रिया का पालन न होने के कारण देश में धर्मांतरण और जनसांख्यिकी बदलाव की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आती थी।
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नशा, युवा, पंच परिवर्तन पर मंथन
इस बैठक के पहले दिन अनुषांगिक संगठनों के वार्षिक कार्यों की समीक्षा की गई। इसके बाद देश को नशामुक्त करने और युवाओं को राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति से जोड़े रखने केलिए अभियान चलाने पर चर्चा हुई। इस दौरान खासतौर पर सभी अनुषांगिक संगठनों को युवाओं के लगातार संपर्क में रहने के लिए उपाय तलाशने के निर्देश दिए गए।
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यूएससीआईआरएफ की मांग पर भी चर्चा
अंतिम सत्र में संघ प्रमुख की 25 अगस्त से शुरू हो रही अमेरिका व यूरोप यात्रा पर भी मंथन हुआ। खासतौर से यूएससीआईआरएफ की संघ पर प्रतिबंध लगाने और इस यात्रा पर रोक लगाने संबंधी मांग पर विमर्श हुआ। हालांकि बैठक में इस बात पर सहमति नहीं बन पाई कि संगठन इस पर प्रतिक्रिया दे या नहीं। पार्टी अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद नितिन नवीन पहली बार इस बैठक में शामिल हुए थे। सूत्रों के मुताबिक बैठक में संघ की ओर से भाजपा को प्रचारक उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई।