सरकारी SC/ST कर्मचारियों को निकालेगी महाराष्ट्र सरकार, जानें क्या है वजह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Updated Sun, 04 Feb 2018 08:50 AM IST
on implementing the order of supreme court Maharashtra government can sack 11,700 people
देवेंद्र फणनवीस
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को आदेश दिया है कि वह फर्जी अनुसूचित जाती और जनजाति प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले लोगों को नौकरी से निकाल दे। यह आदेश मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस की सरकार के गले की फांस बन गया है क्योंकि 11,700 लोगों ने फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल की है। इसमें कुछ लोग ऐसे हैं जो पिछले दो दशकों से काम कर रहे हैं। इसी वजह से सरकार को समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करे।
यह बात सभी को ज्ञात है कि सरकारी नौकरियों के लिए अमूमन धोखाधड़ी की जाती है। महाराष्ट्र में सामने आई यह जालसाजी अधिकारियों के लिए आंखे खोलने वाली है। इतनी बड़ी संख्या होने की वजह से इस धोखधड़ी ने सरकार के सामने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अमल में लाने के लिए दुविधा खड़ी कर दी है। सरकार खुद को कर्मचारियों के गुस्से से बचाना चाहती है। अगर उसने इतने सारे लोगों को एकसाथ निकाला तो यह एकबार में इतने सारे सरकारी कर्मचारियों को निकालने का सबसे बड़ा मामला होगा।

फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले ज्यादातर कर्मचारियों ने खुद को अनुसूचित जनजाति का बताया है। क्लर्क से नौकरी की शुरुआत करने वाले बहुत से लोग अब सरकार में डिप्टी सचिव के पद तक पहुंच चुके हैं। यदि यह लोग अपनी सुरक्षित नौकरियों से हाथ धोते हैं तो राजनीतिक दलों और यूनियन के खिलाफ रैली निकालेंगे। जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जो कोई भी फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए नौकरी पाने के दोषी पाए जाएंगे उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।

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