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कांग्रेस ने दिया था विधान परिषद का ऑफर, लेकिन मैं तैयार नहीं हुआ: एकनाथ खडसे

Tue, 12 May 2020 08:16 PM IST
Harendra Chaudhary अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 12 May 2020 08:16 PM IST
सार

  • खडसे का दावा, समर्थन में क्रास वोटिंग के लिए तैयार थे भाजपा के कई विधायक
  • देवेंद्र फडणवीस को फोन किया था, लेकिन वह फोन पर नहीं आए
  • बोले, वायरस का प्रकोप खत्म होने के बाद अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में निर्णय लूंगा

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maharashtra BJP leader Eknath Khadse claimed, Congress had offered him Legislative Council, but he rejected
एकनाथ खडसे - फोटो : ANI (File)

विस्तार

विधानपरिषद की उम्मीदवारी नहीं मिलने से नाराज भाजपा के वरिष्ठ नेता एकनाथ खडसे ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव से पहले कांग्रेस ने उनसे संपर्क किया था और विधान परिषद की उम्मीदवारी भी देने का ऑफर दिया था, लेकिन मैं तैयार नहीं हुआ।

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खडसे ने यह भी कहा कि भाजपा के कई विधायक भी हमारे के लिए क्रॉस वोटिंग करने के लिए तैयार थे। एकनाथ खडसे ने कहा कि पिछले पांच साल में पार्टी ने ऐसे लोगों को विधानपरिषद भेजा, जिनको कोई पहचानता नहीं है।
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पार्टी के कर्मठ सिपाही माधव भंडारी, गणेश हाके, नीता केलकर, रघुनाथ कुलकर्णी जैसे नेताओं को विधानपरिषद की उम्मीदवारी दी जाती तो बेहतर होता। लेकिन पार्टी ने निष्ठावान कार्यकर्ताओं की बजाय गोपीचद पडलकर जैसों को उम्मीदवारी दी। जिन्होंने लोकसभा चुनाव में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को गाली दी थी और मोदी गो बैक का नारा लगाया था।
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खडसे ने कहा कि विधानपरिषद का टिकट ऐसे लोगों को देने के बारे में मैंने विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस को फोन किया था, लेकिन वह फोन पर नहीं आए। खडसे ने कहा कि इस मुद्दे पर मैं पार्टी नेतृत्व से भी मिलूंगा।

पहले से तय थे उम्मीदवार

खडसे ने कहा कि पार्टी ने जिन चारों उम्मीदवारों को प्रत्याशी घोषित किया है उनके हलफनामे में पता चलता है कि पार्टी ने 12 से 20 मार्च के बीच इन्हें एनओसी दी है। इसका मतलब है कि प्रत्याशी पहले से तय था। ऐसे मे फिर राज्य संसदीय बोर्ड को इच्छुक उम्मीदवारों के नाम दिल्ली भेजने की क्या जरूरत थी।

कोरोना प्रकोप के बाद फैसला

विधानपरिषद की उम्मीदवारी नहीं मिलने से नाराज खडसे ने कहा कि राज्य की कार्यकारी समिति हमारे पक्ष में थी, इसलिए मैं विधान परिषद के लिए इच्छुक था। पार्टी ने (टिकट के लिए) मेरी अर्जी ठुकराकर मेरे साथ अन्याय किया है।

कोरोना वायरस का प्रकोप खत्म होने के बाद अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में निर्णय लूंगा। फिलहाल, यह वक्त निर्णय लेने का नहीं है।

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