CoronaVirus: मुंबई में लॉकडाउन से ढाई गुना बढ़ी रसोई गैस की खपत
- कर्मचारियों की कमी के चलते डिलीवरी में परेशानी
- गैस एजेंसी कर्मचारियों को पहचान पत्र जारी करने पर विचार
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कोरोना वायरस संकट के चलते लॉकडाउन की घोषणा के बाद देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में रोजमर्रा की चीजों के साथ-साथ रसोई गैस की भी बुकिंग बेतहाशा बढ़ी है। देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा के दूसरे दिन ही रसोई गैस सिलेंडरों की तीन गुना बुकिंग हुई।
दूसरी ओर, 30 से 40 फीसदी तक कर्मचारी भी कम हो गए हैं। इसके चलते लोगों के घरों तक सिलेंडर पहुचने में विरतरों को खासी परेशानी हो रही है।
ऑल इंडिया भारत गैस डिस्ट्रीब्यूटर फेडेरशन के अध्यक्ष कैलास दुधानी ने बताया कि मुंबई में सामान्य तौर पर होने वाली 45 हजार सिलेंडरों की बुकिंग लॉकडाउन के बाद बढ़ कर 70 हजार प्रतिदिन तक पहुच गयी है। लोग घबराहट में दूसरे सामानों की तरह रसोई गैस इकट्ठा करने की कोशिश कर रहे हैं।
उपभोक्ताओं को अंदेशा है कि रसोई गैस बाद में नहीं मिलेगी। जो लोग साल में 8-10 सिलेंडर ही इस्तेमाल करते थे, वे भी डर के चलते और सिलेंडरों की बुकिंग कर रहे हैं। दुधानी ने कहा कि वितरकों के पास पर्याप्त मात्रा में गैस और सिलेंडर उपलब्ध हैं।
यातायात के साधनों पर पाबंदी के चलते कर्मचारी नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे गैस पहुंचाने, मरम्मत करने जैसे कामों में कठिनाई आ रही है। उन्होंने कहा कि बुकिंग के बाद नंबर के हिसाब से ही सिलेंडरों की डिलीवरी की जाती है ऐसे में संभव है कि जिनके यहां वाकई जरूरत है उनसे पहले वहां पहुंच जाए जो लोग अपने घरों में बिना जरूरत के सिलेंडर जमाकर रख रहे हैं।
गैस एजेंसी कर्मचारियों को पहचान पत्र जारी करने पर विचार
दुधानी ने बताया कि महानगर की गैस एजेंसियों के ज्यादातर कर्मचारी मीरा रोड, कल्याण जैसे इलाकों में रहते हैं। लोकल ट्रेन बंद होने और जिला बंदी के चलते काम पर नहीं पहुंच पा रहे है। हम प्रशासन से बातचीत कर रहे हैं कि गैस एजेंसियों में काम करने वालों को पहचान पत्र जारी किए जाएं।
वहीं अंधेरी पूर्व में रसोई गैस एजेंसी संचालक दीपक सिंह भी मानते हैं कि रसोई गैस की मांग बढ़ी है, लेकिन लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। पर्याप्त मात्रा में रसोई गैस उपलब्ध है। लेकिन हमें लॉकडाउन के चलते कर्मचारयों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।’
साथ ही, स्वास्थ्य कर्मियों की तरह गैस एजेंसियों में काम कर रहे लोगों को भी बीमा सुविधा दी जाए, क्योंकि वे घर-घर जाकर ज्यादा जोखिम उठा रहे हैं। दीपक सिंह भी कहते हैं कि सरकार को इस मांग पर अमल करना चाहिए।