Indore Collector: नौकरी में आधा समय इंदौर में ही बिताया, क्या इस बार भी और मजबूत होकर लौटेंगे मनीष सिंह
इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह का ट्रांसफर भोपाल कर दिया गया है। उनकी जगह इलैया राजा को इंदौर कलेक्टर बनाया गया है। मनीष सिंह की बात करें तो जब भी उनका ट्रांसफर इंदौर से बाहर हुआ, तब वे और मजबूत होकर लौटे हैं। क्या इस बार भी लौटेंगे?
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इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह का सोमवार को तबादला हो गया। अब उन्हें भोपाल में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम का प्रबंध संचालक बनाया गया है। उनके पास मध्यप्रदेश में मेट्रो प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी भी रहेगी। मनीष सिंह के तबादले के बाद से इंदौर में सिर्फ इसी बात की चर्चा उनकी नौकरी का अधिकांश समय शहर में ही बीता है। इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट भी वायरल हो रहे हैं। उन्होंने एसडीएम से लेकर निगमायुक्त, आईडीए सीईओ से लेकर एकेवीएन एमडी और अब कलेक्टर तक की भूमिका निभाई। हर बार पहले से बड़ी जिम्मेदारी लेकर ही वे इंदौर लौटे हैं।
1996-97 में राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर बने मनीष सिंह को 2009 में आईएएस अवॉर्ड हुआ। इस बीच करीब 26 साल में से आधे से अधिक समय तो उन्होंने इंदौर में ही बिताया है। सिंह की गिनती मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के चहेते अफसर के रूप में होती है और अक्सर उन्हें मनचाही पोस्टिंग ही मिली है। इंदौर के कलेक्टर बनने से पहले वे यहां एसडीएम से निगमायुक्त तक रह चुके हैं। स्वच्छता की रैंकिंग में इंदौर को पहला स्थान छह साल पहले सिंह के निगमायुक्त रहते ही मिला था। हालांकि, उनकी कार्यशैली ऐसी है कि जनप्रतिनिधि भी नाराज रहे हैं। उनकी मौजूदगी की वजह से कई विवाद भी हुए है।
ताल्लुक रीवा से लेकिन प्यार इंदौर से
सिंह वैसे तो रीवा क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन इंदौर उन्हें हमेशा से पसंद रहा है। पहले उनकी पोस्टिंग मंडी सचिव के रूप में इंदौर में हुई थी। इसके बाद वे एसडीएम, एडीएम की भूमिका में रहे। आईडीए सीईओ के रूप में उन्होंने शहर में कई योजनाएं लागू की। शहर में जब दूसरी इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन हुआ, तब सरकार ने मनीष सिंह को एकेवीएन का एमडी बनाया था। अब समिट काफी अच्छी हुई थी और सिंह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की गुडलिस्ट में शामिल हो गए थे। इंदौर के अलावा सिंह तीन साल तक भोपाल नगर निगम के आयुक्त भी रहे। कुछ समय तक उन्होंने पाठ्य पुस्तक निगम की जिम्मेदारी भी संभाली थी।
इंदौर के बाद बने थे उज्जैन कलेक्टर
सिंह के निगम आयुक्त रहते इंदौर को देश के सबसे साफ शहर का दर्जा मिला था। इसके बाद सरकार ने उन्हें उज्जैन कलेक्टर बनाकर भेजा। 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के थोड़े समय बाद ही वे उज्जैन से भोपाल भेज दिए गए। 26 मार्च 2020 को वे इंदौर कलेक्टर बने। सिंह अब मेट्रो के काम के साथ एमपीएसआईडीसी में एमडी की भूमिका में रहेंगे। जनवरी में इंदौर इन्वेस्टर्स समिट होना है और अगले साल चुनाव से पहले सरकार ने मेट्रो ट्रेन के ट्रायल रन का लक्ष्य रखा है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने दोनों विभागों की जिम्मेदारी विश्वासपात्र अफसर को दी है।
विवाद और मनीष सिंह, चोली-दामन का साथ
- मनीष सिंह की सबसे बड़ी उपलब्धि रही इंदौर को सफाई में नंबर वन बनाना। उन्होंने माफिया के खिलाफ अभियान शुरू किया। यह अभियान इंदौर से शुरू हुआ और फिर उसे पूरे प्रदेश में चला। नशे के सौदागरों के खिलाफ मनीष सिंह ने सख्त रवैया अपनाया। उनके मददगारों के अवैध निर्माण पर भी बुलडोजर चलाए। दो माह पहले शहर के ख्यात बिल्डर नीलू पंजवानी के शोरुम को भी प्रशासन ने तुड़वाया था।
- मनीष सिंह जब निगमायुक्त थे, तब अपर आयुक्त रोहन सक्सेना को एक महिला पार्षद के पति ने चांटा मार दिया था। इसके बाद अफसर की शिकायत पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर पार्षद पति व महिला पार्षद को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस के इस एक्शन से भाजपा नेता नाराज हो गए थे और उन्होंने भोपाल तक शिकायत की थी।
- कोरोना काल में सिंह ने काफी अच्छा काम किया। क्वारंटाइन सेंटर बनाने से लेकर सैम्पल लेने का काम अच्छी तरह से कराया। तेजतर्रार कार्यशैली के कारण उनकी स्वास्थ्य विेभाग के अफसरों के निशाने पर भी रहे। एक सीएमएचओ पर वे बैठक में नाराज हो गए थे तो सीएमएचओ रोते हुए बैठक से निकले। महिला स्वास्थ्य अधिकारी पूर्णिमा गडरिया ने सिंह के रवैये से नाराज होकर इस्तीफा दे दिया था। बाद में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने हड़ताल भी कर दी थी। सिंह को खेद प्रकट कर मामले का पटाक्षेप करना पड़ा था।
