Ujjain News: उज्जैन मेें हर रोज पूजा जाता है राजा विक्रमादित्य का सिंहासन
उज्जैनवासियों की मान्यता है कि रुद्र सागर के पास जो टीला है, वहां पर सिंहासन जमीन में दबा है। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 को इस स्थान पर राजा विक्रमादित्य के सिंहासन वाली प्रतिमा यहां स्थापित की है और अब यहां एक पैदल पुल भी बन रहा है।
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उज्जैन नगरी की पहचान महाकाल के अलावा राजा विक्रमादित्य से भी होती है। उन्होंने हिन्दू कैलेंडर विक्रम संवत की शुरूआत उज्जैन से की है। राजा विक्रमादित्य का 36 पुुतलियों वाल रहस्यमई सिंहासन को लेकर भी कई किस्से कहानियां उज्जैन में प्रचलित है। माना जाता है कि राजा विक्रमादित्य का दरबार उनकी कुलदेवी हरसिद्धी माता के मंदिर के सामने लगता था अौर वही उनका सिंहासन स्थित था। उस स्थान पर खुदाई में निकले पत्थरों को सिंहासन के अवशेष मानकर रोज उनकी पूजा होती है और पर्यटक उस विक्रम टीले को भी देखने अाते हैै।
महाकाल लोक का हिस्सा होगा विक्रम टीला
उज्जैनवासियों की मान्यता है कि रुद्र सागर के पास जो टीला है, वहां पर सिंहासन जमीन में दबा है। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 को इस स्थान पर राजा विक्रमादित्य के सिंहासन वाली प्रतिमा यहां स्थापित की है अौर अब यहां एक पैदल पुल भी बन रहा है। महाकाल लोक के दूसरे चरण केे कामों के बाद यह स्थान भी महाकाल लोक का हिस्सा होगा।
रोज होती है पूजा
उज्जैन मेंं विक्रमादित्य का एक प्राचीन मंदिर भी है। इसके अलावा सिंहासन के अवशेषों के भी उनकी एक मूर्ति रखी है। पुजारी दर्शन शर्मा बताते है कि विक्रमादित्य के सिंहासन की रोज पूजा होती है। उनके स्थान पर अलग ही अनुभूति होती है। कई लोग यहां ध्यान लगाकर भी बैैठते हैै।
पुजारी शर्मा बताते है कि सिंहासन बत्तीसी के बारे में यह मान्यता है कि सम्राट विक्रमादित्य उस सिंहासन पर बैठकर न्याय करते थे और उस पर बने 32 मुख इसमें उनकी सहायता किया करते थे। विक्रमादित्य का राज समाप्त होने के बाद सिंहासन गायब हो गया तो सालों बाद राजा भोज ने इसकी वापस खोज करवाई और उस पर बैठना चाहा, लेकिन उनकी इच्छा पूरी नहीं हो पाई। सिंहासन की 32 पुतलियों ने राजा विक्रमादित्य की महानता का बखान करते हुए राजा भोज को सिंहासन पर बैठने नहीं दिया।
धूमधाम से मनता है गुड़ी पड़वा
सम्राट विक्रमादित्य बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के राजा थे। उन्होंने गुड़ी पड़वा से नए हिन्दू वर्ष की घोषणा की थी, इसलिए हर साल गुड़ी पड़वा उज्जैन में धूमधाम से मनाया जाता है। उज्जैन में कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। शिप्रा नदी के तट पर सूर्य को अर्ध्य देकर और शंख बजाकर नव वर्ष का स्वागत किया जाता है अौर महाकाल का भी विशेष श्रृंगार होता है।
