इंदौर: फोर के बजाए टू लेन क्यों बना रहे ब्रिज, रेलवे को देना होगा कोर्ट में जवाब
इंदौर के केसरबाग रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहे दो लेन के ब्रिज को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रेलवे करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से इस ब्रिज का निर्माण कर रहा है। वहीं, इसे चार या छह लेन का बनाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।
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इंदौर के केसरबाग रेलवे क्रॉसिंग पर करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे दो लेन के ब्रिज की चौड़ाई को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता डॉ. संजय कांबले का कहना है कि जिस सड़क पर ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है, वह फोरलेन है। यह मार्ग शहर के बाहरी हिस्सों को जोड़ने वाली लिंक रोड भी है। ऐसे में भविष्य में इस मार्ग पर यातायात का दबाव बढ़ने की आशंका है। इसे देखते हुए ब्रिज का निर्माण कम से कम चार लेन में किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, किसी भी बड़ी परियोजना की योजना बनाते समय अगले 50 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। दो लेन का ब्रिज बनने से भविष्य में यहां यातायात जाम की समस्या पैदा हो सकती है। इसके अलावा, निर्माण के कारण आसपास के रहवासियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कांबले ने उदाहरण देते हुए बताया कि बाणगंगा ब्रिज का निर्माण पहले दो लेन में किया गया था, लेकिन बाद में उसे फोरलेन करना पड़ा। ऐसे में केसरबाग ब्रिज के लिए भी शुरुआत से ही अतिरिक्त दो लेन का प्रावधान किया जाना चाहिए।
ब्रिज को चार लेन का बनाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। अब 16 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में रेलवे को अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा। रेलवे को यह स्पष्ट करना होगा कि सड़क की चौड़ाई और भविष्य में बढ़ने वाले यातायात को देखते हुए ब्रिज का निर्माण दो लेन में करने का निर्णय क्यों लिया गया।
केसरबाग रेलवे क्रॉसिंग शहर की उन चुनिंदा क्रॉसिंग में शामिल थी, जहां अब तक ब्रिज नहीं बना था। शहर की अन्य रेलवे क्रॉसिंग पर ब्रिज बन चुके हैं। इस क्रॉसिंग का गेट दिनभर में 20 से अधिक बार बंद होता था, जिससे वाहन चालकों को परेशानी होती थी। करीब दो महीने पहले यहां रेलवे क्रॉसिंग बंद कर ब्रिज का निर्माण शुरू किया गया है। निर्माण कार्य को 15 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
